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भारत में सिंचाई, कृषि पद्धतियों और प्रमुख फसलों (Cropping Systems and Irrigation Practices in India) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. देश के कुल शुद्ध बोए गए क्षेत्र (Net Sown Area) का लगभग 50% से अधिक हिस्सा वर्तमान में सिंचाई सुविधाओं के अंतर्गत आता है, जिसमें नलकूप (Tube wells) और अन्य कुएँ भारत में सिंचाई के सबसे बड़े स्रोत हैं।
- 2. 'शून्य जुताई' (Zero Tillage) या न्यूनतम जुताई की कृषि पद्धति मृदा के स्वास्थ्य को बनाए रखने, खरपतवारों के नियंत्रण और अवशेषों के प्रबंधन के साथ-साथ मृदा में कार्बन के स्थिरीकरण में सहायक होती है, और यह विशेष रूप से चावल-गेहूं फसल चक्र के विविधीकरण और संधारणीयता के लिए अपनाई जाती है।
- 3. भारत में 'श्री विधि' (System of Rice Intensification - SRI) पद्धति कम पानी के उपयोग, कम बीजों की आवश्यकता और पौधों के बीच अधिक दूरी रखकर धान की खेती करने की एक ऐसी तकनीक है जिससे फसल की पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
- 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में कुल खाद्यान्न उत्पादन में चावल का हिस्सा सबसे अधिक है, और इसके अंतर्गत आने वाले कुल क्षेत्रफल के मामले में 'गेहूं' देश की दूसरी सबसे प्रमुख खाद्यान्न फसल है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि भारत के कुल शुद्ध बोए गए क्षेत्र (Net Sown Area) का लगभग 50% से अधिक हिस्सा सिंचित नहीं है, बल्कि यह लगभग 48-50% के आसपास है और आज भी एक बड़ा कृषि हिस्सा मानसूनी वर्षा पर निर्भर करता है, हालांकि नलकूप और कुएं सिंचाई के सबसे बड़े स्रोत हैं। कथन 2 सही है, शून्य जुताई (Zero Tillage) मृदा अपरदन को रोकने, नमी संरक्षण और कार्बनिक पदार्थों को बढ़ाने के लिए एक पर्यावरण-अनुकूल संरक्षण कृषि पद्धति है। कथन 3 सही है, SRI (System of Rice Intensification) तकनीक धान की उत्पादकता बढ़ाने, जल की बचत करने और कम बीज व रासायनिक खादों के उपयोग पर जोर देती है। कथन 4 गलत है क्योंकि क्षेत्रफल और उत्पादन दोनों दृष्टियों से भारत में चावल प्रथम स्थान पर है, लेकिन कुल खाद्यान्न उत्पादन में चावल के बाद गेहूं का स्थान क्षेत्रफल और उत्पादन दोनों में दूसरा है, परंतु कथन 4 में क्षेत्रफल के मामले में गेहूं को दूसरी प्रमुख फसल बताना आंशिक रूप से भ्रामक हो सकता है क्योंकि बाजरा/मक्का या अन्य खाद्यान्न क्षेत्रफल के संदर्भ में भिन्न हो सकते हैं, जबकि सही कूट केवल 2 और 3 को सत्यापित करता है। विस्तृत जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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भारत में ऊर्जा संसाधनों के वितरण, उनकी भू-तापीय और अपारंपरिक विशेषताओं तथा परमाणु ऊर्जा से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में लिग्नाइट कोयला (Lignite Coal) के सबसे बड़े भंडार तमिलनाडु के नेवेली बेसिन में पाए जाते हैं, इसके अतिरिक्त इसके कुछ निक्षेप राजस्थान के पालाना, गुजरात के कच्छ और जम्मू-कश्मीर के करेवा क्षेत्रों में भी मिलते हैं।
2. देश का पहला प्रायोगिक भू-तापीय ऊर्जा संयंत्र (Geothermal Power Plant) लद्दाख के पुगा घाटी (Puga Valley) क्षेत्र में स्थापित किया गया है, जहाँ प्राकृतिक रूप से गर्म पानी के झरने और वाष्प के भंडार उपलब्ध हैं।
3. भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में 'तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम' (Three-stage Nuclear Power Programme) की परिकल्पना डॉ. होमी जहांगीर भाभा द्वारा की गई थी, जिसके दूसरे चरण में प्राकृतिक यूरेनियम और प्लूटोनियम-239 ईंधन का उपयोग करके फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों (FBR) के संचालन का प्रावधान है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार केरल के समुद्रतटीय बालू में भारी मात्रा में पाए जाने वाले 'मोनाजाइट' (Monazite) अयस्क से थोरियम प्राप्त होता है, जिसका उपयोग भारतीय परमाणु कार्यक्रम के तीसरे चरण में विखंडनीय ईंधन (Uranium-233) के रूप में किया जाना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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सौर मंडल के ग्रहों, उनकी आंतरिक संरचना और खगोलीय पिंडों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आंतरिक (पार्थिव) ग्रह मुख्य रूप से चट्टानों और धातुओं से बने होते हैं तथा इनका घनत्व अधिक होता है, जबकि बाह्य (जोवियन) ग्रह मुख्य रूप से हाइड्रोजन और हीलियम जैसी हल्की गैसों से बने विशालकाय ग्रह हैं जिनका औसत घनत्व जल से भी कम हो सकता है।
2. 'शुक्र' (Venus) ग्रह पर अत्यधिक मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड (लगभग 96-97%) के पाए जाने के कारण वहाँ तीव्र 'ग्रीनहाउस प्रभाव' उत्पन्न होता है, जो इसे सौर मंडल का सबसे अधिक गर्म ग्रह बनाता है, यद्यपि सूर्य से निकटता के मामले में बुध प्रथम स्थान पर है।
3. क्षुद्रग्रह पेटी (Asteroid Belt) मुख्य रूप से मंगल और बृहस्पति ग्रहों की कक्षाओं के बीच सूर्य की परिक्रमा करती है, और इस क्षेत्र में स्थित 'सेरेस' (Ceres) को अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ (IAU) द्वारा एक बौने ग्रह (Dwarf Planet) के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'कुइपर बेल्ट' (Kuiper Belt) नेपच्यून की कक्षा के परे स्थित एक क्षेत्र है जहाँ ढेरों बर्फीले पिंड और धूमकेतु पाए जाते हैं, और यहीं से दीर्घ-कालिक (Long-period) धूमकेतुओं की उत्पत्ति होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत की भौगोलिक स्थिति, स्थितिज सीमाओं और अक्षांशीय-देशांतरीय विस्तार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत की मुख्य भूमि का अक्षांशीय विस्तार 8°4' उत्तर से 37°6' उत्तर अक्षांशों के बीच है, जबकि इसका देशांतरीय विस्तार 68°7' पूर्व से 97°25' पूर्व देशांतरों के बीच है, जिसके कारण देश का उत्तर से दक्षिण का वास्तविक विस्तार इसकी पूर्व से पश्चिम की चौड़ाई की तुलना में अधिक प्रतीत होता है।
2. कर्क रेखा (23°30' उत्तर) देश के लगभग मध्य से गुजरती है और इसे दो स्पष्ट जलवायु कटिबंधों (उष्ण और उपोष्ण/शीतोष्ण) में विभाजित करती है, तथा यह कुल आठ राज्यों से होकर गुजरती है जिसमें झारखंड की राजधानी रांची इस रेखा के सबसे समीप स्थित शहरों में से एक है।
3. भारत के सबसे पूर्वी बिंदु (किबिथु, अरुणाचल प्रदेश) और सबसे पश्चिमी बिंदु (गुहार मोती, गुजरात) के बीच लगभग 30 देशांतरों का अंतराल है, जिसके कारण दोनों स्थानों के स्थानीय समय में लगभग 120 मिनट (2 घंटे) का सैद्धांतिक अंतर आता है, फिर भी देश में एक ही मानक समय (IST) लागू है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत की कुल स्थलीय सीमा लगभग 15,106.7 किमी है, जो सात पड़ोसी देशों के साथ साझा होती है, जिसमें म्यांमार के साथ सबसे लंबी और अफगानिस्तान के साथ सबसे छोटी अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पृथ्वी के वायुमंडल की विभिन्न परतों और वायुदाब पेटियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. समतापमंडल (Stratosphere) में ओजोन परत की उपस्थिति के कारण तापमान ऊँचाई के साथ बढ़ता है, और इसी परत के निचले हिस्से में जेट विमानों के उड़ने के लिए आदर्श दशाएँ पाई जाती हैं क्योंकि यहाँ मौसमी हलचलें न्यूनतम होती हैं।
2. 'डोलड्रम' (Doldrums) या भूमध्यरेखीय शांत पेटी विषुवत वृत्त के दोनों ओर लगभग 5° उत्तर से 5° दक्षिण अक्षांशों के बीच विस्तृत एक उच्च वायुदाब पेटी है, जहाँ धरातलीय पवनें शांत रहती हैं।
3. उपोष्ण उच्च वायुदाब पेटियों (Subtropical High-Pressure Belts) से विषुवतीय निम्न वायुदाब पेटियों की ओर बहने वाली पवनें कोरियोलिस बल के प्रभाव से उत्तरी गोलार्ध में उत्तर-पूर्व और दक्षिणी गोलार्ध में दक्षिण-पूर्व दिशा से चलती हैं, जिन्हें व्यापारिक पवनें कहा जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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पृथ्वी की वायुमंडलीय पवन प्रणालियों, वायुराश्यों और चक्रवातों की गतिशीलता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'वाकर परिसंचरण' (Walker Circulation) उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के ऊपर चलने वाला एक पूर्व-पश्चिम वायुमंडलीय परिसंचरण है, जिसमें पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में उच्च वायुदाब और अवरोही हवाओं के कारण शुष्क मौसम होता है, जबकि पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में निम्न वायुदाब और संवहनी मेघों के कारण भारी वर्षा होती है।
2. 'उष्णकटिबंधीय चक्रवातों' के विपरीत, 'शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात' (Temperate Cyclones) केवल जलीय सतहों पर उत्पन्न होते हैं और इनके विकास के लिए समुद्र की सतह का तापमान न्यूनतम 27°C होना आवश्यक होता है, तथा ये फ्रंट (Fronts) या वाताग्र का निर्माण नहीं करते हैं।
3. 'जेट स्ट्रीम' (Jet Streams) क्षोभमंडल की ऊपरी परतों में अत्यधिक तीव्र गति से बहने वाली भू-विक्षेपी (Geostrophic) हवाएँ हैं, जो ध्रुवीय और उष्णकटिबंधीय वायुराश्यों के तापमान के भारी अंतर के कारण उत्पन्न होती हैं और मौसम के मिजाज को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवातों की उत्पत्ति मुख्य रूप से ध्रुवीय वाताग्र (Polar Front) के सहारे विभिन्न दिशाओं से आने वाली गर्म और ठंडी हवाओं के मिलने से होती है, और ये पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) के रूप में भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिम भाग में सर्दियों में वर्षा लाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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