BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Geography
9 views

चक्रवातों, पवन प्रणालियों और आर्द्रता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. उष्णकटिबंधीय चक्रवातों (Tropical Cyclones) के केंद्र में 'चक्रवात की आँख' (Eye of the Storm) होती है, जो शांत मौसम, न्यूनतम वायुदाब और मेघ-रहित आकाश वाला क्षेत्र होती है, जबकि इसके चारों ओर 'दीवार मेघ' (Eyewall) में अत्यधिक तीव्र वर्षा और विनाशकारी पवनें चलती हैं।
  2. 2. शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवातों (Temperate Cyclones) की उत्पत्ति मुख्य रूप से भिन्न तापमान और घनत्व वाली दो विपरीत वायु राशियों (Warm and Cold Air Masses) के मिलने से बनने वाले 'वाताग्र' (Fronts) के सहारे होती है, और इनका प्रभाव बड़े भौगोलिक क्षेत्र पर विस्तृत होता है।
  3. 3. 'सापेक्ष आर्द्रता' (Relative Humidity) वायु में मौजूद जलवाष्प की वास्तविक मात्रा और उसी तापमान पर वायु की जलवाष्प धारण करने की अधिकतम क्षमता का प्रतिशत अनुपात होती है, जो तापमान बढ़ने पर घट जाती है।
  4. 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार दक्षिणी गोलार्ध में चक्रवातों के भीतर पवनों की दिशा घड़ी की सुइयों की दिशा के विपरीत (Counter-clockwise / वामावर्त) होती है, जो कोरियोलिस बल के प्रभाव के कारण उत्पन्न होती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 3 सही हैं। उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के केंद्र को 'आँख' कहा जाता है जो शांत होती है और इसके चारों ओर दीवार मेघ में भारी वर्षा होती है। शीतोष्ण चक्रवात वाताग्रों (Fronts) के सहारे बनते हैं। सापेक्ष आर्द्रता तापमान के व्युत्क्रमानुपाती होती है, यानी तापमान बढ़ने पर आर्द्रता घटती है। कथन 4 गलत है क्योंकि फेरेल के नियम और कोरियोलिस बल के प्रभाव के कारण **उत्तरी गोलार्ध** में चक्रवातों में पवनें वामावर्त (Counter-clockwise) तथा **दक्षिणी गोलार्ध** में दक्षिणावर्त (Clockwise) दिशा में चलती हैं। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार चक्रवातों की गतिशीलता पृथ्वी के घूर्णन और वायुदाब प्रवणता पर निर्भर करती है।
Share:

Related Questions

भारतीय मृदा विज्ञान परिषद (ICAR) द्वारा वर्गीकृत भारतीय मृदाओं के प्रकार, उनकी रासायनिक संरचना और भौगोलिक वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. लाल और पीली मृदा का लाल रंग क्रिस्टलीय और कायांतरित चट्टानों में लौह ऑक्साइड के व्यापक विसरण (Diffusion) के कारण होता है, जबकि इसका पीला रंग जलीय योजन (Hydration) की स्थिति उत्पन्न होने के कारण प्रकट होता है। 2. लैटेराइट मृदा का विकास उच्च तापमान और अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में तीव्र निक्षालन (Leaching) प्रक्रिया के फलस्वरूप होता है, जिसमें सिलिका का निक्षालन हो जाता है और लोहे तथा एल्युमिनियम के ऑक्साइड शेष बच जाते हैं, जिससे यह मिट्टी नाइट्रोजन और पोटाश से भरपूर होती है और कृषि के लिए अत्यधिक उपजाऊ होती है। 3. क्षारीय और लवणीय मृदा (Usar/Alkaline Soil) को 'रेह', 'कल्लर' या 'ऊसर' भी कहा जाता है, जो मुख्य रूप से शुष्क और अर्ध-शुष्क जलवायु तथा खराब जल-निकास वाले क्षेत्रों में सोडियम, मैग्नीशियम और कैल्शियम के लवणों के केशिका आकर्षण (Capillary Action) द्वारा धरातल पर जमा होने से बनती है। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार काली मृदा (Black Soil) में 'स्वतः जुताई' (Self-ploughing) का विशेष गुण पाया जाता है, क्योंकि गीली होने पर यह चिपचिपी और फूल जाती है तथा सूखने पर इसमें गहरी चौड़ी दरारें पड़ जाती हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? पृथ्वी के प्रमुख उच्चावच रूपों (पर्वत, पठार, मैदान और मरुस्थल) की उत्पत्ति, संरचना और उनकी विशिष्ट भौगोलिक विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'तिब्बत का पठार' (Tibetan Plateau) एक अंतरपर्वतीय पठार (Intermontane Plateau) का सबसे बड़ा और सबसे ऊँचा उदाहरण है, जिसका निर्माण भारतीय और यूरेशियन विवर्तनिक प्लेटों के अभिसरण के परिणामस्वरूप टरटियरी काल में हुआ था। 2. 'कोलोरैडो का पठार' (Colorado Plateau) संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थित एक गुंबदाकार पठार (Dome Plateau) है, जहाँ नदियों के लंबे समय तक लंबवत अपरदन (Vertical erosion) के कारण प्रसिद्ध 'ग्रैंड कैन्यन' जैसी भूआकृतियों का निर्माण हुआ है। 3. 'ग्रेट ऑस्ट्रेलियन मरुस्थल' (Great Australian Desert) एक ठंडे महाद्वीपीय मरुस्थल का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसका निर्माण एंडीज पर्वतमाला के वृष्टि-छाया प्रभाव और उपोष्णकटिबंधीय उच्च वायुदाब पेटी (Subtropical High-Pressure Belt) की स्थिति के कारण हुआ है। 4. 'सिंधु-गंगा का मैदान' (Indus-Ganga Plain) एक अग्र-गर्त मैदान (Foredeep Plain) है, जिसका निर्माण हिमालय पर्वत निर्माण की प्रक्रिया के दौरान उसके अग्रभाग में बने विशाल द्रोणी क्षेत्र में नदियों द्वारा लाए गए अवसादों के लंबे समय तक संचयन से हुआ है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? भारत के प्रमुख हिमालयी और प्रायद्वीपीय दर्रों तथा उनकी अवस्थिति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'बुर्जिला दर्रा' (Burzil Pass) कश्मीर घाटी को लद्दाख के देवसाई मैदानों से जोड़ਦਾ है, जबकि 'काराकोरम दर्रा' लद्दाख क्षेत्र में काराकोरम श्रेणी पर स्थित भारत का सबसे ऊँचा मोटर योग्य दर्रा है जो भारत को चीन के शिनजियांग प्रांत से जोड़ता है। 2. हिमाचल प्रदेश में स्थित 'शिपकी ला दर्रा' जास्कर रेंज में अवस्थित है, जिसके निकट से सतलुज नदी भारत में प्रवेश करती है, तथा यह शिमला को तिब्बत से जोड़ने वाला एक प्रमुख व्यापारिक मार्ग है। 3. अरुणाचल प्रदेश में स्थित 'बोमडिला दर्रा' तवांग घाटी को ल्हासा (तिब्बत) से जोड़ता है, जबकि 'दीफू दर्रा' (Diphu Pass) अरुणाचल प्रदेश, म्यांमार और चीन की त्रि-संधि (Tri-junction) सीमा के निकट पूर्वी हिमालय में स्थित एक रणनीतिक दर्रा है। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार दक्षिण भारत के पश्चिमी घाट में स्थित 'पालघाट दर्रा' (Palakkad Gap) नीलगिरी और अन्नामलाई पहाड़ियों के बीच स्थित एक प्रमुख अंतराल है, जो कोच्चि को चेन्नई से जोड़ने वाली रेल और सड़क मार्ग को सुगम बनाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? सौर मंडल के क्षुद्रग्रह पेटी (Asteroid Belt), बौने ग्रहों (Dwarf Planets) और ओर्ट मेघ (Oort Cloud) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. क्षुद्रग्रह पेटी मुख्य रूप से मंगल और बृहस्पति ग्रहों की कक्षाओं के मध्य स्थित है, जिसमें पाए जाने वाले अधिकांश क्षुद्रग्रहों में 'सेरेस' (Ceres) सबसे बड़ा पिंड है जिसे अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ द्वारा बौना ग्रह घोषित किया गया है। 2. 'काइपर बेल्ट' (Kuiper Belt) नेपच्यून की कक्षा से परे सूर्य से लगभग 30 से 50 खगोलीय इकाई की दूरी तक फैली हुई एक तश्तरीनुमा डिस्क है, जहाँ से दीर्घकालिक पुच्छल तारा (Comets) उत्पन्न होते हैं। 3. 'ओर्ट मेघ' सौर मंडल की सबसे बाहरी सीमा पर स्थित एक काल्पनिक गोलाकार खोल (Spherical Shell) है, जो सूर्य से लगभग 2,000 से 100,000 खगोलीय इकाई की दूरी तक फैला हुआ माना जाता है और यह दीर्घकालिक धूमकेतुओं का प्रमुख भंडार है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? भारत के अपवाह तंत्र (Drainage System) के संदर्भ में, हिमालयी नदियों और प्रायद्वीपीय नदियों की तुलनात्मक विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हिमालयी नदियाँ अपने युवा अवस्था में तीव्र अपरदन के द्वारा गहरे गॉर्ज, वी-आकार की घाटियाँ (V-shaped valleys) और महाखड्डों का निर्माण करती हैं, जबकि मैदानों में प्रवेश करने के बाद ये विसर्पण (Meandering) और गोखुर झीलों (Oxbow lakes) जैसी स्थलाकृतियों का निर्माण करती हैं। 2. प्रायद्वीपीय नदियाँ मुख्य रूप से वर्षा के जल पर निर्भर होने के कारण अनित्य (Non-perennial) या मौसमी होती हैं, तथा इनकी घाटियाँ चौड़ी, उथली और अपनी परिपक्व अवस्था (Matured stage) को प्राप्त कर चुकी होती हैं, जिस कारण ये अपने निचले भागों में व्यापक बाढ़ के मैदानों का निर्माण करती हैं। 3. सोन नदी, जो अमरकंटक पठार से निकलती है, प्रायद्वीपीय भारत की उन चुनिंदा नदियों में से एक है जो उत्तर की ओर बहते हुए सीधे गंगा नदी में मिलती है और यह एक पूर्ववर्ती अपवाह (Antecedent drainage) का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है। 4. गोदावरी, कृष्णा और कावेरी जैसी प्रायद्वीपीय नदियाँ पश्चिमी घाट से निकलकर पूर्व की ओर प्रवाहित होती हैं और बंगाल की खाड़ी में गिरने से पहले बड़े डेल्टा का निर्माण करती हैं, जबकि नर्मदा और तापी नदियाँ भ्रंश घाटियों (Rift valleys) से होते हुए अरब सागर में ज्वारनदमुख (Estuaries) का निर्माण करती हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.