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Geography
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पृथ्वी के प्रमुख भू-आकृतिक स्वरूपों (पर्वत, पठार, मैदान और मरुस्थल) की उत्पत्ति, संरचना और उनकी विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 'कोलोरैडो का पठार' (Colorado Plateau) एक अंतरपर्वतीय (Intermontane) पठार का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसका निर्माण विवर्तनिक उत्थान के बाद नदियों के अपरदन द्वारा गहरे महाखड्डों (Canyons) के निर्माण से हुआ है, और यह मुख्यतः मरुस्थलीय से अर्द्ध-शुष्क जलवायु के अंतर्गत आता है।
  2. 2. 'ग्रेट ऑस्ट्रेलियन मरुस्थल' और 'कालाहारी मरुस्थल' दोनों महाद्वीपीय उष्णकटिबंधीय मरुस्थल हैं, जिनका मुख्य निर्माण उपोष्णकटिबंधीय उच्च वायुदाब पेटियों (Subtropical High-Pressure Belts) के नीचे की ओर बैठने वाली शुष्क हवाओं और महाद्वीपीयता (Continentality) के प्रभाव से हुआ है।
  3. 3. 'हंगरी का मैदान' (Pannonian Plain) और 'मंचूरिया का मैदान' अंतरापर्वतीय या संरचनात्मक मैदानों के अंतर्गत आते हैं, जो टेथिस सागर या अन्य भूसंकियों के मलबे के अवसादन और बाद में जलोढ़ निक्षेपों के कारण समतल हुए हैं।
  4. 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार एंडीज पर्वतमाला (Andes Mountains) विश्व की सबसे लंबी वलित (Fold) पर्वतमाला है, जो दक्षिण अमेरिकी प्लेट और नाज़्का प्लेट के अभिसरण के परिणामस्वरुप प्रशांत महासागरीय महाद्वीपीय सीमा पर निर्मित हुई है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: कोलोरैडो का पठार अमेरिका का एक प्रमुख पठार है जो विवर्तनिक उत्थान के बाद नदी अपरदन से बने भव्य कैन्यन (जैसे ग्रैंड कैन्यन) के लिए प्रसिद्ध है। कथन 2 सही है: ग्रेट ऑस्ट्रेलियन और कालाहारी मरुस्थल उपोष्णकटिबंधीय उच्च दाब पेटियों (हॉर्स अक्षांश) और महाद्वीपीय प्रभावों के कारण बने उष्णकटिबंधीय मरुस्थल हैं। कथन 3 गलत है: हंगरी का मैदान (पैनोनियन बेसिन) एक 'संरचनात्मक या आंतरिक निम्न मैदान' (Structural Plain/Basin) है जो चारों ओर से पर्वतों से घिरा हुआ है, किंतु यह भूसंकियों के जलोढ़ निक्षेप से नहीं बल्कि अंतरापर्वतीय बेसिन के रूप में अवसादन से बना है; अधिक महत्वपूर्ण रूप से, 'मंचूरिया का मैदान' एक समतल जलोढ़ मैदान है जो अमूर और उसकी सहायक नदियों द्वारा लाए गए मलबे से बना है, न कि अंतरापर्वतीय मैदान के रूप में। कथन 4 सही है। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार पृथ्वी के उच्चावच में पर्वत, पठार, मैदान और मरुस्थल भू-पटल पर आंतरिक और बाह्य बलों की अंतःक्रिया के परिणामस्वरूप विकसित होते हैं।
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विवर्तनिक प्रक्रियाओं और भूकंप विज्ञान के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'रिक्टर पैमाना' (Richter Scale) भूकंप द्वारा मुक्त होने वाली ऊर्जा को मापता है और यह एक लघुगणकीय (Logarithmic) पैमाना है, जिसका अर्थ है कि पैमाने पर प्रत्येक पूर्ण संख्या की वृद्धि ऊर्जा रिलीज में लगभग 32 गुना वृद्धि को दर्शाती है। 2. 'सुनामी तरंगें' महासागरों में अत्यंत लंबी तरंगदैर्ध्य (Wavelength) और उच्च आयाम वाली उथले जल की तरंगें होती हैं, जो गहरे समुद्र में अत्यधिक तीव्र गति से यात्रा करती हैं, लेकिन तटीय क्षेत्रों में पहुँचने पर इनकी गति कम हो जाती है और ऊँचाई अत्यधिक बढ़ जाती है। 3. 'शील्ड ज्वालामुखी' (Shield Volcanoes), हवाई द्वीप समूह के ज्वालामुखियों की तरह, अत्यधिक विस्फोटक और अम्लीय (Silica-rich) लावा के उदगार से बनते हैं, जो ठंडे होकर ऊँचे और शकुआकार पर्वतों का निर्माण करते हैं। 4. 'अग्नि वलय' (Ring of Fire) प्रशांत महासागर के चारों ओर एक घोड़े की नाल के आकार का क्षेत्र है, जहाँ पृथ्वी के अधिकांश सक्रिय ज्वालामुखी और बड़े भूकंपीय क्षेत्र अभिसारी तथा रूपांतरित प्लेट सीमाओं के सहारे केंद्रित हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? भूकंपीय तरंगों, ज्वालामुखी उद्गार की क्रियाओं और सुनामी की उत्पत्ति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्राथमिक भूकंपीय तरंगें (P-waves) अनुदैर्ध्य (Longitudinal) तरंगें होती हैं, जो ध्वनि तरंगों की भाँति ठोस, तरल और गैस तीनों माध्यमों से गुजर सकती हैं, किंतु तरल माध्यम में से गुजरने पर इनकी गति में तीव्र ह्रास (attenuation) होता है। 2. 'शिल्ड ज्वालामुखी' (Shield Volcanoes) मुख्य रूप से बेसॉल्टिक लावा के अत्यंत तरल और कम चिपचिपे (low viscosity) प्रवाह से निर्मित होते हैं, जिसके कारण ये बहुत कम ढाल वाले और विस्तृत गुंबद का रूप लेते हैं, जैसे कि हवाई द्वीप के मौना लोआ (Mauna Loa) ज्वालामुखी। 3. सुनामी तरंगें महासागरों में अत्यंत लंबी तरंगदैर्ध्य (wavelength) और कम आयाम वाली होती हैं, जिसके कारण गहरे समुद्र में जहाजों को इनका आभास नहीं होता है, किंतु उथले तटीय क्षेत्रों में पहुँचने पर इनकी तरंगदैर्ध्य घट जाती है और इनकी ऊँचाई (amplitude) विनाशकारी रूप से बढ़ जाती है। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'एंटीपोडल ज़ोन' (Antipodal Zone) या भूकंपीय छाया क्षेत्र (Shadow Zone) में S-तरंगें 105° से 145° के बीच सर्वथा अनुपस्थित रहती हैं, जो पृथ्वी के बाह्य क्रोड के तरल होने का अकाट्य प्रमाण देता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? पृथ्वी के वायुमंडल की विभिन्न परतों, उनकी तापीय विशेषताओं तथा भूमंडलीय वायुदाब पेटियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'समताप मंडल' (Stratosphere) के निचले भाग में ओजोन गैस की अधिकता पाई जाती है, जिसे ओजोनोस्फीयर भी कहते हैं; इस परत में ऊंचाई के साथ तापमान में वृद्धि होती है क्योंकि ओजोन अणु पराबैंगनी किरणों का अवशोषण करते हैं। 2. 'आयनमंडल' (Ionosphere) में स्थित कण सूर्य से आने वाले पराबैंगनी और एक्स-किरणों के प्रभाव से आयनित हो जाते हैं, जो पृथ्वी से प्रेषित रेडियो तरंगों को वापस परावर्तित करके संचार व्यवस्था को संभव बनाते हैं। 3. 'अश्व अक्षांश' (Horse Latitudes) या उपोष्णकटिबंधीय उच्च वायुदाब पेटियों (Subtropical High-Pressure Belts) का निर्माण पूर्णतः तापीय कारणों से होता है, क्योंकि भूमध्य रेखा से उठने वाली गर्म हवाएँ ठंडी होकर इन अक्षांशों पर नीचे बैठती हैं। 4. 'अन्तः उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र' (ITCZ) एक निम्न वायुदाब पेटी है जहाँ उत्तर-पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी व्यापारिक हवाएँ आपस में मिलती हैं, तथा पृथ्वी के परिक्रमण के साथ इस पेटी की स्थिति में मौसमी बदलाव होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? महासागरीय जलधाराओं (Ocean Currents) और उनके तापीय तथा भौगोलिक प्रभावों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'एल निनो' (El Niño) घटना के दौरान भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के पूर्वी और मध्य भाग में सतह के जल का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है, जो 'पेरू की ठंडी जलधारा' (Humboldt Current) के प्रभाव को कमजोर कर देता है और दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट पर भारी वर्षा तथा मत्स्य उद्योग में भारी गिरावट का कारण बनता है। 2. उत्तरी अटलांटिक महासागर में प्रवाहित होने वाली 'गल्फ स्ट्रीम' (Gulf Stream) और 'नार्थ अटलांटिक ड्रिफ्ट' के प्रभाव के कारण पश्चिमी यूरोप के बंदरगाह उच्च अक्षांशों पर स्थित होने के बावजूद शीतकाल में भी जमता नहीं है और खुले रहते हैं। 3. 'कैनेरी जलधारा' (Canary Current) उत्तरी अटलांटिक महासागर की एक ठंडी जलधारा है, जो अफ्रीका के उत्तर-पश्चिमी तट के सहारे प्रवाहित होती है और इसके प्रभाव से सहारा मरुस्थल के तटीय क्षेत्रों में वर्षा की मात्रा में वृद्धि होती है तथा आर्द्र जलवायु का विकास होता है। 4. महासागरीय जलधाराओं के संचलन में पृथ्वी का घूर्णन और 'कोरिऑलिस बल' (Coriolis Force) प्रमुख भूमिका निभाते हैं, जिसके कारण ये जलधाराएँ उत्तरी गोलार्ध में अपनी मूल दिशा से दाईं ओर (घड़ी की सुई की दिशा में - Clockwise) और दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर (घड़ी की सुई की विपरीत दिशा में - Counter-clockwise) विक्षेपित हो जाती हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? पृथ्वी के वायुमंडल के संगठन, विभिन्न परतों और वैश्विक वायुदाब पेटियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वायुमंडल की नीचली परतों (क्षोभमंडल) में गैसों का मिश्रण लगभग एकसमान रहता है, जिसे 'सममंडल' (Homosphere) कहा जाता है, जबकि लगभग 90 किलोमीटर की ऊँचाई के ऊपर गैसों के आणविक भार के आधार पर परतों में विभाजन होने लगता है जिसे 'विषममंडल' (Heterosphere) कहते हैं। 2. आयनमंडल (Ionosphere) के भीतर स्थित 'डी-परत' (D-layer) लंबी रेडियो तरंगों को परावर्तित करती है और यह परत केवल दिन के समय सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में सक्रिय रहती है, जबकि रात होते ही यह लुप्त हो जाती है। 3. भूमध्यरेखीय निम्न वायुदाब पेटी (Equatorial Low-Pressure Belt) का निर्माण मुख्य रूप से गत्यात्मक कारणों (Dynamic Factors) से होता है, जहाँ पृथ्वी के घूर्णन बल (कोरिऑलिस बल) के कारण हवाएँ ध्रुवों की ओर विक्षेपित हो जाती हैं। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार मध्यमंडल (Mesosphere) में ऊँचाई बढ़ने के साथ तापमान में लगातार गिरावट आती है और इस परत के ऊपरी छोर (मेसोपॉज) पर पृथ्वी के वायुमंडल का न्यूनतम तापमान दर्ज किया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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