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Geography
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भारतीय मृदाओं के वर्गीकरण और उनकी रासायनिक एवं भौतिक विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. भारत की 'लाल और पीली मृदा' (Red and Yellow Soils) मुख्य रूप से प्राचीन रवेदार और रूपांतरित चट्टानों पर लोहे के व्यापक विसरण (Diffusion) के कारण विकसित होती है, और यह मृदा जल योजन (Hydration) के बाद पीले रंग में तथा ऑक्सीकृत होने पर लाल रंग में परिवर्तित हो जाती है।
  2. 2. 'काली मृदा' (Black Soil), जिसे रेगुर मृदा भी कहा जाता है, का निर्माण दक्कन ट्रैप के बेसिक लावा के अपक्षय से हुआ है, और इसमें ह्यूमस की मात्रा बहुत प्रचुर मात्रा में पाई जाती है, जिसके कारण यह अत्यधिक उपजाऊ होती है और इसे उर्वरक की आवश्यकता कभी नहीं होती है।
  3. 3. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'लैटेराइट मृदा' (Laterite Soil) उच्च तापमान और भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में तीव्र निक्षालन (Leaching) का परिणाम है, जहाँ सिलिका का निक्षालन हो जाता है और सतह पर आयरन तथा एल्युमिनियम के ऑक्साइड शेष बच जाते हैं, जो ईंटें बनाने के लिए अत्यधिक उपयुक्त होती है।
  4. 4. 'क्षारीय और लवणीय मृदा' (Saline and Alkaline Soils), जिन्हें स्थानीय रूप से कलर, उसर या रेह भी कहा जाता है, में सोडियम, मैग्नीशियम और कैल्शियम के यौगिक प्रचुर मात्रा में होते हैं, तथा यह मृदा अत्यधिक उपजाऊ होती है क्योंकि इसमें नाइट्रोजन और चूने की कोई कमी नहीं होती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि लाल और पीली मृदा का निर्माण प्राचीन रवेदार और रूपांतरित चट्टानों पर फेरिक ऑक्साइड के प्रसार के कारण होता है, जो जल योजन के बाद पीली और ऑक्सीकरण के बाद लाल दिखती है। कथन 2 गलत है क्योंकि काली मृदा (रेगुर) में लौह, चूना, मैग्नीशियम और पोटाश प्रचुर मात्रा में होता है, परंतु इसमें 'ह्यूमस' और नाइट्रोजन की कमी पाई जाती है। कथन 3 सही है क्योंकि लैटेराइट मृदा का विकास उच्च तापमान और अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में निक्षालन (Leaching) प्रक्रिया द्वारा होता है, जहाँ सिलिका बह जाती है और आयरन-एल्युमिनियम के ऑक्साइड बच जाते हैं, जिससे ईंटें बनाई जाती हैं। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार लैटेराइट मिट्टियाँ कृषि के लिए कम उपजाऊ होती हैं और इनमें उर्वरकों की आवश्यकता होती है। कथन 4 गलत है क्योंकि लवणीय और क्षारीय मृदा (उसर/कलर) में सोडियम और मैग्नीशियम की अधिकता के कारण यह अनुपजाऊ होती है और इसमें नाइट्रोजन तथा कैल्सियम की भारी कमी होती है।
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