त्वरित लिंक्स
Geography
10 views
भारत के अपवाह तंत्र के संदर्भ में, हिमालयी और प्रायद्वीपीय नदियों की विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. हिमालयी नदियाँ पूर्ववर्ती (Antecedent) अपवाह का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती हैं, जिसका अर्थ है कि ये नदियाँ हिमालय के उत्थान से पहले भी प्रवाहित होती थीं और उन्होंने उत्थान के साथ-साथ गहरी घाटियों व गॉर्ज का निर्माण किया है।
- 2. प्रायद्वीपीय भारत की नदियाँ अपने विकास के परिपक्व चरण में हैं और अपनी घाटियों के क्षैतिज कटाव (Lateral erosion) के कारण विसर्प (Meanders) बनाने के लिए जानी जाती हैं, जबकि ये अपने मुहानों पर बहुत बड़े सक्रिय डेल्टा का ही निर्माण करती हैं, एश्चुअरी कभी नहीं बनातीं।
- 3. कोसी नदी को 'बिहार का शोक' कहा जाता है, जो नेपाल से निकलकर गंगा में मिलती है और अपने मार्ग बदलने की अत्यधिक प्रवृत्ति के कारण भयंकर बाढ़ लाने के लिए कुख्यात है।
- 4. नर्मदा और तापी नदियाँ प्रायद्वीपीय पठार की उन प्रमुख नदियों में से हैं जो पश्चिम की ओर बहते हुए रिफ्ट घाटी से गुजरती हैं और बंगाल की खाड़ी में गिरने से पहले सुंदर डेल्टा का निर्माण करती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि सिंधु, सतलुज और ब्रह्मपुत्र जैसी हिमालयी नदियाँ पूर्ववर्ती नदियाँ (Antecedent rivers) हैं जो हिमालय के उत्थान से पहले भी बहती थीं और उन्होंने मलबे को काटकर गहरे गॉर्ज बनाए हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि प्रायद्वीपीय नदियाँ अपनी प्राचीनता और अपरदन के कारण अपनी आधार तल (Base level) को प्राप्त कर चुकी हैं, और नर्मदा तथा तापी जैसी नदियाँ डेल्टा न बनाकर 'एश्चुअरी' (Estuary) का निर्माण करती हैं। कथन 3 सही है क्योंकि कोसी नदी अपने अपरदन और भारी तलछट के निक्षेपण के कारण मार्ग बदलने के लिए कुख्यात है। कथन 4 गलत है क्योंकि नर्मदा और तापी नदियाँ अरब सागर में गिरती हैं, बंगाल की खाड़ी में नहीं। भारत के अपवाह तंत्र के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
→
पृथ्वी की आंतरिक संरचना, भूकंपीय तरंगों (Seismic Waves) की गतिशीलता और चट्टानों (शैल) के रूपांतरण चक्र के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'मोहरोविचिक असांतत्य' (Mohorovicic Discontinuity) क्रस्ट और मेंटल के बीच की सीमा रेखा है, जहाँ से प्राथमिक भूकंपीय तरंगों (P-waves) की गति में अचानक तीव्र वृद्धि दर्ज की जाती है, क्योंकि इस रेखा के पार चट्टानों का घनत्व और प्रत्यास्थता (Elasticity) बढ़ जाती है।
2. 'गुटेनबर्ग असांतत्य' (Gutenberg Discontinuity) ऊपरी मेंटल और निचले मेंटल के मध्य स्थित है, जहाँ द्वितीयक भूकंपीय तरंगें (S-waves) पूरी तरह से विलुप्त हो जाती हैं, जो इस बात का वैज्ञानिक प्रमाण देती है कि इसके नीचे बाहरी क्रोड़ (Outer Core) तरल अवस्था में मौजूद है।
3. आग्नेय चट्टान 'बेसाल्ट' (Basalt) का अत्यधिक ताप और उच्च दाब के अंतर्गत कायांतरण (Metamorphism) होने पर 'ऐम्फिबोलाइट' (Amphibolite) या 'सिस्ट' (Schist) जैसी कायांतरित चट्टानों का निर्माण होता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार पृथ्वी के क्रोड़ (Core) में मुख्य रूप से लोहे (Iron) और निकल (Nickel) की प्रधानता होती है, जिसके कारण इसे 'निफे' (NIFE) परत भी कहा जाता है, और यह पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) के निर्माण के लिए उत्तरदायी है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
महासागरीय जलधाराओं और उनकी भौगोलिक विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'गुइयाना धारा' (Guyana Current) एक गर्म जलधारा है जो दक्षिण अमेरिका के उत्तरी तट के सहारे प्रवाहित होती है और अटलांटिक महासागर की विषुवतरेखीय धाराओं का ही एक भाग है।
2. 'बेंगुएला धारा' (Benguela Current) एक ठंडी जलधारा है जो अफ्रीका के पश्चिमी तट के सहारे उत्तर की ओर प्रवाहित होती है, जिसके कारण कालाहारी मरुस्थल के निर्माण में इसकी आंशिक भूमिका होती है।
3. गल्फ स्ट्रीम (Gulf Stream) एक प्रमुख गर्म जलधारा है जो मैक्सिको की खाड़ी से निकलकर उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ते हुए पश्चिमी यूरोप के तटीय क्षेत्रों में शीतकाल के दौरान बंदरगाहों को जमने से रोकती है।
4. 'ओयाशियो धारा' (Oyashio Current), जिसे कुरुशियो धारा के नाम से भी जाना जाता है, उत्तरी प्रशांत महासागर में बहने वाली एक गर्म जलधारा है जो जापान के पूर्वी तट पर भारी वर्षा लाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
भारत के खनिज और ऊर्जा संसाधनों की भौगोलिक अवस्थिति तथा उनके निष्कर्षण क्षेत्रों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'कोरवा कोयला क्षेत्र' (Korva Coalfield) छत्तीसगढ़ राज्य में महानदी बेसिन के अंतर्गत स्थित नहीं है, बल्कि यह हसदेव-अरंड नदी घाटी (जो महानदी की सहायक सोन की नहीं बल्कि महानदी की प्रमुख सहायक नदी है) क्षेत्र में फैला हुआ है और मुख्य रूप से तापीय विद्युत घरों को कोयला आपूर्ति करता है।
2. 'कालोल और मेहसाणा' पेट्रोलियम क्षेत्र गुजरात बेसिन के अंतर्गत आते हैं, जो अंतःस्थलीय (Onshore) तेल क्षेत्र हैं और यहाँ टर्टियरी युगीन तलछटी चट्टानों में पेट्रोलियम के विशाल भंडार पाए जाते हैं।
3. 'नवेली लिग्नाइट कोयला क्षेत्र' तमिलनाडु के दक्षिण-अर्कट जिले में स्थित है, जहाँ तृतीयक (Tertiary) काल के कम श्रेणी के भूरे कोयले (Lignite) का बड़े पैमाने पर खनन किया जाता है जिसका उपयोग मुख्य रूप से तापीय विद्युत उत्पादन के लिए होता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में पाए जाने वाले कुल कोयला भंडार का लगभग 90% से अधिक हिस्सा गोंडवाना क्रम की चट्टानों से प्राप्त होता है, जो मुख्य रूप से दामोदर, महानदी, सोन और गोदावरी नदी घाटियों तक सीमित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
भारत की मृदाओं (मिट्टी) के क्षेत्रीय वितरण, खनिज संघटन और उनकी कृषि-पारिस्थितिक विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'जलोढ़ मृदा' (Alluvial Soil) भारत के कुल क्षेत्रफल का सबसे बड़ा हिस्सा कवर करती है, जिसका निर्माण मुख्य रूप से हिमालयी नदियों द्वारा लाए गए अवसादों के निक्षेपण से हुआ है, और इसमें पोटाश की प्रचुरता तथा फास्फोरस की कमी पाई जाती है।
2. 'काली कपासी मृदा' (Black Cotton Soil) की जल-धारण क्षमता (Water-retention capacity) अत्यधिक होती है, और यह भीगने पर चिपचिपी तथा सूखने पर चौड़ी-चौड़ी दरारों के साथ सिकुड़ जाती है, जिसके कारण इसे 'स्वतः जुताई वाली मृदा' भी कहा जाता है।
3. 'लैटेराइट मृदा' (Laterite Soil) का निर्माण अत्यधिक शुष्क और कम तापमान वाले क्षेत्रों में कैल्सिफिकेसन प्रक्रिया के कारण होता है, जो अनाज उत्पादन के लिए देश की सबसे अधिक उपजाऊ मिट्टी मानी जाती है।
4. 'शुष्क और मरुस्थलीय मृदा' (Arid and Desert Soil) सामान्यतः लाल से भूरे रंग की होती है, जिसकी प्रकृति लवणीय होती है और इसमें घुलनशील लवणों तथा कैल्सियम कार्बोनेट की मात्रा अधिक होती है, जिसके बारे में विकिपीडिया संदर्भ में विस्तृत जानकारी दी गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
→
पृथ्वी की पवन प्रणालियों, वायुमंडलीय आर्द्रता और चक्रवातों की गतिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'टॉर्नेडो' (Tornadoes) अत्यधिक तीव्र और विनाशकारी अति-लघु क्षेत्र के चक्रवात हैं, जिनका संबंध मुख्य रूप से कपाशावर्षी बादलों (Cumulonimbus Clouds) से होता है और इनमें केंद्रीय दाब इतना कम होता है कि ये वस्तुओं को हवा में ऊपर की ओर खींच लेते हैं।
2. 'सापेक्ष आर्द्रता' (Relative Humidity) वायु के तापमान के व्युत्क्रमानुपाती होती है; तापमान बढ़ने पर सापेक्ष आर्द्रता घट जाती है, भले ही वायु में जलवाष्प की वास्तविक मात्रा (निरपेक्ष आर्द्रता) स्थिर बनी रहे।
3. 'वाकर परिसंचरण' (Walker Circulation) प्रशांत महासागर में उष्णकटिबंधीय वायुमंडल का एक पूर्व-से-पश्चिम (East-to-West) वायुमंडलीय परिसंचरण है, जो सतह के व्यापारिक पवनों (Trade Winds) और समुद्र की सतह के तापमान के बीच की अंतःक्रिया द्वारा संचालित होता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार उष्णकटिबंधीय चक्रवातों को कैरेबियन सागर में 'हरिकेन' और चीन सागर में 'टाइफून' के नाम से जाना जाता है, तथा इनकी उत्पत्ति के लिए समुद्र की सतह का न्यूनतम तापमान 25°C से अधिक होना आवश्यक माना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.