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Geography
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भारत की पर्वत प्रणालियों, उनकी संरचना और घाटियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 'काराकोरम श्रेणी' (Karakoram Range) को 'उच्च एशिया की रीढ़' (Backbone of High Asia) कहा जाता है, जिसमें भारत की सर्वोच्च चोटी 'के2' (Godwin-Austen) स्थित है और यह ट्रांस-हिमालय का एक भाग है।
- 2. 'कश्मीर घाटी' (Kashmir Valley) पीर पंजाल और महान हिमालय के बीच स्थित एक समकालिक (Synclinal) विवर्तनिक घाटी है, जिसके तल पर 'करेवा' (Karewas) निक्षेप पाए जाते हैं जो जाफरान (केसर) की खेती के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं।
- 3. 'नल्लामाला पहाड़ियाँ' (Nallamala Hills) पूर्वी घाट का एक प्रमुख भाग हैं, जो आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों के बीच कृष्णा और पेनार नदियों के मध्य उत्तर-दक्षिण दिशा में फैली हुई हैं।
- 4. 'साइलेंट वैली' (Silent Valley) या शांत घाटी पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में स्थित एक अल्पाइन घाटी है, जो मुख्य रूप से बर्फ से ढकी रहने के कारण कस्तूरी मृग के संरक्षण के लिए जानी जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि काराकोरम श्रेणी को 'उच्च एशिया की रीढ़' कहा जाता है और इसमें भारत की सबसे ऊंची चोटी के2 (8,611 मीटर) स्थित है, जो ट्रांस-हिमालय प्रणाली का हिस्सा है। कथन 2 सही है क्योंकि कश्मीर घाटी पीर पंजाल और महान हिमालय के बीच एक विवर्तनिक घाटी है जहाँ करेवा निक्षेप पाए जाते हैं जो केसर (जाफरान) उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं। कथन 3 सही है क्योंकि नल्लामाला पहाड़ियाँ पूर्वी घाट का हिस्सा हैं जो आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में कृष्णा और पेनार नदियों के बीच फैली हैं। कथन 4 गलत है क्योंकि 'साइलेंट वैली' या शांत घाटी पश्चिमी हिमालय में नहीं, बल्कि केरल राज्य के पलक्कड़ जिले में नीलगिरी पहाड़ियों के दक्षिण-पश्चिम में स्थित एक उष्णकटिबंधीय सदाबहार वर्षावन क्षेत्र है। इस क्षेत्र के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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वायुमंडल की विभिन्न परतों, तापमान की स्थिति और वैश्विक वायुदाब पेटियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'समताप मंडल' (Stratosphere) की निचلی सीमा पर तापमान स्थिर रहता है, किंतु इसके ऊपरी भाग में ओजोन गैस द्वारा पराबैंगनी किरणों के अवशोषण के कारण ऊंचाई के साथ तापमान में तीव्र वृद्धि होती है, जो जेट विमानों के आवागमन के लिए इसे आदर्श बनाती है।
2. 'मध्यमंडल' (Mesosphere) वायुमंडल की सबसे ठंडी परत है, जहाँ ऊंचाई के साथ तापमान पुनः गिरने लगता है और इस परत के ऊपरी सीमा (मेसोपॉज) पर तापमान -90°C से भी नीचे चला जाता है।
3. 'उपध्रुवीय निम्न वायुदाब पेटी' (Subpolar Low-Pressure Belt) एक तापीय रूप से उत्पन्न (Thermally Induced) वायुदाब पेटी है, जो अत्यधिक शीत के कारण ध्रुवीय क्षेत्रों में ठंडी हवा के सिकुड़कर नीचे बैठने से निर्मित होती है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार पृथ्वी पर 'अयनवर्ती उच्च वायुदाब पेटियाँ' (Subtropical High-Pressure Belts) गतिजन्य कारणों (Dynamically Induced) यानी पृथ्वी के घूर्णन और कोरियोलिस बल के कारण उत्पन्न होती हैं, जहाँ हवाएं ऊपर से नीचे उतरती हैं और शांत कटिबंध (Horse Latitudes) का निर्माण करती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पृथ्वी के वायुमंडल, उसकी परतों और वैश्विक वायुदाब पेटियों (Pressure Belts) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. समताप मंडल (Stratosphere) में ओजोन परत पाई जाती है जो सूर्य की पराबैंगनी किरणों को अवशोषित करती है, और इस परत में ऊंचाई के साथ तापमान बढ़ता जाता है, जिसके कारण यह क्षेत्र मौसमी हलचलों से लगभग मुक्त होता है और जेट विमानों की उड़ान के लिए आदर्श माना जाता है।
2. 'डोलड्रम' (Doldrums) या विषुवतीय निम्न वायुदाब पेटी (Equatorial Low-Pressure Belt) थर्मल रूप से प्रेरित (Thermally Induced) पेटी है, जहाँ सूर्य की किरणें वर्ष भर लगभग लंबवत पड़ने के कारण संवहन धाराओं का विकास होता है और यहाँ धरातलीय पवनें शांत रहती हैं।
3. उपोष्ण उच्च वायुदाब पेटियाँ (Subtropical High-Pressure Belts) गतिजन्य कारणों (Dynamically Induced) से उत्पन्न होती हैं, जिनका मुख्य कारण विषुवत वृत्त से उठने वाली गर्म हवा का ठंडा होकर नीचे बैठना है, और प्राचीन काल में नाविक इन क्षेत्रों (अश्व अक्षांश) में हवा की कमी के कारण अपने जहाजों के घोड़ों को समुद्र में फेंक देते थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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भारत की भौगोलिक स्थिति, अक्षांशीय-देशांतरीय विस्तार तथा प्रामाणिक समय रेखा के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत का मुख्य भूभाग 8°4' उत्तर से 37°6' उत्तर अक्षांशों के मध्य फैला हुआ है, जिसके कारण देश के सबसे उत्तरी और सबसे दक्षिणी छोर के बीच की वास्तविक दूरी लगभग 3,214 किलोमीटर है, जो पूर्व से पश्चिम की चौड़ाई (लगभग 2,933 किमी) से अधिक है।
2. भारत का मानक समय (IST) निर्धारित करने वाली 82°30' पूर्व देशांतर रेखा ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) से ठीक 5 घंटे आगे है, और यह रेखा कुल छह राज्यों—उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और बिहार—से होकर गुजरती है।
3. इंदिरा पॉइंट (Pygmalion Point), जो भारत का सबसे दूरस्थ दक्षिणी बिंदु है, ग्रेट निकोबार द्वीप समूह पर 6°45' उत्तर अक्षांश पर स्थित है, तथा 2004 की सुनामी के कारण इसका एक बड़ा हिस्सा जलमग्न हो गया था।
4. कर्क रेखा (23°30' उत्तर अक्षांश) भारत को लगभग दो बराबर भागों में विभाजित करती है और यह देश के कुल 8 राज्यों से गुजरती है, जिसमें मध्य प्रदेश के भोपाल और गुजरात के गांधीनगर शहर इस रेखा के बिल्कुल करीब स्थित हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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भारतीय अपवाह तंत्र के संदर्भ में, हिमालयी नदियों और प्रायद्वीपीय नदियों की विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हिमालयी नदियाँ मुख्य रूप से बारहमासी (Perennial) होती हैं क्योंकि इन्हें जल का पोषण पिघलने वाले हिमखंडों (Glaciers) और मानसूनी वर्षा दोनों से प्राप्त होता है, जबकि अधिकांश प्रायद्वीपीय नदियाँ अनित्य (Seasonal/Non-perennial) होती हैं और इनका प्रवाह पूरी तरह से वर्षा पर निर्भर करता है।
2. प्रायद्वीपीय नदियों की घाटियाँ बहुत चौड़ी, उथली और परिपक्व अवस्था में होती हैं, क्योंकि ये नदियाँ अपने विकास के दीर्घकालिक भूगर्भीय इतिहास के कारण 'आधार तल' (Base Level) को प्राप्त कर चुकी हैं और इनके मार्ग में विसर्प (Meanders) की प्रवृत्ति बहुत कम पाई जाती है।
3. हिमालयी नदियों द्वारा बनाए जाने वाले मार्ग में 'गॉर्ज' (Gorges), 'महाखड्ड' (Canyons) और 'V-आकार की घाटियाँ' दुर्लभ हैं, क्योंकि ये पुरानी संरचनाओं पर बहती हैं, जबकि प्रायद्वीपीय नदियाँ हिमालय की तुलना में नवीन भ्रंश घाटियों (Rift Valleys) का निर्माण करती हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदी गोदामरी है, जिसे 'दक्षिण गंगा' या 'वृद्ध गंगा' भी कहा जाता है, जिसका उद्गम महाराष्ट्र के त्र्यंबकेश्वर (नासिक) से होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत की मिट्टियों (मृदा) के वर्गीकरण और उनके वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'काली मृदा' (Regur Soil) का निर्माण मुख्य रूप से दक्कन ट्रैप क्षेत्र में बेसाल्टिक लावा के अपक्षय से हुआ है, और इसमें जल धारण करने की उच्च क्षमता पाई जाती है, जिसके कारण सूखने पर इसमें गहरी दरारें पड़ जाती हैं जो स्वतः जुताई (Self-ploughing) का कार्य करती हैं।
2. 'लैटेराइट मृदा' उच्च तापमान और भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में तीव्र निक्षालन (Leaching) प्रक्रिया का परिणाम है, जिसमें सिलिका का निक्षालन हो जाता है और मृदा में लौह ऑक्साइड तथा एल्युमिनियम के यौगिक शेष बच जाते हैं, जिससे यह ईंट बनाने के लिए अत्यधिक उपयुक्त होती है।
3. 'लाल और पीली मृदा' का लाल रंग क्रिस्टलीय आग्नेय चट्टानों में लौह (Iron) के व्यापक विसरण के कारण होता है, जबकि इसका पीला रंग इसमें जलयोजन (Hydration) की स्थिति के कारण प्रकट होता है और यह मृदा सामान्यतः उपजाऊ होती है जिसमें नाइट्रोजन और ह्यूमस प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार जलोढ़ मृदा (Alluvial Soils) भारत के कुल क्षेत्रफल के सबसे बड़े हिस्से पर पाई जाती है, जो मुख्य रूप से उत्तरी मैदानों और नदी घाटियों में फैली हुई है और यह देश की कृषि अर्थव्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण आधार है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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