BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Geography
9 views

भारतीय मृदाओं की विशेषता और उनके वितरण के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. लाल और पीली मृदा का विकास दक्कन पठार के पूर्वी और दक्षिणी भागों में रवेदार आग्नेय चट्टानों पर कम वर्षा वाले क्षेत्रों में होता है, तथा जल के साथ मिलने पर लौह ऑक्साइड के जलयोजन के कारण यह पीले रंग में परिवर्तित हो जाती है।
  2. 2. शुष्क और मरुस्थलीय मृदाओं में ह्यूमस और नाइट्रोजन की मात्रा नगण्य तथा कैल्शियम कार्बोनेट की अधिकता के कारण नीचे की परतों में 'कंकड़' की परत पाई जाती है।
  3. 3. 'रर', 'ऊसर' या 'कल्लर' के रूप में पहचानी जाने वाली लवणीय और क्षारीय मृदाओं में सोडियम, पोटेशियम और मैग्नीशियम के लवण प्रचुर मात्रा में होते हैं, जिसके कारण इनमें नाइट्रोजन और चूने की अधिकता होती है और ये उपजाऊ हो जाती हैं।
  4. 4. लैटेराइट मृदा का निर्माण उच्च तापमान और अत्यधिक भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में तीव्र 'निक्षालन' (Leaching) प्रक्रिया के परिणामस्वरूप होता है, जिसके कारण सिलिका का क्षालन हो जाता है और ऊपरी परत में लौह तथा एल्युमिनियम के ऑक्साइड शेष बचते हैं, जो चाय और कॉफी की खेती के लिए अत्यंत उपयुक्त होती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि लाल और पीली मृदा का निर्माण रवेदार आग्नेय चट्टानों पर होता है और जलयोजन के कारण इसका रंग पीला हो जाता है। कथन 2 सही है क्योंकि शुष्क मृदाओं में ह्यूमस व नाइट्रोजन की कमी और कैल्शियम कार्बोनेट की अधिकता के कारण नीचे 'कंकड़' की परत बनती है। कथन 3 गलत है क्योंकि लवणीय और क्षारीय मृदाओं में नाइट्रोजन और चूने की कमी होती है, और इनमें सोडियम, मैग्नीशियम और कैल्शियम के लवण अधिक होने के कारण ये कृषि के लिए अनुपयुक्त होती हैं। कथन 4 सही है क्योंकि लैटेराइट मृदा का निर्माण उच्च वर्षा और उच्च तापमान वाले क्षेत्रों में तीव्र निक्षालन से होता है, जो चाय और कॉफी जैसी फसलों के लिए अनुकूल है। इस विषय के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Share:

Related Questions

पृथ्वी की वायुमंडलीय पवन प्रणालियों, आर्द्रता के विभिन्न रूपों, वर्षा के प्रकार और चक्रवातों की गतिशीलता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'रोज़बी तरंगें' (Rossby Waves) ऊपरी क्षोभमंडल और समतापमंडल की सीमा पर प्रवाहित होने वाली विशाल वायुमंडलीय तरंगें हैं, जो पृथ्वी के घूर्णन (कोरिओलिस प्रभाव) के कारण उत्पन्न होती हैं और यह जेट स्ट्रीम की गति तथा शीतोष्णकटिबंधीय चक्रवातों के मार्ग को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। 2. 'सापेक्ष आर्द्रता' (Relative Humidity) किसी निश्चित तापमान पर वायु के प्रति इकाई आयतन में मौजूद जलवाष्प के वास्तविक भार को दर्शाती है, जिसे ग्राम प्रति घन मीटर में मापा जाता है, और तापमान में परिवर्तन होने पर भी इसका मान पूरी तरह स्थिर रहता है। 3. पर्वतीय वर्षा (Orographic Rainfall) के दौरान जब आर्द्र पवनें किसी पर्वत श्रृंखला से टकराकर ऊपर उठती हैं, तो पर्वत के जिस ढाल पर हवाएँ ऊपर चढ़ती हैं उसे 'पर्वताभिमुखी ढाल' (Windward Slope) कहा जाता है जहाँ भारी वर्षा होती है, जबकि विपरीत ढाल को 'वृष्टिछाया क्षेत्र' (Rain Shadow Area) कहा जाता है जहाँ वर्षा बहुत कम होती है। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार उष्णकटिबंधीय चक्रवातों को मुख्य रूप से महासागरीय सतह से मिलने वाली गुप्त ऊष्मा (Latent Heat of Condensation) के संघनन से ऊर्जा प्राप्त होती है, जिसके विकास के लिए समुद्र की सतह का न्यूनतम तापमान 26.5°C या उससे अधिक होना आवश्यक है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? पृथ्वी के प्रमुख उच्चावच स्वरूपों (पर्वत, पठार, मैदान और मरुस्थल) तथा उनके निर्माणकारी प्रक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'कॉन्टिनेंटल ड्रिफ्ट' और प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांतों के अनुसार, विश्व के अधिकांश नवीन मोड़दार पर्वत (जैसे रॉकीज, एंडीज और हिमालय) अभिसारी प्लेट सीमाओं (Convergent Plate Boundaries) पर महाद्वीपीय-महाद्वीपीय या महाद्वीपीय-महासागरीय टक्कर के परिणामस्वरूप संपीड़न बलों द्वारा निर्मित हुए हैं। 2. 'तिब्बत का पठार' और 'कोलंबिया का पठार' दोनों ही अंतःपर्वतीय (Intermontane) पठारों के उत्कृष्ट उदाहरण हैं, जिनका निर्माण विवर्तनिक उत्थान के साथ-साथ भारी मात्रा में बेसाल्टिक लावा के अतिप्रवाह (Flood Basalt) से हुआ है। 3. 'ग्रेट ऑस्ट्रेलियन मरुस्थल' और 'कालाहारी मरुस्थल' दोनों ही मुख्य रूप से उपोष्ण कटिबंधीय उच्च वायुदाब पेटियों (Horse Latitudes) के अंतर्गत महाद्वीपों के पश्चिमी तटों पर स्थित हैं, जहाँ ठंडी महासागरीय जलधाराओं के प्रभाव और अवरोही हवाओं के कारण वर्षा का अभाव पाया जाता है। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार मरुस्थलीय क्षेत्रों में पवन अपरदन द्वारा निर्मित 'इंसर्बर्ग' (Inselbergs) और 'यारडंग' (Yardangs) विशिष्ट भू-आकृतियाँ हैं, जबकि लोएस (Loess) के मैदान मुख्य रूप से रेगिस्तानी क्षेत्रों से दूर पवन द्वारा उड़ाई गई बारीक सिल्ट के निक्षेपण से बनते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भारत के अपवाह तंत्र, विशेषकर हिमालयी और प्रायद्वीपीय नदियों की विशेषताओं, उनके उद्गम तथा जलविभाजकों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सिंधु नदी प्रणाली की प्रमुख सहायक नदी 'सतलुज' तिब्बत में मानसरोवर के निकट राकस ताल से निकलती है और यह एक पूर्ववर्ती (Antecedent) नदी का उत्कृष्ट उदाहरण है जो शिपकी ला दर्रे से भारत में प्रवेश करती है। 2. प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदी 'गोदावरी' का उद्गम महाराष्ट्र के नासिक जिले में त्र्यंबकेश्वर से होता है, और इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ प्राणहिता, इंद्रावती और सबरी हैं, जो इसके बाएं तट पर आकर मिलती हैं। 3. 'नर्मदा नदी' अमरकंटक पठार से निकलकर विंध्य और सतपुड़ा श्रेणियों के बीच एक भ्रंश घाटी (Rift Valley) से होते हुए पश्चिम की ओर बहती है और खंभात की खाड़ी में गिरने से पहले सुंदरबन जैसा विशाल डेल्टा बनाती है। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'महानदी' छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के सिहावा पहाड़ी से निकलती है और ओडिशा में इस पर विश्व का सबसे लंबा हीराकुंड बाँध निर्मित किया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? पृथ्वी की आंतरिक संरचना, भूपर्पटी (Crust) के निर्माणकारी खनिजों तथा शैलों (Rocks) के अंतर्संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. महाद्वीपीय भूपर्पटी (Continental Crust) का औसत घनत्व महासागरीय भूपर्पटी (Oceanic Crust) की तुलना में कम होता है, क्योंकि महाद्वीपीय क्रस्ट मुख्य रूप से ग्रेनाइटीय (Granitic) शैलों से निर्मित है जिनमें सिलिका और एल्युमिनियम की प्रधानता होती है, जबकि महासागरीय क्रस्ट मुख्यतः बेसाल्टिक (Basaltic) शैलों से बनी होती है जो सघन 'सीमा' (SIMA) परत का प्रतिनिधित्व करती हैं। 2. मोहोरविक असंबद्धता (Mohorovicic Discontinuity) क्रस्ट और ऊपरी मेंटल के बीच की सीमा रेखा है, जहाँ भूकंपीय तरंगों (P-वेव्स) की गति में अचानक तीव्र वृद्धि दर्ज की जाती है, जो घनत्व और चट्टानों के घनत्वीय परिवर्तन को दर्शाती है। 3. बेसाल्टिक लावा के शीतलन और जमने से बनने वाली 'गैब्रॉ' (Gabbro) और 'डोलराइन्ट' (Dolerite) अंतर्भेदी (Intrusive) आग्नेय चट्टानें हैं, जो रासायनिक संरचना में बेसाल्ट के समान होते हुए भी बड़े क्रिस्टलों का निर्माण करती हैं क्योंकि इनका शीतलन धरातल के नीचे अपेक्षाकृत धीमी गति से होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? सौर मंडल के आंतरिक ग्रहों (पार्थिव ग्रहों) और उनकी भौतिक तथा रासायनिक विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सभी पार्थिव ग्रह (बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल) मुख्य रूप से चट्टानों और धातुओं से बने हैं तथा इनके घनत्व बाह्य ग्रहों (जovian ग्रहों) की तुलना में बहुत अधिक होते हैं। 2. पार्थिव ग्रहों का निर्माण उनके मूल तारे के अत्यधिक समीप हुआ जहाँ सौर पवनें इतनी शक्तिशाली थीं कि वे गैसों और हल्के तत्वों को दूर धकेलने में सक्षम नहीं थीं, जिसके कारण ये ग्रह गैसीय आवरण खो बैठे। 3. शुक्र ग्रह का वायुमंडल मुख्य रूप से सल्फ्यूरिक अम्ल के घने बादलों और लगभग 95-97% कार्बन डाइऑक्साइड से निर्मित है, जो इस ग्रह पर अत्यधिक 'ग्रीनहाउस प्रभाव' (Greenhouse Effect) उत्पन्न करता है, जिससे यह सौर मंडल का सबसे अधिक गर्म ग्रह बन जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.