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Geography
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भारत के प्रमुख उद्योगों और परिवहन तंत्र (विशेषकर रेल, सड़क और जलमार्ग) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 'राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या-1' (NW-1) गंगा-भागीरथी-हूगली नदी प्रणाली पर प्रयागराज से हल्दिया तक विस्तृत है, जो देश का सबसे लंबा आंतरिक जलमार्ग है।
  2. 2. भारत में स्वर्णिम चतुर्भुज (Golden Quadrilateral) परियोजना देश के चार महानगरों — दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता — को जोड़ने वाली छह-लेन वाली उच्च घनत्व सड़क गलियारा है, जिसके कार्यान्वयन की जिम्मेदारी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के पास है।
  3. 3. 'विशाखापत्तनम स्टील प्लांट' (Rashtriya Ispat Nigam Limited) भारत का पहला तटवर्ती (Coastal) इस्पात कारखाना है, जिसे कच्चे माल के आयात और तैयार उत्पादों के निर्यात की सुविधा के लिए समुद्र तट पर स्थापित किया गया था।
  4. 4. कोंकण रेलवे (Konkan Railway) मार्ग रोहा से मंगलुरु तक कुल 741 किलोमीटर लंबा एक प्रमुख रेलमार्ग है, जो पश्चिमी घाट की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच सुरंगों और पुलों से गुजरता है, और इसका मुख्यालय पणजी में स्थित है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (NW-1) गंगा-भागीरथी-हूगली नदी प्रणाली पर प्रयागराज से हल्दिया तक स्थित है जिसकी कुल लंबाई 1,620 किमी है और यह भारत का सबसे लंबा आंतरिक जलमार्ग है। कथन 2 सही है क्योंकि स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना देश के चार महानगरों को जोड़ने वाला छह-लेन का एक्सप्रेसवे नेटवर्क है, जिसका रख-रखाव और निर्माण NHAI द्वारा किया जाता है। कथन 3 सही है क्योंकि विशाखापत्तनम स्टील प्लांट भारत का पहला तटवर्ती एकीकृत इस्पात संयंत्र है। कथन 4 गलत है क्योंकि कोंकण रेलवे का मुख्यालय नवी मुंबई (बेलापुर) में स्थित है, न कि पणजी में। भारतीय परिवहन और उद्योग से जुड़ी विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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भारत के नदी तंत्रों की भू-आकृतिक विशेषताओं और उनके प्रवाह प्रतिरूपों (Drainage Patterns) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हिमालयी नदियाँ (जैसे सिंधु, सतलुज और ब्रह्मपुत्र) 'पूर्ववर्ती अपवाह' (Antecedent Drainage) का उत्कृष्ट उदाहरण हैं, क्योंकि ये नदियाँ हिमालय के उत्थान से पूर्व भी प्रवाहित होती थीं और उन्होंने उत्थान के साथ-साथ गहरी घाटियों व महाखड्डों (Gorges) का निर्माण किया है। 2. प्रायद्वीपीय भारत की नर्मदा और ताप्ती नदियाँ भ्रंश घाटियों (Rift Valleys) से होकर पश्चिम की ओर प्रवाहित होती हैं और ज्वारनदमुख (Estuary) का निर्माण करती हैं, जबकि दक्षिण भारत की अधिकांश अन्य प्रमुख नदियाँ (जैसे गोदावरी, कृष्णा और कावेरी) पूरब की ओर बहते हुए बंगाल की खाड़ी में डेल्टा बनाती हैं। 3. प्रायद्वीपीय नदी तंत्र में गोदावरी सबसे बड़ी द्रोणी है, जिसे 'दक्षिण गंगा' या 'वृद्ध गंगा' कहा जाता है, तथा इसकी प्रमुख सहायक नदियों में प्राणहिता, इंद्रावती, सबरी और मंजरा शामिल हैं, जो दक्कन के पठार के उत्तरी और पूर्वी भागों से जल ग्रहण करती हैं। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार सिंधु नदी की सबसे बड़ी सहायक नदी सतलुज है, जो तिब्बत के मानसरोवर झील के पास से निकलती है और पाकिस्तान में मिठानकोट के समीप सिंधु नदी में मिलती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भारत में सिंचाई पद्धतियों, कृषि जलवायु क्षेत्रों और प्रमुख फसलों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. देश के कुल शुद्ध सिंचित क्षेत्र में 'नहरों' (Canals) द्वारा सिंचाई का प्रतिशत 'भूपृष्ठ जल' पर आधारित नलकूपों और अन्य कुओं की तुलना में सर्वाधिक है। 2. 'माइक्रॉइरिगेशन' (ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई) जल उपयोग दक्षता (Water Use Efficiency) को बढ़ाने के साथ-साथ उर्वरकों के उपयोग को भी अनुकूलित करती है, और इसके अंतर्गत कुल सिंचित क्षेत्र में क्षेत्रफल की दृष्टि से महाराष्ट्र राज्य का स्थान अग्रणी है। 3. भारत में 'धान' (Rice) की खेती के लिए पारंपरिक रूप से प्रतिरोपण (Transplanting) विधि अपनाई जाती है, जिसमें भारी मात्रा में जल की आवश्यकता होती है, किंतु 'सिंचित प्रत्यक्ष बीजारोपण' (Direct Seeded Rice - DSR) तकनीक अपनाने से जल की खपत, मीथेन उत्सर्जन और श्रम लागत में उल्लेखनीय कमी आती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? भारतीय मृदाओं की आनुवंशिक विशेषताओं, सूक्ष्म पोषक तत्वों की स्थिति और उनके भौगोलिक वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'पीठ और दलदली मृदा' (Peaty and Marshy Soils) मुख्य रूप से भारी वर्षा और उच्च आर्द्रता वाले क्षेत्रों में पाई जाती है, जहाँ वनस्पति के बड़े पैमाने पर सड़ने-गलने से इसमें भारी मात्रा में घुलनशील लवण और ह्यूमस (कभी-कभी 40 से 50 प्रतिशत तक) जमा हो जाते हैं, लेकिन यह मृदा सामान्यतः क्षारीय प्रकृति की होती है। 2. 'लाल और पीली मृदा' का विकास मुख्य रूप से दक्कन के पठार के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में प्राचीन रवेदार (Crystalline) और कायांतरित चट्टानों पर हुआ है, जिसमें फेरिक ऑक्साइड्स की उपस्थिति के कारण इसका रंग लाल होता है, जबकि जल योजन (Hydration) के बाद यह पीले रंग में परिवर्तित हो जाती है। 3. 'क्षारीय और लवणीय मृदा' को देश के विभिन्न भागों में 'रेह', 'कल्लर' या 'ऊसर' नामों से जाना जाता है, और यह मुख्यतः शुष्क व अर्ध-शुष्क जलवायु वाले क्षेत्रों तथा नहरों द्वारा अत्यधिक सिंचित जल-भराव वाले क्षेत्रों में विकसित होती है, जिसमें सोडियम, पोटेशियम और मैग्नीशियम के लवणों की अधिकता पाई जाती है। 4. 'लैटेराइट मृदा' का निर्माण मानसूनी जलवायु के अंतर्गत उच्च तापमान और तीव्र वर्षा के कारण 'निक्षालन' (Leaching) की तीव्र प्रक्रिया के फलस्वरूप होता है, जिसमें सिलिका जैसे घुलनशील तत्व बह जाते हैं और आयरन ऑक्साइड तथा एल्युमिनियम के यौगिक शेष बच जाते हैं, जिससे यह मृदा अत्यधिक उपजाऊ और रबी की फसलों के लिए सर्वोत्तम होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? पृथ्वी की आंतरिक संरचना, असंबद्धता (Discontinuities) और शैलों के कायांतरण (Metamorphism) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कॉनराड असंबद्धता (Conrad Discontinuity) ऊपरी क्रस्ट (Upper Crust) और निचली क्रस्ट (Lower Crust) के बीच स्थित होती है, जबकि मोहरोविकिक असंबद्धता (Mohorovičić Discontinuity) क्रस्ट और मेंटल के बीच की सीमा का निर्धारण करती है। 2. आग्नेय शैलों (Igneous Rocks) में जीवाश्म (Fossils) पूरी तरह से अनुपस्थित होते हैं क्योंकि इनका निर्माण तप्त मैग्मा या लावा के ठंडा होकर जमने से होता है, जिसके अत्यधिक उच्च तापमान के कारण जैविक अवशेष नष्ट हो जाते हैं। 3. कायांतरण (Metamorphism) की प्रक्रिया के दौरान चूना पत्थर (Limestone) का कायांतरण होकर 'क्वार्ट्जाइट' (Quartzite) का निर्माण होता है, जबकि बलुआ पत्थर (Sandstone) के कायांतरण से 'संगमरमर' (Marble) बनता है। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार पृथ्वी के क्रोड (Core) का मुख्य हिस्सा निकल (Nickel) और लोहे (Iron) से बना है, जिसे 'निफे' (Nife) परत कहा जाता है, और यह पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) की उत्पत्ति में प्रमुख भूमिका निभाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भारत में कृषि पद्धतियों, फसल विविधीकरण और प्रमुख फसलों के भौगोलिक वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'श्री पद्धति' (System of Rice Intensification - SRI), जिसे धान की गहन खेती की विधि भी कहा जाता है, में पारंपरिक विधि की तुलना में कम बीज, कम पानी और कम रासायनिक उर्वरकों का उपयोग किया जाता है, तथा इसमें पौधों के बीच की दूरी अधिक रखी जाती है ताकि जड़ों का विकास बेहतर हो सके। 2. भारत में 'रबी की फसलें' मुख्य रूप से अक्टूबर-नवंबर में बोई जाती हैं और मार्च-अप्रैल में काटी जाती हैं, तथा इन फसलों के सफल उत्पादन के लिए पश्चिमी विक्षوب (Western Disturbances) से होने वाली शीतकालीन वर्षा अत्यधिक लाभकारी मानी जाती है। 3. 'मोटे अनाजों' (Millets या श्री अन्न), जैसे ज्वार, बाजरा और रागी, का उत्पादन मुख्य रूप से देश के उच्च वर्षा वाले और सिंचित मैदानी भागों में किया जाता है, क्योंकि इन फसलों को अंकुरण और विकास के लिए लगातार प्रचुर मात्रा में नमी की आवश्यकता होती है। 4. वाणिज्यिक फसल 'गन्ना' (Sugarcane) के उत्पादन के लिए उष्णकटिबंधीय जलवायु, 75 से 100 सेमी वार्षिक वर्षा और 21°C से 27°C के बीच तापमान की आवश्यकता होती है, और यह एक दीर्घकालिक फसल है जो उत्तर भारत के मुकाबले प्रायद्वीपीय भारत में अधिक शर्करा की मात्रा (Sucrose Content) प्रदान करती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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