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Geography
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विवर्तनिक प्रक्रियाओं, भूकंपीय तरंगों और सुनामी की गतिशीलता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. प्राथमिक तरंगें (P-waves) अनुदैर्ध्य (Longitudinal) तरंगें होती हैं, जो ध्वनि तरंगों की भाँति ठोस, तरल और गैस—तीनों माध्यमों से गुजर सकती हैं, तथा ये भूकंपीय अधिकेंद्र पर सबसे पहले पहुँचती हैं।
- 2. द्वितीयक तरंगें (S-waves) अनुप्रस्थ (Transverse) तरंगें होती हैं, जो केवल ठोस माध्यम से गमन कर सकती हैं और इनका यह गुण वैज्ञानिकों को पृथ्वी के तरल बाहरी क्रोड (Outer Core) की उपस्थिति का पता लगाने में मदद करता है।
- 3. सुनामी तरंगें महासागरों में उथले पानी से गहरे पानी की ओर प्रवेश करते समय अपनी गति और तरंगदैर्ध्य (Wavelength) में अचानक अत्यधिक वृद्धि का अनुभव करती हैं, जिससे तटीय क्षेत्रों में भारी तबाही मचती है।
- 4. सुनामी तरंगें उथले समुद्रों या तटीय क्षेत्रों में पहुँचने पर उनकी गति कम हो जाती है, किंतु उनकी ऊँचाई (Amplitude) अत्यधिक बढ़ जाती है, जिससे विशाल जल दीवार के रूप में तट से टकराती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि प्राथमिक (P) तरंगें अनुदैर्ध्य तरंगें होती हैं जो ठोस, तरल और गैस तीनों माध्यमों में संचरित हो सकती हैं और यह किसी भी भूकंपीय स्टेशन पर सबसे पहले दर्ज की जाती हैं। कथन 2 सही है क्योंकि द्वितीयक (S) तरंगें अनुप्रस्थ तरंगें होती हैं जो केवल ठोस माध्यम से गुजर सकती हैं और तरल माध्यम (जैसे पृथ्वी का बाहरी क्रोड) में इनका संचरण रुक जाता है। कथन 3 गलत है क्योंकि सुनामी तरंगें जब गहरे समुद्र से उथले पानी (तटीय क्षेत्रों) की ओर आती हैं, तब उनकी गति और तरंगदैर्ध्य में कमी आती है, न कि वृद्धि। कथन 4 सही है, ऊर्जा के संरक्षण के कारण जब उथले पानी में सुनामी तरंगों की गति कम होती है, तो उनकी ऊँचाई (Amplitude) कई मीटर तक बढ़ जाती है, जिससे विनाशकारी प्रभाव उत्पन्न होता है।
Related Questions
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भारतीय मानसून की उत्पत्ति, उसकी क्रियाविधि और वर्षा के स्थानिक वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ग्रीष्मकाल में तिब्बत के पठार का अत्यधिक गर्म होना एक विशाल तापीय निम्न वायुदाब (Thermal Low Pressure) क्षेत्र का निर्माण करता है, जो दक्षिण-पूर्वी व्यापारिक हवाओं को विषुवत रेखा पार करने के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून के रूप में आकर्षित करता है।
2. 'भारतीय हिंद महासागर द्विध्रुव' (Indian Ocean Dipole - IOD) का 'धनात्मक चरण' (Positive IOD) पश्चिमी हिंद महासागर (सोमवार तट के पास) को गर्म और पूर्वी हिंद महासागर (इंडोनेशिया के पास) को ठंडा करता है, जिससे भारत में मानसूनी वर्षा में अनुकूल वृद्धि होती है।
3. 'मैडियन-जूलियन दोलन' (Madden-Julian Oscillation - MJO) एक पूर्व की ओर बढ़ने वाली वायुमंडलीयीय तरंग प्रणाली है, जिसका सक्रिय चरण (Active Phase) भारतीय महासागर के ऊपर आने पर मानसूनी वर्षा की गतिविधियों को कमजोर कर देता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार मानसून का 'प्रस्फोट' (Monsoon Burst) मुख्य रूप से केरल तट पर जून के प्रथम सप्ताह में होता है, जो प्रायद्वीपीय भारत की स्थलाकृति और उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट स्ट्रीम (Tropical Easterly Jet Stream) की सक्रियता से गहराई से जुड़ा हुआ है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पृथ्वी की आंतरिक संरचना और चट्टानों के चक्र के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. दुर्बलतामंडल (Asthenosphere) ऊपरी मेंटल का अत्यधिक चिपचिपा और आंशिक रूप से पिघला हुआ (Plastic state) भाग है, जो विवर्तनिक प्लेटों के क्षैतिज संचलन के लिए मुख्य यांत्रिक आधार प्रदान करता है।
2. रूपांतरित चट्टानें (Metamorphic Rocks) मूल रूप से केवल आग्नेय चट्टानों के अत्यधिक ताप और दाब के प्रभाव से अपनी खनिज संरचना बदलने पर बनती हैं, इसमें अवसादी चट्टानों की कोई भूमिका नहीं होती है।
3. बेसाल्टिक मैग्मा के पृथ्वी की सतह के नीचे और ऊपर जमने से क्रमशः 'डोलराइट' जैसी अंतर्भेदी (Intrusive) और बेसाल्ट जैसी बहिर्भेदी (Extrusive) आग्नेय चट्टानों का निर्माण होता है।
4. मोहरोविकिक असांतत्य (Mohorovicic Discontinuity) क्रस्ट और ऊपरी मेंटल के बीच स्थित है, जहाँ प्राथमिक (P) भूकंपीय तरंगों की गति में अचानक गिरावट दर्ज की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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भारत के अपवाह तंत्र के संदर्भ में, हिमालयी और प्रायद्वीपीय नदियों की विशेषताओं और उनके विवर्तनिक इतिहास के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हिमालयी नदियों का अधिकांश अपवाह तंत्र 'पूर्ववर्ती' (Antecedent) प्रकृति का है, जिसका अर्थ है कि ये नदियाँ हिमालय के उत्थान से पहले भी अस्तित्व में थीं और उत्थान के साथ-साथ गहरी घाटियों व गार्ज का निर्माण करती रहीं।
2. प्रायद्वीपीय पठार की अधिकांश नदियाँ (जैसे गोदावरी, कृष्णा और कावेरी) पूरब की ओर बहकर बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं और अपने मुहाने पर विशाल डेल्टा का निर्माण करती हैं, जबकि नर्मदा और ताप्ती नदियाँ भ्रंश घाटियों (Rift Valleys) से प्रवाहित होते हुए अरब सागर में 'एश्चुअरी' (Estuary) बनाती हैं।
3. प्रायद्वीपीय नदियों की एक प्रमुख विशेषता उनका युवा (Youthful) अवस्था में होना है, जिसके कारण वे तीव्र कटाव करती हैं और अपने मध्य तथा निचले मार्गों में बड़े-बड़े विसर्प (Meanders) और नौगम्य जलमार्गों का निर्माण करती हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार प्रायद्वीपीय भारत का जलविभाजक मुख्य रूप से पश्चिमी घाट (Western Ghats) द्वारा निर्धारित होता है, जो तट के समानांतर उत्तर से दक्षिण की ओर एक कगार के रूप में स्थित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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विश्व की सबसे ऊँची पर्वत चोटी कौन सी है?
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भारत की प्रमुख बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं और उनसे संबंधित नदियों तथा झीलों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'सरदार सरोवर परियोजना' नर्मदा नदी पर निर्मित एक बहुउद्देशीय परियोजना है, जिसका लाभ मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान राज्यों को मिलता है, तथा इसके जलाशय का नाम 'गोबिंद सागर' रखा गया है।
2. 'तुंगभद्रा बहुउद्देशीय परियोजना' कृष्णा नदी की प्रमुख सहायक नदी तुंगभद्रा पर स्थित है, जिसका निर्माण आंध्र प्रदेश और कर्नाटक राज्यों की संयुक्त पहल के रूप में किया गया है।
3. 'रिहंद परियोजना' उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में सोन नदी की सहायक नदी रिहंद पर बनाई गई है, जिसके पीछे बनी कृत्रिम झील को 'गोबिंद बल्लभ पंत सागर' के नाम से जाना जाता है और यह भारत की सबसे बड़ी कृत्रिम झीलों में से एक है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'भाखड़ा नंगल परियोजना' सतलुज नदी पर स्थित एक गुरुत्वीय बाँध परियोजना है, जिसके पीछे बनी कृत्रिम झील का नाम 'गोबिंद सागर झील' है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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