त्वरित लिंक्स
Geography
8 views
भारत के अपवाह तंत्र के विशेष संदर्भ में, हिमालयी और प्रायद्वीपीय नदियों की जल-विज्ञानी विशेषताओं, उनके प्रवाह पैटर्न और बेसिन विकास के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. हिमालयी नदियाँ 'अक्रमीय' (Antecedent and Superimposed) अपवाह प्रणालियों का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिनमें नदियाँ अपने उत्थानशील पर्वतीय अवरोधों को काटकर गहरे गॉर्ज और महाखड्डों का निर्माण करती हैं, जबकि अधिकांश प्रायद्वीपीय नदियाँ अपनी विकसित परिपक्व अवस्था के कारण 'वृक्षाकार' (Dendritic) से लेकर 'अरीय' (Radial) प्रतिरूप दर्शाती हैं।
- 2. प्रायद्वीपीय भारत की प्रमुख नदियाँ जैसे गोदावरी, कृष्णा और कावेरी अपने मुहानों पर बड़े और सुविकसित डेल्टा का निर्माण करती हैं, जबकि नर्मदा और तापी नदियाँ रिफ्ट घाटियों से होते हुए अरब सागर में गिरती हैं और तीव्र प्रवाह तथा अत्यधिक ज्वारीय ऊर्जा के कारण डेल्टा के स्थान पर 'ज्वारनदमुख' (Estuaries) बनाती हैं।
- 3. हिमालयी नदियों का जलग्रहण क्षेत्र अत्यधिक विस्तृत होने के कारण इनमें मानसून वर्षा के साथ-साथ ग्रीष्मकाल में हिमनदों (Glaciers) के पिघलने से भी जल की प्राप्ति होती है, जिसके कारण ये वर्ष भर बारहमासी (Perennial) बनी रहती हैं, जबकि प्रायद्वीपीय नदियाँ पूरी तरह से मौसमी (Seasonal) होती हैं और ग्रीष्मकाल में सूख जाती हैं।
- 4. दामोदर नदी, जो छोटा नागपुर पठार से निकलती है, बंगाल के शोक के रूप में जानी जाती है और यह एक 'पूर्ववर्ती नदी' का क्लासिक उदाहरण है जो अपने मार्ग में अपरदन चक्र के पुनरुत्थान (Rejuvenation) को प्रदर्शित करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: हिमालयी नदियाँ पूर्ववर्ती (Antecedent) अपवाह का उदाहरण हैं क्योंकि इन्होंने हिमालय के उत्थान के साथ-साथ अपनी घाटियों को गहरा किया है। प्रायद्वीपीय नदियाँ प्राचीन और स्थिर पठारी संरचनाओं पर बहती हैं और वृक्षाकार, जालीनुमा या अरीय प्रतिरूप बनाती हैं। कथन 2 सही है: प्रायद्वीपीय भारत की पूर्व की ओर बहने वाली नदियाँ (गोदावरी, कृष्णा, कावेरी) बंगाल की खाड़ी में उपजाऊ डेल्टा बनाती हैं, जबकि पश्चिम की ओर बहने वाली नर्मदा और तापी विवर्तनिक भ्रंश घाटियों (Rift Valleys) से बहती हुई ज्वारनदमुख (Estuaries) का निर्माण करती हैं। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, पश्चिम वाहिनी नदियाँ तलछट की कमी और तीव्र ज्वार के कारण डेल्टा नहीं बना पाती हैं। कथन 3 सही है: हिमालयी नदियों में हिमनद पिघलने और मानसूनी वर्षा दोनों से पानी मिलता है जिससे वे बारहमासी होती हैं। प्रायद्वीपीय नदियाँ मुख्य रूप से वर्षा पर निर्भर (Rain-fed) होने के कारण ग्रीष्मकाल में जल स्तर में भारी गिरावट या सूखने की प्रवृत्ति रखती हैं। कथन 4 गलत है: दामोदर नदी एक पूर्ववर्ती नदी नहीं है, बल्कि यह एक अनुगामी या अध्यारोपित (Superimposed) नदी का उदाहरण है जो अपने पुराने पठारी धरातल पर बहती है।
Related Questions
→
भारत की 2011 की जनगणना के अनुसार भाषाई और धार्मिक जनसांख्यिकी (Demographics) तथा मानवजातीय/नृपीय वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार कुल जनसंख्या में भाषा के आधार पर हिंदी बोलने वालों का प्रतिशत सबसे अधिक (लगभग 43.63%) है, जबकि दूसरा सबसे अधिक बोला जाने वाला भाषा समूह बांग्ला है, और ये दोनों भाषाएँ 'भारोपीय' (Indo-Aryan) भाषा परिवार के अंतर्गत आती हैं।
2. भारत के धार्मिक अल्पसंख्यकों में वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार जैन समुदाय की साक्षरता दर (लगभग 86.8%) देश के सभी प्रमुख धार्मिक समुदायों में सबसे अधिक दर्ज की गई, जबकि मुस्लिम समुदाय की जनसंख्या वृद्धि दर पिछले दशक (2001-2011) में सभी प्रमुख धर्मों की तुलना में सबसे कम दर्ज की गई।
3. नृपीय (Racial/Ethnic) वर्गीकरण के दृष्टिकोण से, भारत की जनसंख्या में 'इंडो-आर्यन' (Indo-Aryan) और 'द्रविड़' (Dravidian) प्रमुख मानवजातियाँ हैं, जिनमें बी.एस. गुहा (B.S. Guha) के शास्त्रीय वर्गीकरण के अनुसार उत्तर-पूर्वी भारत की मंगोलॉयड (Mongoloid) प्रजाति के लोगों का भी महत्वपूर्ण योगदान है।
4.
→
भारत की जलवायु, मानसून की उत्पत्ति और वर्षा के वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. दक्षिण-पश्चिम मानसून की 'अरब सागर शाखा' और 'बंगाल की खाड़ी शाखा' दोनों की उत्पत्ति का मुख्य कारण ग्रीष्मकाल में भारतीय उपमहाद्वीप पर अत्यधिक ताप के कारण विकसित होने वाला तीव्र निम्न वायुदाब (Low Pressure) और मेडागास्कर के पूर्व में स्थित मस्कारेन उच्च दबाव पेटी से उत्पन्न होने वाली दक्षिणी गोलार्ध की व्यापारिक हवाओं का उत्तर की ओर बढ़ना है।
2. तमिलनाडु के तट पर शीतकाल में वर्षा मुख्य रूप से 'उत्तर-पूर्वी मानसून' (Retreating Monsoon / Winter Monsoon) के कारण होती है, क्योंकि ये हवाएं बंगाल की खाड़ी से नमी ग्रहण करके कोरोमंडल तट पर वर्षा करती हैं, जबकि ग्रीष्मकाल में यह क्षेत्र वृष्टिछाया क्षेत्र (Rain shadow area) में स्थित होने के कारण सूखा रहता है।
3. 'एल नीनो' (El Niño) घटना, जो प्रशांत महासागर में पेरू के तट पर गर्म जलधारा के प्रकट होने से संबंधित है, भारतीय मानसून को आमतौर पर मजबूत करती है और इसके प्रभाव से भारत में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की जाती है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में मानसून का 'प्रस्फोट' (Burst of Monsoon) सबसे पहले केरल के तट पर जून के प्रथम सप्ताह में होता है, जो मुख्य रूप से उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट स्ट्रीम (Tropical Easterly Jet Stream) और उत्तर भारत के मैदानी भागों में थर्मल लो प्रेशर के सक्रिय होने से जुड़ा हुआ है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
विवर्तनिक प्लेट सीमाओं, भूकंपीय ऊर्जा के संचरण और ज्वालामुखी उद्गार की क्रियाप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'अपरसारी प्लेट सीमाओं' (Divergent Plate Boundaries) पर मुख्य रूप से शील्ड ज्वालामुखियों का निर्माण होता है, जहाँ बेसाल्टिक लावा के शांत उद्गार के कारण मध्य-महासागरीय कटकों (Mid-Oceanic Ridges) का विस्तार होता है, जैसे कि अटलांटिक महासागर का मध्य-अटलांटिक कटक।
2. 'अभिसारी प्लेट सीमाओं' (Convergent Plate Boundaries) के अंतर्गत सबडक्शन जोन में जब महासागरीय प्लेट भारी होने के कारण महाद्वीपीय प्लेट के नीचे धंसती है, तो अत्यधिक संपीड़न बलों के कारण वहाँ विनाशकारी भूकंप आते हैं और 'सरकम-पैसिफिक बेल्ट' (रिंग ऑफ फायर) इसी क्षेत्र का हिस्सा है।
3. रिक्टर पैमाना (Richter Scale) भूकंप की तीव्रता (Magnitude) को मापने का एक लघुगणकीय (Logarithmic) पैमाना है, जिसका अर्थ है कि पैमाने पर प्रत्येक अगली पूर्ण संख्या की वृद्धि पिछले स्तर की तुलना में ऊर्जा मुक्त होने के मामले में लगभग 32 गुना अधिक होती है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भूकंप के उद्गम बिंदु (Focus या Hypocenter) से निकलने वाली 'शॉक्वेव्स' जब सतह पर सबसे पहले पहुँचती हैं, तो वहाँ 'P-तरंगों' (Primary Waves) के कारण धरातल में सबसे अधिक विध्वंसक ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज विस्थापन उत्पन्न होता है, जो इमारतों को तुरंत धराशायी कर देता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
भारत के अपवाह तंत्र के संदर्भ में, हिमालयी नदियों और प्रायद्वीपीय नदियों की विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हिमालयी नदियाँ 'पूर्ववर्ती' (Antecedent) अपवाह का उदाहरण प्रस्तुत करती हैं, जिसका अर्थ है कि इन नदियों ने हिमालय के उत्थान से पहले भी अपने मार्ग को बनाए रखा और गहरी गॉर्ज (Gorges) व महाखड्डों का निर्माण किया।
2. प्रायद्वीपीय भारत की अधिकांश नदियाँ (जैसे नर्मदा और ताप्ती को छोड़कर) बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं और एक परिपक्व अवस्था में पहुँच चुकी हैं, जिसके कारण इनकी घाटियाँ छिछली, चौड़ी और प्रवणता विहीन (Graded Profiles) होती हैं।
3. कोसी नदी, जिसे 'बिहार का शोक' कहा जाता है, अपने मार्ग में तीव्र पार्श्व अपरदन (Lateral Erosion) और बड़े पैमाने पर गाद जमा करने के लिए कुख्यात है, और यह अपनी धारा बदलने की प्रवृत्ति के कारण जानी जाती है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार प्रायद्वीपीय नदियाँ मुख्य रूप से वर्षा पर आधारित (Rain-fed) होने के कारण अनित्य (Non-perennial) होती हैं और ग्रीष्मकाल में इनमें जल की मात्रा अत्यंत कम हो जाती है, जबकि हिमालयी नदियाँ बारहमासी (Perennial) होती हैं क्योंकि इन्हें वर्षा के साथ-साथ ग्लेशियरों के पिघलने से भी जल प्राप्त होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
भारत के अपवाह तंत्र, विशेषकर हिमालयी और प्रायद्वीपीय नदियों के उदगम, नदी द्रोणी विशेषताओं और उनके विवर्तनिक (Tectonic) इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सिंधु, ब्रह्मपुत्र और सतलुज जैसी हिमालयी नदियाँ 'पूर्ववर्ती अपवाह' (Antecedent Drainage) का उत्कृष्ट उदाहरण हैं, जिसका अर्थ है कि ये नदियाँ हिमालय के उत्थान से पहले से विद्यमान थीं और हिमालय पर्वतमाला के धीरे-धीरे ऊपर उठने के साथ-साथ अपने मार्ग को काटकर गहरे गार्ज (Gorges) का निर्माण करती रहीं।
2. प्रायद्वीपीय भारत की अधिकांश नदियाँ (जैसे महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी) पश्चिम से पूर्व की ओर बहती हुई बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं और अपने मुहानों पर बड़े-बड़े उपजाऊ डेल्टा का निर्माण करती हैं, जिसका प्रमुख कारण पश्चिमी घाट का ऊंचा होना और पूर्वी तट की ओर क्रमिक ढाल का होना है।
3. नर्मदा और ताप्ती नदियाँ प्रायद्वीपीय पठार पर पूर्व से पश्चिम की ओर बहने वाली प्रमुख नदियाँ हैं जो डेल्टा के निर्माण के बजाय 'एश्चुअरी' (Estuary) या ज्वारनदमुख बनाती हैं, क्योंकि ये प्राचीन भ्रंश घाटियों (Rift Valleys) से होकर गुजरती हैं और इनमें तलछट (Sediments) की मात्रा अत्यधिक होती है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार प्रायद्वीपीय अपवाह तंत्र हिमालयी अपवाह तंत्र की तुलना में अधिक प्राचीन है, जो एक परिपक्व अवस्था (Matured stage) को दर्शाता है, जिसकी नदियाँ अपने बेसिन में आधार तल (Base level) को प्राप्त कर चुकी हैं और इनकी घाटियाँ मुख्य रूप से चौड़ी तथा उथली होती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.