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Geography
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भारत की मृदा प्रणालियों और उनके वितरण तथा रासायनिक गुणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. जलोढ़ मृदा (Alluvial Soils) देश के कुल क्षेत्रफल का सबसे बड़ा हिस्सा कवर करती है और यह मुख्य रूप से प्रायद्वीपीय भारत की नदी घाटियों और डेल्टाई क्षेत्रों तक ही सीमित है, जबकि थार मरुस्थल में इसका पूर्ण अभाव पाया जाता है।
  2. 2. काली मृदा (Black Soils), जिसे 'रेगुर मृदा' भी कहा जाता है, में नमी को लंबे समय तक धारण करने की उच्च क्षमता होती है और ग्रीष्मकाल में इसमें गहरी दरारें पड़ जाती हैं, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि इसकी 'स्वयं जुताई' (Self-ploughing) हो गई है।
  3. 3. लैटेराइट मृदा (Laterite Soils) अत्यधिक तापमान और भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में तीव्र निक्षालन (Leaching) के परिणामस्वरूप विकसित होती है, जिसमें सिलिका का निक्षालन हो जाता है और आयरन तथा एल्युमिनियम के ऑक्साइड शेष रह जाते हैं, जिससे यह चाय, कॉफी और काजू की खेती के लिए अत्यंत उपयुक्त बनती है।
  4. 4. लाल और पीली मृदा (Red and Yellow Soils) का रंग मुख्य रूप से रूपांतरित चट्टानों में लौह धातु के व्यापक प्रसार के कारण लाल होता है, और जलयोजन (Hydration) के बाद यह पीले रंग में परिवर्तित हो जाती है, जो कि दक्कन के पठार के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में बहुतायत में पाई जाती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि जलोढ़ मृदा (Alluvial Soils) देश के कुल क्षेत्रफल का लगभग 40% हिस्सा कवर करती है और यह मुख्य रूप से उत्तरी मैदानों तथा महान नदी घाटियों में पाई जाती है, न कि केवल प्रायद्वीपीय भारत तक सीमित है। कथन 2 सही है क्योंकि काली मिट्टी में 'स्वेच्छा जुताई' (self-ploughing capacity) का गुण पाया जाता है क्योंकि गीली होने पर यह चिपचिपी और सूखने पर सिकुड़ कर इसमें चौड़ी दरारें पड़ जाती हैं। कथन 3 सही है, लैटेराइट मिट्टी अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में लीचिंग की प्रक्रिया से बनती है और यह काजू, टैपिओका, चाय तथा कॉफी के लिए उपयुक्त होती है। कथन 4 सही है, लाल और पीली मिट्टी का विस्तार दक्कन के पठार के पूर्वी और दक्षिणी भागों में रवेदार आग्नेय चट्टानों के विखंडन से होता है। भारतीय मृदा के विस्तृत अध्ययन के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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