BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Geography
10 views

भारतीय मानसून की उत्पत्ति और उसकी दीर्घकालिक विविधताओं को प्रभावित करने वाले कारकों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 'तिब्बती पठार का तापीय कारक' (Thermal Factor of Tibetan Plateau) ग्रीष्मकाल में एक विशाल उच्च-तुंगता वाले हीट-इंजन के रूप में कार्य करता है, जो लगभग 9 किमी की ऊँचाई पर एक प्रबल प्रति-चक्रवात का निर्माण करके उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट स्ट्रीम को जन्म देता है।
  2. 2. 'माडागास्कर के पूर्व में मस्कारेन उच्च वायुदाब' (Mascarene High) की तीव्रता में होने वाले उतार-चढ़ाव दक्षिणी गोलार्ध से आने वाली व्यापारिक हवाओं को दाब प्रवणता प्रदान करते हैं, जिससे सोमाली जेट की गति और भारतीय उपमहाद्वीप में मानसूनी वर्षा की मात्रा सीधे तौर पर नियंत्रित होती है।
  3. 3. 'हिंद महासागर द्विध्रुव' (Indian Ocean Dipole - IOD) की 'सकारात्मक चरण' (Positive Phase) के दौरान पश्चिमी हिंद महासागर का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है, जो भारत में मानसून को कमजोर करता है और गंभीर सूखे की स्थिति उत्पन्न करता है।
  4. 4. 'उत्तरी अटलांटिक दोलन' (NAO) और 'यूरेशियाई बर्फ आवरण' की स्थिति भी अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून के प्रदर्शन को प्रभावित करती है, क्योंकि शीतकालीन हिमपात का अधिक होना ग्रीष्मकाल में तापीय gradients को बाधित करता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि ग्रीष्मकाल में तिब्बती पठार के गर्म होने से वहाँ निम्न वायुदाब बनता है और क्षोभमंडलीय उच्च स्तर पर प्रति-चक्रवात के विकास से उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट स्ट्रीम प्रवाहित होती है। कथन 2 सही है क्योंकि मस्कारेन उच्च वायुदाब और सोमाली जेट दक्षिण-पश्चिमी मानसून को भारतीय तटों की ओर धकेलने में मुख्य चालक की भूमिका निभाते हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि IOD का सकारात्मक चरण पश्चिमी हिंद महासागर को गर्म करता है, जिससे भारतीय उपमहाद्वीप में मानसूनी वर्षा में वृद्धि होती है, न कि सूखा पड़ता है। कथन 4 सही है क्योंकि यूरेशियाई क्षेत्र में अत्यधिक हिमपात ग्रीष्मकालीन तापीय तापन को धीमा कर देता है, जिससे मानसून कमजोर होता है। विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Share:

Related Questions

पृथ्वी की आंतरिक संरचना, विभिन्न भू-वैज्ञानिक परतों, असांतत्य (Discontinuities) और चट्टानों के चक्र के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'मोहरोविक असांतत्य' (Mohorovicic Discontinuity) क्रस्ट और ऊपरी मेंटल के बीच स्थित है, जहाँ से होकर प्राथमिक भूकंपीय तरंगों (P-waves) के वेग में अचानक तीव्र वृद्धि दर्ज की जाती है। 2. 'कोनराड असांतत्य' (Conrad Discontinuity) ऊपरी क्रस्ट (सियाल) और निचले क्रस्ट (सीमा) के बीच की सीमा रेखा को स्पष्ट करता है, जबकि 'ग्यूटेनबर्ग असांतत्य' निचली मेंटल और बाह्य क्रोड को पृथक करता है। 3. कायांतरित चट्टानों में पर्तों (Stratification) का पाया जाना उनकी मुख्य विशेषता है, और क्षेत्रीय कायांतरण (Regional Metamorphism) के प्रभाव से 'चूना पत्थर' का रूपांतरण 'संगमरमर' (Marble) में तथा 'शेल' का रूपांतरण 'स्लेट' में होता है। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार पृथ्वी के बाह्य क्रोड (Outer Core) में निकेल और लोहे की अधिकता के कारण यह तरल अवस्था में पाया जाता है, जिससे होकर एस-तरंगें (S-waves) गमन नहीं कर पाती हैं और इस क्षेत्र में 'छाया क्षेत्र' (Shadow Zone) का निर्माण होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? पृथ्वी की आंतरिक विवर्तनिक प्रक्रियाओं, भूकंपीय तरंगों के संचरण, ज्वालामुखी के उद्गार तंत्र और सुनामी तरंगों की गतिशीलता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भूकंप का 'अधिकरण' (Epicenter) धरातल पर वह बिंदु होता है जो ठीक उद्गम केंद्र (Focus/Hypocenter) के ऊपर होता है, और यहीं पर सबसे पहले प्राथमिक (P-waves) और द्वितीयक (S-waves) तरंगें एक साथ पहुँचती हैं, जिससे अधिकतम विध्वंसकारी सतही तरंगें (Rayleigh and Love waves) उत्पन्न होती हैं। 2. 'शांत ज्वालामुखी' (Dormant Volcano) वे ज्वालामुखी होते हैं जिनसे ऐतिहासिक काल में कोई उद्गार नहीं हुआ है और भविष्य में भी उद्गार की कोई संभावना नहीं रहती है, जबकि 'जागृत ज्वालामुखी' (Active Volcano) लगातार लावा और गैसें बाहर निकालते रहते हैं। 3. महासागरीय नितल पर उत्पन्न होने वाली सुनामी तरंगें गहरे समुद्र में अत्यंत कम ऊँचाई (सामान्यतः 1 मीटर से कम) और अत्यधिक लंबी तरंगदैर्ध्य (Wavelength) वाली होती हैं, लेकिन तटीय उथले पानी में पहुँचने पर इनकी गति कम हो जाती है जिससे इनकी तरंग ऊँचाई (Wave height) कई गुना बढ़ जाती है। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार ज्वालामुखी उद्गार के समय निकलने वाली गैसों में जलवाष्प (Water vapor) की मात्रा सर्वाधिक होती है, इसके अलावा कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन जैसी गैसें भी प्रचुर मात्रा में निकलती हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भारत के अपवाह तंत्र के संदर्भ में, हिमालयी नदियों और प्रायद्वीपीय नदियों की विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हिमालयी नदियाँ 'पूर्ववर्ती' (Antecedent) अपवाह का उदाहरण प्रस्तुत करती हैं, जिसका अर्थ है कि इन नदियों ने हिमालय के उत्थान से पहले भी अपने मार्ग को बनाए रखा और गहरी गॉर्ज (Gorges) व महाखड्डों का निर्माण किया। 2. प्रायद्वीपीय भारत की अधिकांश नदियाँ (जैसे नर्मदा और ताप्ती को छोड़कर) बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं और एक परिपक्व अवस्था में पहुँच चुकी हैं, जिसके कारण इनकी घाटियाँ छिछली, चौड़ी और प्रवणता विहीन (Graded Profiles) होती हैं। 3. कोसी नदी, जिसे 'बिहार का शोक' कहा जाता है, अपने मार्ग में तीव्र पार्श्व अपरदन (Lateral Erosion) और बड़े पैमाने पर गाद जमा करने के लिए कुख्यात है, और यह अपनी धारा बदलने की प्रवृत्ति के कारण जानी जाती है। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार प्रायद्वीपीय नदियाँ मुख्य रूप से वर्षा पर आधारित (Rain-fed) होने के कारण अनित्य (Non-perennial) होती हैं और ग्रीष्मकाल में इनमें जल की मात्रा अत्यंत कम हो जाती है, जबकि हिमालयी नदियाँ बारहमासी (Perennial) होती हैं क्योंकि इन्हें वर्षा के साथ-साथ ग्लेशियरों के पिघलने से भी जल प्राप्त होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भारत में सिंचाई के स्रोतों, सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों और प्रमुख फसलों की भौगोलिक विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत में कुल सिंचित क्षेत्र (Net Irrigated Area) के स्रोतों में 'नदी नहरों' (Canals) का स्थान प्रथम है, जिसके बाद नलकूपों (Tubewells) और अन्य कुओं का स्थान आता है। 2. 'प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना' (PMKSY) के अंतर्गत 'हर खेत को पानी' के उद्देश्य के साथ-साथ 'पर ड्राप मोर क्रॉप' (Per Drop More Crop) के तहत सूक्ष्म सिंचाई (ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई) को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे जल उपयोग दक्षता (Water Use Efficiency) में वृद्धि होती है। 3. 'गेहूं' एक रबी की फसल है जिसे उगने के समय ठंडी और आद्र जलवायु तथा पकते समय तेज धूप व स्पष्ट आकाश की आवश्यकता होती है, और इसकी सफलता के लिए भारत में 50 से 75 सेंटीमीटर वार्षिक वर्षा सबसे उपयुक्त मानी जाती है। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में नलकूपों और भूजल सिंचाई का सर्वाधिक विस्तार उत्तर भारत के विशाल मैदानों विशेषकर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश राज्यों में हुआ है, क्योंकि यहाँ की नरम जलोढ़ मृदा और प्रचुर भूजल भंडार इसके अनुकूल हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भारत की पर्वत प्रणालियों और उनसे जुड़ी घाटियों (Valleys) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'चुम्बी घाटी' (Chumbi Valley) एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण घाटी है जो सिक्किम, भूटान और तिब्बत के त्रिसंधि (Tri-junction) क्षेत्र के पास स्थित है और यह प्राचीन काल में तिब्बत के साथ व्यापार का एक प्रमुख मार्ग रही है। 2. 'बरलच्छा ला' दर्रे के समीप स्थित 'भागा घाटी' (Bhaga Valley) हिमाचल प्रदेश के लाहौल और स्पीति जिले में स्थित है, जहाँ चंद्र और भागा नदियाँ मिलकर चंद्रभागा (चेनाब) नदी का निर्माण करती हैं। 3. 'न्युरा घाटी' (Neora Valley) पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में स्थित एक समृद्ध जैव विविधता क्षेत्र है, जो पूर्वी हिमालयी पाद क्षेत्रों में अल्पाइन और उष्णकटिबंधीय वनस्पतियों का अनूठा मिश्रण प्रस्तुत करती है। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार लघु हिमालय (Himachal) और शिवालिक श्रेणी के बीच पाई जाने वाली समतल अनुदैर्ध्य घाटियों को 'दूँ' (Duns) और 'द्वार' (Duars) कहा जाता है, जिनमें देहरादून और कोटली दूँ प्रमुख हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.