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Geography
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भारत में सिंचाई प्रणालियों, कृषि पद्धतियों और प्रमुख फसलों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. भारत में कुल सिंचित क्षेत्र का सबसे बड़ा स्रोत 'नलकूप और अन्य कुएँ' (Tubewells and Wells) हैं, जिनके माध्यम से देश के कुल सिंचित क्षेत्र का लगभग 60% भाग सिंचित होता है, और इसमें उत्तर प्रदेश का स्थान प्रथम है।
  2. 2. 'सिंचाई की ड्रिप पद्धति' (Drip Irrigation) सूक्ष्म सिंचाई का एक अत्यधिक कुशल रूप है, जो न केवल वाष्पीकरण और रिसाव के माध्यम से होने वाले जल की हानि को न्यूनतम करती है, बल्कि मृदा लवणता (Soil Salinity) और खरपतवार की वृद्धि को भी नियंत्रित करने में सहायक है।
  3. 3. 'धान' (Rice) एक उष्णकटिबंधीय खरीफ फसल है जिसके सफल विकास के लिए उच्च तापमान (25°C से अधिक), प्रचुर मात्रा में आर्द्रता और लगभग 100 सेमी से अधिक वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है, लेकिन इसे तीव्र जल निकासी वाली अत्यधिक शुष्क मृदा में उगाया जाता है।
  4. 4. 'मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना' (Soil Health Card Scheme) का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनकी खेतों की मिट्टी की पोषक तत्वों की स्थिति के आधार पर उर्वरकों और सूक्ष्म पोषक तत्वों के संतुलित उपयोग की सिफारिश करना है ताकि दीर्घकालिक उत्पादकता बनी रहे।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि भारत में नलकूप और कुएँ सिंचाई के सबसे बड़े साधन हैं, जो कुल सिंचित क्षेत्र का लगभग 60% हिस्सा कवर करते हैं। कथन 2 सही है क्योंकि ड्रिप सिंचाई जल की बर्बादी को रोकती है और लवणता तथा खरपतवार को नियंत्रित करती है। कथन 3 गलत है क्योंकि धान को जलमग्न (Waterlogged) परिस्थितियों या चिकनी, भारी दोमट मिट्टी (जो पानी रोक सके) की आवश्यकता होती है, न कि 'अत्यधिक शुष्क और तीव्र जल निकासी वाली मृदा' की। कथन 4 सही है, जो मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के उद्देश्य को सटीक रूप से परिभाषित करता है। भारत में कृषि और सिंचाई के व्यापक अध्ययन के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखा जा सकता है।
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विश्व की प्रमुख नदियों और उनके किनारे स्थित नगरों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. मोंट्रियल (Montreal) — सेंट लॉरेंस नदी 2. रोम (Rome) — टाइबर नदी 3. पेरिस (Paris) — सीन नदी 4. ब्यूनस आयर्स (Buenos Aires) — पराना नदी उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं? पृथ्वी की आंतरिक संरचना, विभिन्न असंतुलन क्षेत्रों (Discontinuities) और चट्टानों के कायांतरण (Metamorphism) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'कॉर्नाड असंतुलन' (Conrad Discontinuity) ऊपरी सियाल (Sial) और निचली सीमा (Sima) या ऊपरी क्रस्ट और निचली क्रस्ट के मध्य स्थित होती है, जबकि 'गुटेनबर्ग असंतुलन' (Gutenberg Discontinuity) निचली मेंटल और बाहरी क्रोड (Outer Core) के बीच स्थित है जहाँ P-तरंगों की गति मंद पड़ जाती है और S-तरंगें पूरी तरह विलुप्त हो जाती हैं। 2. आग्नेय चट्टानों (Igneous Rocks) में 'गैब्रो' और 'डायोराइट' आंतरिक (Intrusive) या पातालीय आग्नेय चट्टानों के प्रमुख उदाहरण हैं, जिनका निर्माण मैग्मा के पृथ्वी की गहराई में अत्यंत मंद गति से ठंडा होने के कारण बड़े रवेदार (Crystalline) स्वरूप में होता है। 3. 'क्षेत्रीय कायांतरण' (Regional Metamorphism) अत्यधिक विवर्तनिक दबाव और उच्च तापमान के कारण बड़े भू-भाग पर होता है, जिसके परिणामस्वरूप चूना पत्थर (Limestone) का रूपांतरण संगमरमर (Marble) में तथा ग्रेनाइट (Granite) का रूपांतरण नाइस (Gneiss) में होता है। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार पृथ्वी का क्रोड (Core) मुख्य रूप से निकल और लोहे जैसी भारी धातुओं से बना है, जिसे 'निफे' (Nife) कहा जाता है और यही परत पृथ्वी के भू-चुंबकीय क्षेत्र (Geomagnetic Field) की उत्पत्ति के लिए उत्तरदायी है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भारत के अपवाह तंत्र (Drainage System) के संदर्भ में, हिमालयी नदियों और प्रायद्वीपीय नदियों की विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हिमालयी नदियाँ बारहमासी (Perennial) प्रकृति की होती हैं क्योंकि इन्हें जल का पोषण पिघलती हुई बर्फ (Glaciers) और मानसूनी वर्षा दोनों से प्राप्त होता है, जबकि अधिकांश प्रायद्वीपीय नदियाँ अनित्य (Seasonal या Ephemeral) होती हैं और इनका मुख्य स्रोत वर्षा का जल होता है। 2. प्रायद्वीपीय नदियाँ अपनी युवावस्था को पार कर चुकी हैं और एक लंबी भूवैज्ञानिक काल अवधि से बहते हुए इन्होंने अपने आधार तल (Base Level) को प्राप्त कर लिया है, जिसके परिणामस्वरूप ये अपने मध्य और निचले पाठ्यक्रमों में अत्यधिक विसर्पण (Meandering) और गोखुर झीलों का निर्माण करती हैं। 3. हिमालयी नदियों द्वारा निर्मित 'सिंधु', 'ब्रह्मपुत्र' और 'गंगा' नदियाँ पूर्ववर्ती (Antecedent) अपवाह तंत्र के उत्कृष्ट उदाहरण हैं, जो हिमालय के उत्थान से पहले से ही प्रवाहित हो रही थीं और उत्थान के साथ-साथ गहरी महाखड्डों (Gorges) का निर्माण करती गईं। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदी गोदावरी है, जिसे 'दक्षिण गंगा' या 'वृद्ध गंगा' भी कहा जाता है, तथा इसका अपवाह बेसिन महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा राज्यों में फैला हुआ है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भूकंपीय तरंगों (Seismic Waves) और पृथ्वी के आंतरिक भाग में उनकी गति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्राथमिक तरंगें (P-waves) अनुदैर्ध्य (Longitudinal) प्रकृति की होती हैं और ये ध्वनि तरंगों के समान केवल ठोस पदार्थों से ही गुजर सकती हैं, जबकि तरल या गैसीय माध्यमों में प्रवेश करते ही ये पूरी तरह विलुप्त हो जाती हैं। 2. द्वितीयक तरंगें (S-waves) अनुप्रस्थ (Transverse) तरंगें होती हैं, जो केवल ठोस माध्यम में ही संचरण कर सकती हैं और इनका तरल माध्यम (जैसे बाहरी कोर) से गुजरने में असमर्थ होना इस बात का मुख्य प्रमाण है कि पृथ्वी का बाहरी क्रोड तरल अवस्था में है। 3. धरातलीय तरंगें (Surface Waves जैसे रेले और लव तरंगें), शरीर तरंगों (Body Waves) की तुलना में अधिक समय तक यात्रा करती हैं और भूकंप के केंद्र से दूर जाने पर सबसे अधिक विनाशकारी क्षति इन्हीं के द्वारा पहुंचाई जाती है। 4. छाया क्षेत्र (Shadow Zone) वह विशिष्ट क्षेत्र होता है जहाँ किसी भी प्रकार की भूकंपीय तरंगें (न तो P और न ही S तरंगें) दर्ज की जाती हैं, और P-तरंगों का छाया क्षेत्र S-तरंगों की तुलना में काफी छोटा होता है क्योंकि यह पृथ्वी के आंतरिक भागों में अपवर्तन के कारण निर्मित होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? भारत की जलवायु और दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्पत्ति तथा वर्षा के वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. दक्षिण-पश्चिम मानसून की 'अरब सागर शाखा' पश्चिमी घाट से टकराने के कारण पश्चिमी तटीय मैदानों में भारी वर्षा करती है, किंतु पश्चिमी घाट के वृष्टि-छाया क्षेत्र (Rain-shadow Area) में स्थित होने के कारण दक्कन के पठार का आंतरिक भाग अपेक्षाकृत शुष्क रहता है। 2. 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