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महासागरीय जलधाराओं और उनके क्षेत्रीय एवं जलवायुगत प्रभावों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 'कुरोशियो जलधारा' (Kuroshio Current) उत्तरी प्रशांत महासागर की एक गर्म जलधारा है, जो फिलीपींस के तट से उत्तर की ओर बहती हुई जापान के पूर्वी तट तक पहुँचती है और इसे 'जापान की काली धारा' भी कहा जाता है।
  2. 2. 'केनारी जलधारा' (Canary Current) अटलांटिक महासागर की एक ठंडी जलधारा है, जो अफ्रीका के उत्तर-पश्चिमी तट के सहारे दक्षिण की ओर प्रवाहित होती है और इसके प्रभाव से सहारा मरुस्थल के तटीय क्षेत्रों में शुष्क और ठंडी जलवायु का निर्माण होता है।
  3. 3. 'लैब्राडोर जलधारा' (Labrador Current) आर्कटिक महासागर से दक्षिण की ओर बहने वाली एक गर्म जलधारा है, जो न्यूफाउंडलैंड के तट के पास गल्फ स्ट्रीम से मिलती है और विश्व के सबसे बड़े मत्सय क्षेत्र 'ग्रैंड बैंक' का निर्माण करती है।
  4. 4. 'पेरू जलधारा' (Peru Current), जिसे हम्बोल्ट जलधारा भी कहा जाता है, दक्षिणी प्रशांत महासागर की एक ठंडी जलधारा है जो दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट के उत्तर की ओर बहती है और इसके कारण यहाँ एटाकामा मरुस्थल के विकास में सहायता मिलती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि कुरोशियो जलधारा उत्तरी प्रशांत महासागर की एक प्रमुख गर्म जलधारा है। कथन 2 सही है क्योंकि केनारी जलधारा अफ्रीका के उत्तर-पश्चिम तट पर बहने वाली एक ठंडी जलधारा है। कथन 3 गलत है क्योंकि लैब्राडोर जलधारा एक **ठंडी** (Cold) जलधारा है, न कि गर्म, जो आर्कटिक क्षेत्र से दक्षिण की ओर बहती है। कथन 4 सही है क्योंकि पेरू या हम्बोल्ट जलधारा एक ठंडी जलधारा है जो दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट पर बहती है और इसके शुष्क प्रभाव से एटाकामा मरुस्थल का विस्तार हुआ है। महासागरीय धाराओं के बारे में अधिक जानने के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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'काली मृदा' (जिसे रेगुर मृदा भी कहा जाता है) में लोहे, चूने, मैग्नीशियम और एल्युमिनियम की अधिकता होती है, तथा इसमें उच्च जल-धारण क्षमता और 'स्व-जुताई' (Self-ploughing) का विशिष्ट गुण पाया जाता है क्योंकि गीली होने पर यह अत्यधिक चिपचिपी हो जाती है और सूखने पर इसमें गहरी चौड़ी दरारें पड़ जाती हैं। 3. 'लैटेराइट मृदा' का निर्माण मानसूनी जलवायु के अंतर्गत उच्च तापमान और तीव्र वर्षा के कारण 'निक्षालन' (Leaching) की तीव्र प्रक्रिया के फलस्वरूप होता है, जिसमें सिलिका जैसे घुलनशील तत्व बह जाते हैं और आयरन ऑक्साइड तथा एल्युमिनियम के यौगिक शेष बच जाते हैं, जिससे यह मृदा अत्यधिक उपजाऊ होकर रबी की प्रमुख फसलों के लिए सर्वोत्तम होती है। 4. 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