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Geography
Asked 2 months ago · Viewed 15 times

भारत की मिट्ठियों के वर्गीकरण, रासायनिक गुणों और उनके भौगोलिक वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 'काली मिट्टी' (Black Soil) या रेगुर मिट्टी का काला रंग मुख्य रूप से टाइटैनिफ़ेरस मैग्नेटाइट (Titaniferous Magnetite), ह्यूमस और यौगिकों की उपस्थिति के कारण होता है, और यह मिट्टी अपनी 'स्वयं जुताई' (Self-ploughing) की विशेषता के लिए जानी जाती है क्योंकि सूखने पर इसमें गहरी दरारें पड़ जाती हैं।
  2. 2. 'लाल और पीली मिट्टी' (Red and Yellow Soils) का लाल रंग क्रिस्टलीय और कायांतरित चट्टानों में लोहे (Iron) के व्यापक विसरित होने के कारण होता है, जबकि इसका पीला रंग इसमें जलयोजित (Hydrated) रूप में लोहे के ऑक्साइड्स के पाए जाने के कारण होता है।
  3. 3. 'लैटेराइट मिट्टी' (Laterite Soil) उच्च तापमान और भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में तीव्र निक्षालन (Leaching) के परिणामस्वरूप विकसित होती है, जिसमें सिलिका का निक्षालन हो जाने के कारण आयरन और एल्युमिनियम के ऑक्साइड्स शेष बच जाते हैं, और यह मिट्टी काजू, चाय तथा कॉफी की कृषि के लिए अत्यधिक उपयुक्त होती है।
  4. 4. 'क्षारीय एवं लवणीय मिट्टी' (Saline and Alkaline Soils), जिसे स्थानीय भाषा में रेह, कलर या उसर भी कहा जाता है, में सोडियम, मैग्नीशियम और कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है, और यह मिट्टी मुख्य रूप से अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग और नहरों के रिसाव वाले अर्ध-शुष्क और जल-जमाव वाले क्षेत्रों में पाई जाती है, जिसके बारे में विकिपीडिया संदर्भ में विस्तृत जानकारी दी गई है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन पूरी तरह से सही हैं। 1. काली मिट्टी (रेगुर) में बेसाल्टिक लावा के विखंडन से टाइटैनिफ़ेरस मैग्नेटाइट और ह्यूमस पाए जाते हैं, जो इसकी उच्च जल-धारण क्षमता और स्वतः जुताई की प्रकृति को निर्धारित करते हैं। 2. लाल और पीली मिट्टी का रंग फेरिक ऑक्साइड्स की उपस्थिति (लाल) और उसके जलयोजित रूप (पीला) के कारण होता है। 3. लैटेराइट मिट्टी भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में निक्षालन (Leaching) से बनती है और चाय, कॉफी व काजू के लिए उपयुक्त है। 4. लवणीय और क्षारीय (उसर/रेह) मिट्टी का विकास अधिक सिंचाई, जल-जमाव और शुष्क जलवायु के कारण सोडियम-कैल्शियम लवणों के केशिका आकर्षण से धरातल पर आने से होता है। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने भारतीय मृदा को 8 प्रमुख समूहों में विभाजित किया है।
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