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Geography
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पवन प्रणालियों, वायुमंडलीय आर्द्रता और चक्रवातों की गतिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 'नोरवेस्टर' (Nor'westers) या 'कालबासाखी' स्थानीय रूप से उत्पन्न होने वाली तीव्र संवहनी गरज के साथ चलने वाली वर्षाजनक तूफान हैं, जो विशेष रूप से ग्रीष्मकाल के अंत में पश्चिम बंगाल और असम में चाय, जूट और चावल की फसलों के लिए अत्यधिक लाभदायक होते हैं।
  2. 2. 'वाताग्र' (Fronts) उन संकीर्ण संपर्क क्षेत्रों को कहा जाता है जहाँ दो भिन्न स्वभाव वाली वायुराशियाँ (एक गर्म और दूसरी ठंडी) मिलती हैं, और केवल शीत वाताग्र (Cold Front) के गुजरने के बाद ही तापमान में अचानक वृद्धि और मौसम शांत हो जाता है।
  3. 3. 'निरपेक्ष आर्द्रता' (Absolute Humidity) दिए गए तापमान पर वायु के एक निश्चित आयतन में मौजूद जलवाष्प के वास्तविक भार को दर्शाती है, जिसे सामान्यतः ग्राम प्रति घन मीटर में व्यक्त किया जाता है और यह तापमान में परिवर्तन के साथ बदलती है।
  4. 4. उष्णकटिबंधीय चक्रवातों (Tropical Cyclones) के केंद्र में 'चक्रवात की आँख' (Eye of the Cyclone) स्थित होती है, जहाँ वायुदाब न्यूनतम, आसमान बिल्कुल साफ, हवाएँ शांत और तापमान उच्च होता है, जिसके बारे में विकिपीडिया संदर्भ में विस्तृत जानकारी दी गई है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: 'नोरवेस्टर' या 'कालबासाखी' पूर्वी भारत (विशेषकर पश्चिम बंगाल, असम और ओडिशा) में ग्रीष्मकाल के अंत में आने वाले विनाशकारी किंतु कृषि (जैसे चाय, जूट और चावल) के लिए उपयोगी स्थानीय तड़ित झंझा (Thunderstorms) हैं। कथन 2 गलत है: शीत वाताग्र (Cold Front) के गुजरने के बाद तापमान में अचानक भारी 'गिरावट' (ड्रॉप) आती है, न कि वृद्धि, और मौसम साफ होने से पहले भारी वर्षा और आंधी-तूफान आते हैं। कथन 3 सही है: निरपेक्ष आर्द्रता (Absolute Humidity) किसी निश्चित आयतन की वायु में उपस्थित जलवाष्प का वास्तविक द्रव्यमान या भार होती है, जो तापमान के व्युत्क्रमानुपाती नहीं बल्कि आयतन और वाष्पीकरण पर निर्भर करती है और तापमान बदलने पर वायु के प्रसार/संकुचन से प्रभावित होती है। कथन 4 सही है: उष्णकटिबंधीय चक्रवात का केंद्र 'आँख' (Eye) कहलाता है, जो शांत क्षेत्र होता है जहाँ न्यूनतम वायुदाब, साफ आकाश और अवरोही हवाएँ पाई जाती हैं। इस विषय की विस्तृत जानकारी विकिपीडिया संदर्भ पर उपलब्ध है।
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भारत की मृदा प्रणालियों और उनके स्थानिक वितरण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. लैटेराइट मृदा (Laterite Soil) का विकास उच्च तापमान और भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में तीव्र निक्षालन (Leaching) की प्रक्रिया के परिणामस्वरूप होता है, और इस मृदा में आयरन ऑक्साइड तथा एल्युमिनियम की अधिकता के कारण यह ईंट बनाने के लिए अत्यंत उपयुक्त होती है। 2. शुष्क एवं मरुस्थलीय मृदा (Arid Soil) का रंग हल्के भूरे से लाल रंग तक होता है, जिसमें घुलनशील लवणों और कैल्शियम कार्बोनेट की मात्रा अधिक होती है, तथा नीचे की परतों में 'कंकड़' (Kankar) की परत पाए जाने के कारण जल का अंतःस्यंदन (Infiltration) अवरुद्ध हो जाता है। 3. लाल और पीली मृदा (Red and Yellow Soil) का निर्माण दक्कन पठार के पूर्वी और दक्षिणी भागों में रवेदार आग्नेय चट्टानों के अपक्षय से होता है, जहाँ इसका पीला रंग फेरिक हाइड्रॉक्साइड की उपस्थिति को दर्शाता है जबकि लाल रंग क्रिस्टलीय रूप में आयरन ऑक्साइड की मौजूदगी के कारण होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? महासागरीय जलधाराओं (Ocean Currents) और उनकी विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 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