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Geography
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भारत की प्रमुख बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं और उनसे संबंधित झीलों या जलाशयों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 'गोविन्द सागर झील' (Gobind Sagar Lake) भाखड़ा नांगल परियोजना के अंतर्गत सतलुज नदी पर निर्मित एक कृत्रिम जलाशय है, जो भारत की सबसे बड़ी कृत्रिम झीलों में से एक है।
- 2. 'सरदार सरोवर परियोजना' नर्मदा नदी पर गुजरात में स्थित है, और इसके पीछे बने जलाशय का नाम 'गोविन्द बल्लभ पंत सागर' रखा गया है, जो मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित है।
- 3. 'नागार्जुन सागर परियोजना' कृष्णा नदी पर तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की सीमा पर स्थित है, जिसके जलाशय का उपयोग सिंचाई और जलविद्युत उत्पादन दोनों के लिए किया जाता है।
- 4. 'हीराकुंड बांध' महानदी पर ओडिशा में संबलपुर के पास बनाया गया दुनिया के सबसे लंबे मिट्टी के बांधों में से एक है, जिसके पीछे 'महाकाली जलाशय' का निर्माण हुआ है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि 'गोविन्द सागर झील' सतलुज नदी पर निर्मित भाखड़ा नांगल बाँध का जलाशय है, जो कि देश की प्रमुख कृत्रिम झीलों में शामिल है। कथन 2 गलत है क्योंकि सरदार सरोवर परियोजना के जलाशय का नाम 'नर्मदा सागर' या 'सरदार सरोवर जलाशय' है, जबकि 'गोविन्द बल्लभ पंत सागर' रिहंद परियोजना (उत्तर प्रदेश) का जलाशय है। कथन 3 सही है क्योंकि 'नागार्जुन सागर परियोजना' कृष्णा नदी पर आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की सीमा पर स्थित एक बहुउद्देशीय परियोजना है। कथन 4 गलत है क्योंकि हीराकुंड बाँध के पीछे बने कृत्रिम जलाशय का नाम 'हीराकुंड जलाशय' (या महानदी जलाशय) है, न कि महाकाली। बहुउद्देशीय परियोजनाओं और जल संसाधनों की विस्तृत जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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भारत की मृदा प्रणालियों और उनके वितरण तथा रासायनिक गुणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जलोढ़ मृदा (Alluvial Soils) देश के कुल क्षेत्रफल का सबसे बड़ा हिस्सा कवर करती है और यह मुख्य रूप से प्रायद्वीपीय भारत की नदी घाटियों और डेल्टाई क्षेत्रों तक ही सीमित है, जबकि थार मरुस्थल में इसका पूर्ण अभाव पाया जाता है।
2. काली मृदा (Black Soils), जिसे 'रेगुर मृदा' भी कहा जाता है, में नमी को लंबे समय तक धारण करने की उच्च क्षमता होती है और ग्रीष्मकाल में इसमें गहरी दरारें पड़ जाती हैं, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि इसकी 'स्वयं जुताई' (Self-ploughing) हो गई है।
3. लैटेराइट मृदा (Laterite Soils) अत्यधिक तापमान और भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में तीव्र निक्षालन (Leaching) के परिणामस्वरूप विकसित होती है, जिसमें सिलिका का निक्षालन हो जाता है और आयरन तथा एल्युमिनियम के ऑक्साइड शेष रह जाते हैं, जिससे यह चाय, कॉफी और काजू की खेती के लिए अत्यंत उपयुक्त बनती है।
4. लाल और पीली मृदा (Red and Yellow Soils) का रंग मुख्य रूप से रूपांतरित चट्टानों में लौह धातु के व्यापक प्रसार के कारण लाल होता है, और जलयोजन (Hydration) के बाद यह पीले रंग में परिवर्तित हो जाती है, जो कि दक्कन के पठार के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में बहुतायत में पाई जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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भारत के खनिज और ऊर्जा संसाधनों की भू-गर्भीय संरचना और उनके वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में पाया जाने वाला 98% से अधिक कोयला 'गोंडवाना काल' की अवसादी चट्टानों से प्राप्त होता है, जो मुख्य रूप से दामोदर, महानदी, सोन और गोदावरी नदी घाटियों की द्रोणियों में संकेंद्रित है और यह उच्च ऐश (Ash) सामग्री तथा निम्न सल्फर युक्त बिटुमिनस प्रकार का होता है।
2. 'बॉम्बे हाई' (Mumbai High) भारत का सबसे बड़ा अपतटीय (Offshore) पेट्रोलियम क्षेत्र है, जो खंभात की खाड़ी के शेल्फ क्षेत्र में स्थित है और यहाँ पेट्रोलियम का मुख्य उत्पादन टर्शरी युग की माइकोसीन संरचनाओं से होता है।
3. भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए आवश्यक थोरियम का सबसे बड़ा भंडार केरल, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों की 'मोनाज़ाइट बालू' (Monazite Sand) में पाया जाता है, जो इल्मेनाइट, रुटाइल और जिरकोन के साथ मिश्रित रूप में मिलता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में लिग्नाइट (भूरा कोयला) का सबसे बड़ा भंडार तमिलनाडु के 'नेवेली' क्षेत्र में स्थित है, जबकि राजस्थान, गुजरात और जम्मू-कश्मीर के पैंथर्स बेसिन में भी इसके छोटे भंडार पाए जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पृथ्वी के प्रमुख भू-आकृतिक स्वरूपों (पर्वत, पठार, मैदान और मरुस्थल) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'तिब्बत का पठार' (Tibetan Plateau) एक अंतःपर्वतीय पठार (Intermontane Plateau) का सर्वोच्च और सबसे विस्तृत उदाहरण है, जिसका निर्माण भारतीय प्लेट और यूरेशियाई प्लेट के अभिसरण के परिणामस्वरूप विवर्तनिक उत्थान से हुआ है।
2. 'ग्रेट बेसिन मरुस्थल' (Great Basin Desert) संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थित एक उष्णकटिबंधीय मरुस्थल है, जिसकी उत्पत्ति महाद्वीपीयता और अटाकामा ठंडी जलधारा के प्रभाव के कारण हुई है।
3. 'हंगरी का मैदान' (Pannonian Basin / Hungarian Plain) अंतरापर्वतीय प्रकार के मैदान का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो चारों ओर से पर्वतों से घिरा हुआ है और मुख्य रूप से डेन्यूब तथा उसकी सहायक नदियों के निक्षेपण से निर्मित हुआ है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'ब्लैक फॉरेस्ट' (Black Forest) पर्वत जर्मनी में स्थित एक 'ब्लॉक पर्वत' (Block Mountain) या भ्रंशोत्थ पर्वत का प्रमुख उदाहरण है, जिसका निर्माण विवर्तनिक बलों के कारण धरातल के धंसने या उठने (Faulting) से हुआ है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत की भौगोलिक अवस्थिति, अक्षांश-देशांतर विस्तार और समय क्षेत्र (Time Zone) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत की मुख्य भूमि का विस्तार 8°4' उत्तर से 37°6' उत्तर अक्षांशों के बीच है, और इसका देशांतरीय विस्तार 68°7' पूर्व से 97°25' पूर्व देशांतर के मध्य है, जिसके परिणामस्वरूप देश के अक्षांश और देशांतर दोनों का कुल विस्तार लगभग 30° का बनता है।
2. भारत का मानक समय (IST) 82°30' पूर्वी देशांतर रेखा पर आधारित है, जो ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) से 5 घंटे 30 मिनट आगे है और यह रेखा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश कुल पाँच राज्यों से होकर गुजरती है।
3. कर्क रेखा (23°30' उत्तर अक्षांश) भारत के लगभग मध्य से गुजरती है और देश के आठ राज्यों—गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और मिजोरम से होकर निकलती है, तथा माही नदी इस रेखा को दो बार काटती है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार देशांतरीय विस्तार के लगभग 30° के अंतर के कारण देश के सबसे पूर्वी छोर (अरुणाचल प्रदेश के किबिथु) और सबसे पश्चिमी छोर (गुजरात के गुहार मोती) के स्थानीय समय में लगभग 2 घंटे (1 घंटा 57 मिनट) का वास्तविक समयान्तर पाया जाता है, जबकि पूरे देश में एक ही मानक समय लागू होने के कारण अरुणाचल प्रदेश में सूर्योदय और सूर्यास्त गुजरात की तुलना में लगभग दो घंटे पहले होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्पत्ति और भारत में वर्षा के स्थानिक वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ग्रीष्मकाल में तिब्बत के पठार का अत्यधिक गर्म होना और वहाँ तीव्र तापीय निम्न वायुदाब (Thermal Low) का विकसित होना दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्पत्ति के लिए उत्तरदायी 'डायनेमिक' कारकों में सबसे प्रमुख चालक माना जाता है।
2. 'अल नीनो' (El Nino) घटना के दौरान प्रशांत महासागर के पूर्वी हिस्से में तापमान की वृद्धि और पेरू तट पर गर्म जलधारा के प्रकट होने से दक्षिण अमेरिकी तट पर उच्च वायुदाब बनता है, जिससे भारतीय उपमहाद्वीप पर मानसून की हवाएँ मजबूत होती हैं और अत्यधिक वर्षा होती है।
3. 'मैकमानून विक्षोभ' या पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) सर्दियों के मौसम में भूमध्य सागर से उठने वाली शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात प्रणालियाँ हैं, जो जेट स्ट्रीम के सहारे भारत के उत्तर-पश्चिम भागों में पहुँचकर रबी फसलों के लिए वर्षा लाती हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में मानसूनी वर्षा का स्थानिक वितरण उच्चावच और भौगोलिक अवरोधों पर निर्भर करता है, जिसके कारण पश्चिमी घाट के पवन-मुख ढाल पर भारी वर्षा होती है, जबकि वृष्टिछाया क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले दक्कन के पठार का आंतरिक हिस्सा शुष्क रह जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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