BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Geography
11 views

महासागरीय उच्चावच, ज्वार-भाटा और प्रमुख जलसंधियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. महासागरीय मग्नतट (Continental Shelf) महाद्वीपों का डूबा हुआ विस्तारित भाग होता है, जिसकी औसत प्रवणता अत्यंत कम होती है और यह क्षेत्र विश्व के सबसे समृद्ध मतस्यन (Fishing) क्षेत्रों के रूप में जाने जाते हैं।
  2. 2. 'दैनिक ज्वार' (Diurnal Tide) वह ज्वार है जो किसी स्थान पर 24 घंटे और 52 मिनट की अवधि में एक बार आता है, जिसमें एक उच्च ज्वार और एक निम्न ज्वार शामिल होता है, और यह स्थिति पृथ्वी के अपकेंद्रीय बल तथा चंद्रमा के खिंचाव के कारण उत्पन्न होती है।
  3. 3. 'मलक्का जलसंधि' (Strait of Malacca) हिंद महासागर को प्रशांत महासागर से जोड़ती है और यह सुमात्रा द्वीप (इंडोनेशिया) तथा मलय प्रायद्वीप के बीच स्थित विश्व की सबसे लंबी जलसंधियों में से एक है।
  4. 4. 'जिब्राल्टर जलसंधि' (Strait of Gibraltar), जिसे 'भूमध्यसागर की कुंजी' कहा जाता है, अटलांटिक महासागर को भूमध्यसागर से जोड़ती है और यूरोप में स्पेन को अफ्रीका में मोरक्को से अलग करती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। महासागरीय मग्नतट महाद्वीपों का सीमांत भाग है जो उथले समुद्र से ढका होता है और यहाँ फाइटोप्लवकटन की प्रचुरता के कारण प्रमुख मछली पकड़ने के केंद्र (जैसे डागर बैंक) पाए जाते हैं। दैनिक ज्वार पृथ्वी के घूर्णन और चंद्रमा की स्थिति के कारण 24 घंटे 52 मिनट में एक बार आते हैं। मलक्का जलसंधि हिंद महासागर को दक्षिण चीन सागर (प्रशांत महासागर) से जोड़ती है और भूमध्यसागर की कुंजी कही जाने वाली जिब्राल्टर जलसंधि अटलांटिक और भूमध्यसागर को मिलाती है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
Share:

Related Questions

पृथ्वी के प्रमुख पर्वत, पठार, मैदान और मरुस्थल की भू-आकृतिक उत्पत्ति तथा उनकी विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'अंतरपर्वतीय पठार' (Intermontane Plateau) वे पठार होते हैं जो चारों तरफ से या कम से कम दो तरफ से ऊँची पर्वत श्रेणियों से घिरे होते हैं, जैसे कि तिब्बत का पठार और बोलीविया का पठार, जो विवर्तनिक ताकतों और संपीडन बलों के परिणाम हैं। 2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'कोलोरैडो का पठार' (Colorado Plateau) एक विदीर्ण या आच्छादित पठार का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसका निर्माण मुख्य रूप से नदी अपरदन और बहिर्जात बलों के कारण होता है, न कि अंतर्जात विवर्तनिक हलचलों से। 3. 'ग्रेट बेसिन मरुस्थल' (Great Basin Desert) संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थित एक 'वर्षाछाया मरुस्थल' (Rain-shadow Desert) है, जो सिएरा नेवादा पर्वत श्रृंखला के वृष्टिछाया क्षेत्र में स्थित होने के कारण शीतकालीन शुष्क दशाओं का अनुभव करता है। 4. 'सहारा मरुस्थल' और 'आटाकामा मरुस्थल' दोनों ही उष्णकटिबंधीय उपोष्णकटिबंधीय महाद्वीपीय मरुस्थल हैं, जिनमें आटाकामा दुनिया का सबसे शुष्क मरुस्थल है जो प्रशांत महासागर की गर्म जलधारा के तटीय समानांतर बहने के कारण अत्यधिक शुष्कता प्राप्त करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भारत के प्रमुख औद्योगिक गलियारों, समर्पित माल ढुलाई गलियारों (DFCs) और अंतर्देशीय जलमार्गों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा' (DMIC) परियोजना 'पूर्वी समर्पित माल गलियारे' (EDFC) के समानांतर विकसित की जा रही है, जिसका उद्देश्य इस क्षेत्र को वैश्विक विनिर्माण, निवेश केंद्र और स्मार्ट शहरों के रूप में विकसित करना है। 2. राष्ट्रीय जलमार्ग-2 (NW-2) ब्रह्मपुत्र नदी पर सदिया से धुबरी तक स्थित है, जो पूर्वोत्तर क्षेत्र में अंतर्देशीय जल परिवहन के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण जलमार्ग है। 3. 'पश्चिमी समर्पित माल गलियारा' (WDFC) दादरी (उत्तर प्रदेश) से शुरू होकर जवाहरलाल नेहरू पोर्ट (JNPT), नवी मुंबई तक लगभग 1,500 किलोमीटर की लंबाई में फैला हुआ है। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (NW-1) हल्दिया से प्रयागराज तक गंगा-भागीरथी-हूगली नदी प्रणाली पर स्थित देश का सबसे लंबा अंतर्देशीय जलमार्ग है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भारत के अपवाह तंत्र (Drainage System) के संदर्भ में, हिमालयी और प्रायद्वीपीय नदियों की विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हिमालयी नदियाँ पूर्ववर्ती (Antecedent) अपवाह का उदाहरण प्रस्तुत करती हैं, जिसका अर्थ है कि वे हिमालय के उत्थान से पहले भी प्रवाहित होती थीं और उन्होंने उत्थान के क्रम में गहरी गार्ज (Gorges) का निर्माण करते हुए अपने मार्ग को बनाए रखा। 2. प्रायद्वीपीय नदियाँ मुख्य रूप से अनुवर्ती (Consecquent) और परिपक्व (Mature) अवस्था में हैं, जिनके मार्ग निश्चित और अपरिवर्तनीय हैं, और ये नदियाँ अपने बेसिन में अत्यधिक विसर्पण (Meandering) करती हैं क्योंकि इनके विहित ढाल बहुत तीव्र होते हैं। 3. सिंधु नदी तंत्र की प्रमुख सहायक नदी 'सतलज' और ब्रह्मपुत्र नदी दोनों ही तिब्बत के मानसरोवर झील के निकट से निकलती हैं, जो ट्रांस-हिमालयी पूर्ववर्ती नदियों के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार गोदावरी नदी प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदी है, जिसे 'दक्षिण गंगा' या 'वृद्ध गंगा' भी कहा जाता है, और इसका अपवाह तंत्र महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा राज्यों तक फैला हुआ है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भारत के खनिज और ऊर्जा संसाधनों के वितरण, उनकी भूगर्भीय विशेषताओं और निष्कर्षण क्षेत्रों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत के कुल कोयला भंडारों का लगभग 98 प्रतिशत भाग गोंडवाना क्रम की चट्टानों से प्राप्त होता है, जो मुख्य रूप से कार्बन की उच्च मात्रा और कम राख (Ash) सामग्री के कारण उच्च कोटि का बिटुमिनस कोयला प्रदान करता है, जबकि टर्शरी कालीन कोयला मुख्य रूप से असम, अरुणाचल प्रदेश और मेघालय जैसे उत्तर-पूर्वी राज्यों में मिलता है जो उच्च गंधक (High Sulphur) युक्त होता है। 2. 'बॉम्बे हाई' (Mumbai High) अपतटीय पेट्रोलियम क्षेत्र खंभात बेसिन के अंतर्गत अरब सागर के महाद्वीपीय शेल्फ पर स्थित है, जहाँ पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के मुख्य भंडार 'मायोसीन' (Miocene) युग की चूना पत्थर संरचनाओं में संकेंद्रित हैं। 3. भारत में परमाणु ऊर्जा कार्यक्रमों के लिए आवश्यक 'यूरेनियम' का उत्पादन झारखंड के जादूगोड़ा के अतिरिक्त आंध्र प्रदेश के तुम्मलापल्ली क्षेत्र से भी बड़े पैमाने पर किया जाता है, जहाँ डोलोमाइट और कार्बोनेट चट्टानों में यूरेनियम के विशाल भंडार खोजे गए हैं। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में देश का पहला कोयला खनन कार्य वर्ष 1774 में दामोदर घाटी क्षेत्र में रानीगंज (पश्चिम बंगाल) में ईस्ट इंडिया कंपनी के शासनकाल में शुरू किया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भारतीय मृदाओं की तापीय, रासायनिक विशेषताओं और उनके प्रादेशिक वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. लाल और पीली मृदा का विकास मुख्य रूप से प्राचीन रवेदार और रूपांतरित आग्नेय चट्टानों पर कम वर्षा वाले क्षेत्रों में होता है, जिसमें फेरिक ऑक्साइड की व्यापक उपस्थिति के कारण इसका रंग लाल होता है, जबकि जलयोजन (Hydration) की प्रक्रिया के बाद यह पीले रंग में परिवर्तित हो जाती है। 2. 'उसर', 'रेह' या 'कल्लर' के नाम से जानी जाने वाली लवणीय और क्षारीय मृदाओं में सोडियम, मैग्नीशियम और कैल्शियम के लवणों की अधिकता होती है, और इनका निर्माण मुख्य रूप से उन क्षेत्रों में होता है जहाँ नहरों के अत्यधिक उपयोग और दोषपूर्ण जल-निकासी के कारण केशिका क्रिया (Capillary Action) द्वारा लवण भू-सतह पर जमा हो जाते हैं। 3. पीटमय और दलदली मृदाएँ (Peaty and Marshy Soils) विशेष रूप से केरल के कोट्टायम और अलप्पुषा जिलों में 'कारी' (Kari) के रूप में पाई जाती हैं, जो उच्च आर्द्रता वाले क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर मृत कार्बनिक पदार्थों के संचय से बनती हैं और मानसून के दौरान जलमग्न होने पर इनमें धान की खेती की जाती है। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार लैटेराइट मृदा का सर्वाधिक विस्तार भारत में केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु के पहाड़ी ढलानों पर पाया जाता है, जो उच्च तापमान और तीव्र निक्षालन (Leaching) के कारण चाय, कॉफी और काजू जैसी बागानी फसलों के लिए अत्यधिक उपयुक्त होती हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.