त्वरित लिंक्स
Geography
9 views
भारत की जनगणना 2011 के आँकड़ों, जनसंख्या वितरण और बी.एस. गुहा (B.S. Guha) के मानवशास्त्रीय वर्गीकरण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. बी.एस. गुहा के वर्गीकरण के अनुसार, 'नॉर्डिक' (Nordic) मानव जाति भारत में प्रवेश करने वाली सबसे अंतिम जातियों में से एक थी, जो वर्तमान में मुख्य रूप से उत्तर-पश्चिमी भारत और उच्च जातियों के बीच अधिक पाई जाती है।
- 2. 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत की कुल जनसंख्या में अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribes) का सबसे अधिक प्रतिशत मिजोरम राज्य में दर्ज किया गया है, जबकि कुल संख्या के आधार पर मध्य प्रदेश में सर्वाधिक आदिवासी आबादी निवास करती है।
- 3. भारत की कुल जनसंख्या में 'मुख्य श्रमिकों' (Main Workers) और 'सीमांत श्रमिकों' (Marginal Workers) के वर्गीकरण के संदर्भ में, वे श्रमिक जिन्होंने संदर्भ वर्ष के दौरान 183 दिन या उससे अधिक दिनों के लिए रोजगार प्राप्त किया है, उन्हें 'सीमांत श्रमिक' कहा जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: बी.एस. गुहा के भारतीय मानवजाति के वर्गीकरण के अनुसार, 'नॉर्डिक' (Nordic) या इंडो-आर्यन समूह भारत में आने वाली सबसे बाद की प्रमुख जातियों में से एक था, जो मुख्य रूप से उत्तर भारत में केंद्रित है। कथन 2 सही है: 2011 की जनगणना के अनुसार, प्रतिशत के आधार पर मिजोरम राज्य में अनुसूचित जनजातियों (ST) का अनुपात सबसे अधिक (~94.4%) है, जबकि कुल जनसंख्या की दृष्टि से मध्य प्रदेश में सबसे अधिक अनुसूचित जनजाति के लोग रहते हैं। कथन 3 गलत है: 2011 की जनगणना के अनुसार, वे श्रमिक जिन्होंने वर्ष में 183 दिन या उससे अधिक (या 6 महीने से अधिक) काम किया है, उन्हें 'मुख्य श्रमिक' (Main Workers) कहा जाता है, जबकि 183 दिन से कम काम करने वालों को 'सीमांत श्रमिक' (Marginal Workers) कहा जाता है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
→
पृथ्वी के वायुमंडल में पवन प्रणालियों, आर्द्रता, वर्षा के प्रकार और चक्रवातों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. व्यापारिक पवनें (Trade Winds) दोनों गोलार्धों में उपोष्ण उच्च वायुदाब पेटियों से विषुवतीय निम्न वायुदाब पेटी (डोलड्रम) की ओर प्रवाहित होती हैं, और पृथ्वी के घूर्णन के कारण कोरियोलिस बल के प्रभाव से उत्तरी गोलार्ध में ये उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर विक्षेपित हो जाती हैं।
2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार निरपेक्ष आर्द्रता (Absolute Humidity) वायु के प्रति इकाई आयतन में मौजूद जलवाष्प के द्रव्यमान को दर्शाती है, जबकि तापमान में परिवर्तन होने पर इसकी मात्रा में प्रत्यक्ष बदलाव होता है।
3. संवहनकारी वर्षा (Convectional Rainfall) मुख्य रूप से विषुवतीय प्रदेशों में प्रतिदिन दोपहर के बाद होने वाली मूसलाधार वर्षा है, जो तीव्र गर्म हवा के ऊपर उठने, ठंडी होने और संतृप्त होने के कारण क-कपासी बादलों (Cumulonimbus clouds) के निर्माण से होती है।
4. उष्णकटिबंधीय चक्रवात (Tropical Cyclones) केवल महासागरों के ऊपर 27°C से अधिक सतही तापमान वाले क्षेत्रों में उत्पन्न होते हैं, और भूमध्य रेखा के बहुत समीप (5° उत्तर से 5° दक्षिण अक्षांश के बीच) कोरियोलिस बल के शून्य होने के कारण ये सर्वाधिक शक्तिशाली और प्रचुर मात्रा में विकसित होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
भारत के प्रमुख उद्योगों, औद्योगिक प्रदेशों और परिवहन अवसंरचना (रेल, राष्ट्रीय राजमार्ग और जलमार्ग) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'छोटा नागपुर औद्योगिक प्रदेश' भारत के खनिज-समृद्ध पठारी क्षेत्र में स्थित है, जहाँ लोहा और इस्पात, भारी इंजीनियरिंग, तांबा और सीमेंट उद्योगों का संकेंद्रण पाया जाता है, और इस क्षेत्र के तीव्र औद्योगीकरण का मुख्य आधार यहाँ प्रचुर मात्रा में उपलब्ध कोयला, लौह अयस्क और अभ्रक जैसे खनिज भंडार हैं।
2. भारत का राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क लंबाई की दृष्टि से अमेरिका के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क है, और वर्तमान में देश का सबसे लंबा राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-44 (NH-44) है, जो उत्तर में श्रीनगर से शुरू होकर दक्षिण में कन्याकुमारी तक जाता है।
3. कोंकण रेलवे (Konkan Railway) परियोजना भारतीय रेल इंजीनियरिंग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो महाराष्ट्र के रोहा से शुरू होकर गोवा होते हुए कर्नाटक के मंगलुरु तक कुल लगभग 741 किलोमीटर की लंबाई में पश्चिमी घाट की कठिन पहाड़ियों और सुरंगों से गुजरती है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या-4 (NW-4) कृष्णा और गोदावरी नदियों के कुछ हिस्सों के साथ-साथ काकीनाडा से पुडुचेरी तक फैली नहर प्रणाली पर स्थित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
भारत के प्रमुख पर्वतीय दरों (Mountain Passes) और उनकी भौगोलिक अवस्थिति के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. ज़ोजी ला (Zoji La) - यह दर्रा जांसकर श्रेणी में स्थित है, जो श्रीनगर को लेह से सड़क मार्ग द्वारा जोड़ता है और सिंधु नदी द्वारा निर्मित है।
2. शिपकी ला (Shipki La) - यह दर्रा हिमाचल प्रदेश में सतलुज नदी घाटी के पास स्थित है, जो भारत को तिब्बत (चीन) से जोड़ता है और यह भारत-चीन व्यापार के लिए एक प्रमुख सीमा चौकी है।
3. नीति दर्रा (Niti Pass) - यह दर्रा उत्तराखंड को तिब्बत से जोड़ता है, जो ग्रेटर हिमालयी क्षेत्र में स्थित है और मानसरोवर व कैलाश यात्रा के लिए उपयोग किया जाता है।
4. बोमडिला (Bomdi La) - यह दर्रा अरुणाचल प्रदेश में महान हिमालय के पूर्वी छोर पर स्थित है, जो तवांग को ल्हासा से जोड़ता है।
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
→
महासागरीय जलधाराओं और उनके विशिष्ट प्रभावों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'प्रति विषुवतीय जलधारा' (Counter Equatorial Current) विषुवत रेखा के निकट पश्चिम से पूर्व की ओर प्रवाहित होती है, जो उत्तर और दक्षिण विषुवतीय धाराओं के विपरीत दिशा में बहती है।
2. 'मोाम्बिक जलधारा' (Mozambique Current) हिंद महासागर की एक ठंडी जलधारा है, जो अफ्रीका के पूर्वी तट और मेडागास्कर के बीच दक्षिण दिशा में प्रवाहित होती है।
3. 'पश्चिमी ऑस्ट्रेलियाई जलधारा' (West Australian Current) हिंद महासागर की एक ठंडी जलधारा है, जिसके प्रभाव से ऑस्ट्रेलिया के पश्चिमी तट पर शुष्क और मरुस्थलीय दशाओं का निर्माण होता है।
4. 'ओखोत्स्क जलधारा' या 'कुरील जलधारा' के मिलने से जापान के तटों पर मत्स्यन के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनती हैं क्योंकि वहाँ गर्म और ठंडी धाराओं का मिलन होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
भारत की मृदा प्रणालियों, उनके वर्गीकरण और विशिष्ट रासायनिक-भौतिक गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लाल और पीला मृदा का विकास मुख्य रूप से क्रिस्टलीय और रूपांतरित आग्नेय चट्टानों पर लौह ऑक्साइड के व्यापक विसरण के कारण होता है, जहाँ इसका पीला रंग इसमें जल-योजित (Hydrated) आयरन ऑक्साइड की उपस्थिति को प्रदर्शित करता है।
2. लैटेराइट मृदा का निर्माण उच्च तापमान और अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में तीव्र निक्षालन (Leaching) की प्रक्रिया के फलस्वरूप होता है, जिसमें सिलिका का निक्षालन हो जाता है तथा आयरन ऑक्साइड और एल्युमिनियम के यौगिक शेष बच जाते हैं, जिससे यह चाय, कॉफी और काजू की बागानी कृषि के लिए उपयुक्त बनती है।
3. 'ऊसर', 'कल्लर' या 'रेर' के रूप में पहचानी जाने वाली लवणीय और क्षारीय मृदाओं में सोडियम, मैग्नीशियम और कैल्सियम के लवणों की प्रचुरता होती है, और ये मृदाएँ प्राकृतिक रूप से शुष्क जलवायु और जल निकासी की गंभीर समस्या वाले क्षेत्रों में विकसित होती हैं।
4. पीटमय और दलदली मृदाएँ (Peaty and Marshy Soils) भारी वर्षा और उच्च आर्द्रता वाले क्षेत्रों में मृत कार्बनिक पदार्थों के भारी संचय से बनती हैं, जिनमें ह्यूमस की मात्रा 40 से 50 प्रतिशत तक हो सकती है, लेकिन ये अत्यधिक क्षारीय प्रकृति की होती हैं और इनमें कृषि बिल्कुल संभव नहीं होती।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.