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Geography
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महासागरीय उच्चावच, ज्वार-भाटीय गतिकी और प्रमुख जलसंधियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. महासागरीय नितल का 'महाद्वीपीय मग्नतट' (Continental Shelf) महाद्वीपों का डूबा हुआ सीमांत भाग होता है, जिसकी औसत ढाल अत्यंत मंद (लगभग 1° या उससे कम) होती है और यह क्षेत्र पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस तथा विश्व के प्रमुख मतस्यन क्षेत्रों के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
  2. 2. 'अपोजी' (Apogee) वह खगोलीय स्थिति है जब चंद्रमा अपनी कक्षा में पृथ्वी के सबसे निकट होता है, जिसके कारण इस अवधि में सामान्य से बहुत ऊँचे 'दीर्घ ज्वार' (Spring Tide) आते हैं।
  3. 3. 'बैरिंग जलसंधि' (Bering Strait) आर्कटिक महासागर को प्रशांत महासागर के बेरिंग सागर से जोड़ती है और यह एशिया महासागर के साइबेरिया क्षेत्र को उत्तरी अमेरिका के अलास्का से अलग करती है, तथा इसी जलसंधि से होकर अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा गुजरती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि महासागरीय मग्नतट (Continental Shelf) महाद्वीपों का ही डूबा हुआ विस्तृत भाग होता है, जिसकी ढाल बहुत मंद होती है। यहाँ सूर्य का प्रकाश आसानी से पहुँचने के कारण पादपप्लवक (Phytoplankton) प्रचुर मात्रा में पनपते हैं, जो मछलियों का मुख्य भोजन हैं, जिससे यह क्षेत्र विश्व के सबसे बड़े मत्स्यन क्षेत्रों के रूप में विकसित हुए हैं। इसके अलावा, यहीं खनिज तेल और प्राकृतिक गैस के विशाल भंडार भी पाए जाते हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि जब चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है, तो उस स्थिति को 'उपभू' (Perigee) कहा जाता है, जिसके कारण अत्यधिक ऊँचे ज्वार आते हैं; जबकि 'अपोजी' (Apogee) वह स्थिति है जब चंद्रमा पृथ्वी से अपनी अधिकतम दूरी पर होता है, जिसमें अपेक्षाकृत कमजोर ज्वार आते हैं। कथन 3 बिल्कुल सही है, बेरिंग जलडमरूमध्य प्रशांत महासागर के बेरिंग सागर को आर्कटिक महासागर के चुकची सागर से जोड़ती है और यह एशिया (रूस) तथा उत्तरी अमेरिका (अलास्का) को अलग करती है। साथ ही, अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा इसी जलसंधि के मध्य से होकर गुजरती है।
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भूकंप, ज्वालामुखी और सुनामी की प्रक्रियाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भूकंपीय तरंगों में 'प्राथमिक तरंगें' (P-waves) अनुदैर्ध्य तरंगें होती हैं जो ठोस, तरल और गैस तीनों माध्यमों से गुजर सकती हैं, जबकि 'द्वितीयक तरंगें' (S-waves) अनुप्रस्थ तरंगें होती हैं और ये केवल ठोस माध्यम में ही गति करती हैं, जिसके कारण S-waves की छाया क्षेत्र (Shadow Zone) P-waves के छाया क्षेत्र की तुलना में बहुत बड़ा होता है। 2. 'सुनामी' (Tsunami) लहरें गहरे महासागरों में अत्यधिक उच्च तरंग दैर्ध्य (Wavelength) और कम ऊँचाई के कारण जहाजों को महसूस नहीं होती हैं, किंतु तटीय उथले क्षेत्रों में पहुँचने पर जल की गहराई कम होने के कारण इनकी तरंग दैर्ध्य और गति कम हो जाती है तथा इनकी ऊँचाई अत्यधिक बढ़ जाती है। 3. 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