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Geography
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पृथ्वी की वायुमंडलीय प्रणालियों, पवन प्रणालियों और चक्रवातों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. ट्रोपोस्फेयर (क्षोभमंडल) में दाब प्रवणता बल (Pressure Gradient Force) और कोरियोलिस बल (Coriolis Force) के संतुलन से उत्पन्न होने वाली 'भू-विक्षेपी पवन' (Geostrophic Wind) समदाब रेखाओं (Isobars) के समानांतर प्रवाहित होती है।
- 2. उष्णकटिबंधीय चक्रवातों (Tropical Cyclones) के विपरीत, शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवातों (Temperate Cyclones) की उत्पत्ति केवल महासागरीय सतहों पर होती है और इनमें 'वाताग्र' (Fronts) का पूर्ण अभाव होता है।
- 3. वायुमंडल की 'सापेक्ष आर्द्रता' (Relative Humidity) तापमान में वृद्धि के साथ बढ़ती है, बशर्ते हवा में जलवाष्प की वास्तविक मात्रा स्थिर रहे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: जब समदाब रेखाएँ सीधी होती हैं और घर्षण नगण्य होता है, तो दाब प्रवणता बल और कोरियोलिस बल एक-दूसरे के विपरीत और संतुलित हो जाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप उत्पन्न होने वाली 'भू-विक्षेपी पवन' समदाब रेखाओं के बिल्कुल समानांतर बहती है। कथन 2 गलत है क्योंकि शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवातों की उत्पत्ति स्थल और जल दोनों पर होती है और ये अनिवार्य रूप से विभिन्न तापमान वाले वायुराशियों के मिलने से बने 'वाताग्र' (Fronts) के कारण उत्पन्न होते हैं, जबकि उष्णकटिबंधीय चक्रवातों में वाताग्र नहीं पाए जाते। कथन 3 गलत है क्योंकि तापमान बढ़ने पर वायु की नमी धारण करने की क्षमता (संतृप्ति वाष्प दाब) बढ़ती है, जिससे यदि जलवाष्प की वास्तविक मात्रा स्थिर रहे, तो सापेक्ष आर्द्रता घट जाती है। अधिक जानने के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
Related Questions
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पृथ्वी की आंतरिक संरचना, चट्टानों के प्रकार और उनके निर्माण की प्रक्रियाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आग्नेय चट्टानें (Igneous Rocks) पृथ्वी के आंतरिक भाग से पिघले हुए मैग्मा के ठंडे होने और जमने से बनती हैं, तथा ग्रेनाइट, बेसाल्ट, गैब्रियो और पेग्माटाइट इसी श्रेणी के प्रमुख उदाहरण हैं, जिनमें जीवाश्म (Fossils) पूरी तरह अनुपस्थित होते हैं।
2. अवसादी चट्टानें (Sedimentary Rocks) परतदार होती हैं, जिनका निर्माण विभिन्न एजेंटों द्वारा लाए गए अवसादों के निक्षेपण और संपीड़न से होता है, तथा 'शेल', 'बलुआ पत्थर' (Sandstone), और 'चूना पत्थर' इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
3. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार रूपांतरित चट्टानें (Metamorphic Rocks) अत्यधिक ताप, दाब या रासायनिक द्रول के प्रभाव से अपनी मूल आग्नेय या अवसादी संरचना में परिवर्तन के फलस्वरुप बनती हैं, जैसे चूना पत्थर का संगमरमर (Marble) में और बलुआ पत्थर का क्वार्ट्ज़ाइट (Quartzite) में परिवर्तित होना।
4. पृथ्वी की भूपर्पटी (Crust) में सबसे प्रचुर मात्रा में पाई जाने वाली धातु 'सिलिकॉन' है, जबकि संपूर्ण पृथ्वी के क्रोर (Core) का निर्माण मुख्य रूप से सिलिका और एल्युमिनियम (Sial) से हुआ है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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महासागरीय जलधाराओं (Ocean Currents) की उत्पत्ति, गतिकी और उनके प्रभावों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'उत्तरी अटलांटिक प्रवाह' (North Atlantic Drift) गल्फ स्ट्रीम का ही आगे का विस्तार है, जो पश्चिमी यूरोप के तटीय बंदरगाहों को सर्दियों में भी बर्फ-मुक्त (Ice-free) बनाए रखने में मदद करता है।
2. 'पश्चिमी ऑस्ट्रियाई जलधारा' (West Australian Current) हिंद महासागर की एक गर्म जलधारा है, जो ऑस्ट्रेलिया के पश्चिमी तट के साथ उत्तर से दक्षिण की ओर प्रवाहित होती है।
3. 'कैनरी जलधारा' (Canary Current) उत्तर अटलांटिक महासागर की एक ठंडी जलधारा है, जो अफ्रीकी महाद्वीप के उत्तर-पश्चिमी तट के सहारे दक्षिण की ओर बहती है और सहारा मरुस्थल के तटीय जलवायु को प्रभावित करती है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'सुशिमा जलधारा' (Tsushima Current) Kuroshio Current की एक शाखा है जो जापान सागर के पूर्वी भाग में उत्तर की ओर प्रवाहित होती है और यह एक गर्म जलधारा है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पृथ्वी की आंतरिक संरचना, असंबद्धता (Discontinuities) और शैलों के कायांतरण (Metamorphism) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कॉनराड असंबद्धता (Conrad Discontinuity) ऊपरी क्रस्ट (Upper Crust) और निचली क्रस्ट (Lower Crust) के बीच स्थित होती है, जबकि मोहरोविकिक असंबद्धता (Mohorovičić Discontinuity) क्रस्ट और मेंटल के बीच की सीमा का निर्धारण करती है।
2. आग्नेय शैलों (Igneous Rocks) में जीवाश्म (Fossils) पूरी तरह से अनुपस्थित होते हैं क्योंकि इनका निर्माण तप्त मैग्मा या लावा के ठंडा होकर जमने से होता है, जिसके अत्यधिक उच्च तापमान के कारण जैविक अवशेष नष्ट हो जाते हैं।
3. कायांतरण (Metamorphism) की प्रक्रिया के दौरान चूना पत्थर (Limestone) का कायांतरण होकर 'क्वार्ट्जाइट' (Quartzite) का निर्माण होता है, जबकि बलुआ पत्थर (Sandstone) के कायांतरण से 'संगमरमर' (Marble) बनता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार पृथ्वी के क्रोड (Core) का मुख्य हिस्सा निकल (Nickel) और लोहे (Iron) से बना है, जिसे 'निफे' (Nife) परत कहा जाता है, और यह पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) की उत्पत्ति में प्रमुख भूमिका निभाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत के खनिज और ऊर्जा संसाधनों की भू-गर्भीय संरचना और उनके वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में पाया जाने वाला 98% से अधिक कोयला 'गोंडवाना काल' की अवसादी चट्टानों से प्राप्त होता है, जो मुख्य रूप से दामोदर, महानदी, सोन और गोदावरी नदी घाटियों की द्रोणियों में संकेंद्रित है और यह उच्च ऐश (Ash) सामग्री तथा निम्न सल्फर युक्त बिटुमिनस प्रकार का होता है।
2. 'बॉम्बे हाई' (Mumbai High) भारत का सबसे बड़ा अपतटीय (Offshore) पेट्रोलियम क्षेत्र है, जो खंभात की खाड़ी के शेल्फ क्षेत्र में स्थित है और यहाँ पेट्रोलियम का मुख्य उत्पादन टर्शरी युग की माइकोसीन संरचनाओं से होता है।
3. भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए आवश्यक थोरियम का सबसे बड़ा भंडार केरल, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों की 'मोनाज़ाइट बालू' (Monazite Sand) में पाया जाता है, जो इल्मेनाइट, रुटाइल और जिरकोन के साथ मिश्रित रूप में मिलता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में लिग्नाइट (भूरा कोयला) का सबसे बड़ा भंडार तमिलनाडु के 'नेवेली' क्षेत्र में स्थित है, जबकि राजस्थान, गुजरात और जम्मू-कश्मीर के पैंथर्स बेसिन में भी इसके छोटे भंडार पाए जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा वर्गीकृत भारतीय मृदाओं, उनकी रासायनिक संरचना और भौगोलिक वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जलोढ़ मृदा (Alluvial Soil) देश के कुल क्षेत्रफल का लगभग 40% भाग पर पाई जाती है, जो मुख्य रूप से उत्तर के विशाल मैदानों और नदी घाटियों में विस्तृत है, तथा इसमें पोटाश और चूने की प्रचुरता पाई जाती है जबकि फॉस्फोरस और नाइट्रोजन की कमी होती है।
2. लाल और पीली मृदा का लाल रंग क्रिस्टलीय और कायांतरित चट्टानों में लौह ऑक्साइड के व्यापक विसरण के कारण होता है, जबकि इसका पीला रंग इसमें जलीय योजन (Hydration) की स्थिति उत्पन्न होने के कारण प्रकट होता है।
3. लैटेराइट मृदा का विकास उच्च तापमान और अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में तीव्र निक्षालन (Leaching) प्रक्रिया के फलस्वरूप होता है, जिसमें सिलिका का निक्षालन हो जाता है और लोहे तथा एल्युमिनियम के ऑक्साइड शेष बच जाते हैं, जिससे यह मिट्टी नाइट्रोजन और पोटाश से भरपूर होती है और कृषि के लिए अत्यधिक उपजाऊ होती है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार काली मृदा (Black Soil) में 'स्वतः जुताई' (Self-ploughing) का विशेष गुण पाया जाता है, क्योंकि गीली होने पर यह चिपचिपी और फूल जाती है तथा सूखने पर इसमें गहरी चौड़ी दरारें पड़ जाती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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