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General Science
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परमाणु संरचना और पदार्थ की अवस्थाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. रदरफोर्ड के अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग से यह निष्कर्ष निकला कि परमाणु का अधिकांश द्रव्यमान और उसका धनात्मक आवेश उसके केंद्र में एक अत्यंत सूक्ष्म आयतन में केंद्रित होता है, जिसे नाभिक कहा जाता है।
- 2. हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की बामर श्रेणी (Balmer series) विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम के दृश्य क्षेत्र (Visible region) में पाई जाती है, जबकि लाइमन श्रेणी पराबैंगनी क्षेत्र (Ultraviolet region) से संबंधित है।
- 3. प्लांक के क्वांटम सिद्धांत के अनुसार, विकिरण की ऊर्जा ऊर्जा के छोटे-छोटे असतत पैकेटों या बंडलों के रूप में उत्सर्जित या अवशोषित होती है, जिन्हें 'क्वांटम' या प्रकाश के संदर्भ में 'फोटॉन' कहा जाता है।
- 4. बोह्र के परमाणु मॉडल में यह माना गया कि इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर किन्हीं भी त्रिज्याओं वाली वृत्ताकार कक्षाओं में घूम सकते हैं, और इन कक्षाओं में घूमते समय वे लगातार ऊर्जा का विकिरण करते रहते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि अर्नेस्ट रदरफोर्ड के अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग ने परमाणु के नाभिकीय मॉडल को स्थापित किया, जिससे यह सिद्ध हुआ कि परमाणु का धनात्मक आवेश और लगभग संपूर्ण द्रव्यमान केंद्र में स्थित नाभिक में समाहित है। कथन 2 सही है; हाइड्रोजन परमाणु के स्पेक्ट्रम में लाइमन श्रेणी पराबैंगनी क्षेत्र में, बामर श्रेणी दृश्य क्षेत्र में और पाश्चन, ब्रैकेट तथा फुंड श्रेणियाँ अवरक्त (Infrared) क्षेत्र में पाई जाती हैं। कथन 3 सही है क्योंकि मैक्स प्लांक के क्वांटम सिद्धांत के अनुसार ऊर्जा का उत्सर्जन या अवशोषण निरंतर न होकर पैकेटों (क्वांटम) के रूप में होता है। कथन 4 गलत है क्योंकि बोह्र के परमाणु मॉडल के अनुसार इलेक्ट्रॉन केवल उन्हीं निश्चित वृत्ताकार कक्षाओं में घूम सकते हैं जिनमें उनका कोणीय संवेग ($h/2\pi$) का पूर्ण गुणज होता है, और इन स्थिर कक्षाओं में घूमते समय वे ऊर्जा का विकिरण नहीं करते हैं। परमाणु की इन मूलभूत अवधारणाओं के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों की जटिल क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आरएच कारक (Rh factor), जो कि एक एरिथ्रोसाइट झिल्ली पर स्थित एंटीजन है, की अनुपस्थिति (Rh negative) वाले व्यक्ति में Rh positive रक्त के पहली बार संपर्क में आने पर तुरंत गंभीर आधान प्रतिक्रिया (Hemolytic transfusion reaction) होती है क्योंकि शरीर में पहले से ही प्राकृतिक रूप से Rh एंटीबॉडी मौजूद होते हैं।
2. एरिथ्रोब्लास्टोसिस फिटलिस (Erythroblastosis fetalis) की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब एक Rh-negative गर्भवती महिला दूसरी बार Rh-positive भ्रूण को गर्भ में धारण करती है, जिससे माँ के शरीर में बने एंटी-Rh IgG एंटीबॉडी प्लेसेंटा को पार करके भ्रूण के लाल रक्त कणिकाओं को नष्ट करने लगते हैं।
3. 'बॉम्बे ब्लड ग्रुप' ($O_h$ फेनोटाइप) वाले व्यक्तियों की लाल रक्त कोशिकाओं पर 'H' एंटीजन अनुपस्थित होता है, जिसके कारण वे किसी भी सामान्य ABO रक्त समूह (जैसे A, B, AB, O) से रक्त प्राप्त नहीं कर सकते और उन्हें केवल दूसरे बॉम्बे रक्त समूह से ही रक्त लेना पड़ता है।
4. रक्त का थक्का बनने की प्रक्रिया में, थ्रॉम्बोप्लास्टिन (Thromboplastin) और कैल्शियम आयनों की उपस्थिति में प्रोथ्रोम्बिन का सक्रिय थ्रॉम्बिन में रूपांतरण होता है, जो अंततः घुलनशील फाइब्रिनोजेन को अघुलनशील फाइब्रिन जाल में बदलता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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प्रकाशिकी में लेंसों और दर्पणों के परावर्तन तथा अपवर्तन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी उत्तल दर्पण (Convex mirror) की फोकस दूरी धनात्मक होती है और यह हमेशा वस्तु की स्थिति चाहे जो भी हो, एक आभासी, सीधी और छोटी छवि बनाता है, जिसका उपयोग वाहनों में पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में किया जाता है क्योंकि इसका दृष्टि क्षेत्र (Field of view) विस्तृत होता है।
2. जब प्रकाश की किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है और उसका आपतन कोण माध्यम के क्रांतिक कोण (Critical angle) से अधिक हो जाता है, तो किरण का अपवर्तन होने के बजाय वह उसी माध्यम में वापस लौट जाती है, जिसे पूर्ण आंतरिक परावर्तन कहा जाता है।
3. जल में डूबे हुए एक वायु के बुलबुले का व्यवहार उत्तल लेंस की तरह होता है क्योंकि प्रकाश की किरणें विरल माध्यम (वायु) से सघन माध्यम (जल) में जाती हैं, जिससे किरणें अभिसरित हो जाती हैं।
4. एक समतल दर्पण की आवर्धन क्षमता (Magnification) का मान हमेशा +1 होता है, जिसका अर्थ है कि इसके द्वारा बनने वाली छवि का आकार वस्तु के आकार के बराबर और हमेशा सीधी होती है, जिसके बारे में विस्तृत जानकारी विकिपीडिया संदर्भ में दी गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव शरीर में होने वाले विभिन्न संक्रामक रोगों, उनके रोगकारकों (Pathogens) और उनके संचरण तंत्र के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'कुष्ठ रोग' (Leprosy), जिसे हैनसेन रोग भी कहा जाता है, एक दीर्घकालिक जीवाणु जनित संक्रमण है जो 'माइकोबैक्टीरियम लेप्री' (Mycobacterium leprae) के कारण होता है और यह मुख्य रूप से परिधीय तंत्रिकाओं तथा त्वचा को प्रभावित करता है।
2. 'रेबीज' (Rabies) एक विषाणु जनित तीव्र न्यूरोलॉजिकल रोग है जो लिस्सावायरस (Lyssavirus) के कारण होता है, और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को संक्रमित करने के बाद इस रोग की मृत्यु दर लगभग 100% तक होती है।
3. 'कालाजार' (Kala-azar) एक जीवाणु जनित संक्रामक रोग है जो 'लिसरनिया डोनोवानी' (Leishmania donovani) नामक बैक्टीरिया के कारण होता है, जिसका संचरण 'सैंडफ्लाई' (बालू मक्खी) के काटने से होता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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आवर्त सारणी के तत्वों के विभिन्न आवर्ती गुणों और रासायनिक प्रवृत्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी परमाणु की 'द्वितीय आयनन एन्थैल्पी' (Second Ionization Enthalpy) का मान हमेशा उसकी 'प्रथम आयनन एन्थैल्पी' से अधिक होता है, क्योंकि उदासीन परमाणु से एक इलेक्ट्रॉन निकल जाने के बाद बचे हुए इलेक्ट्रॉनों पर प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ जाता है और आकार छोटा हो जाता है।
2. 'इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी' (Electron Gain Enthalpy) का मान सभी हैलोजन तत्वों में क्लोरीन के लिए सर्वाधिक ऋणात्मक होता है, न कि फ्लोरीन के लिए, जिसका मुख्य कारण फ्लोरीन के छोटे आकार के कारण होने वाला अंतःइलेक्ट्रॉनी प्रतिकर्षक (Interelectronic repulsion) है।
3. आधुनिक आवर्त सारणी में 'लैंथेनाइड आकुंचन' (Lanthanoid Contraction) के प्रभावस्वरूप, छठी अवधि के संक्रमण तत्वों (जैसे Hafnium) की परमाणु त्रिज्या और रासायनिक गुण पाँचवीं अवधि के उनके ठीक ऊपर वाले तत्वों (जैसे Zirconium) की तुलना में लगभग समान हो जाते हैं।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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ध्वनि तरंग का माध्यम?
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