त्वरित लिंक्स
General Science
11 views
मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों (Blood Groups) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) की सतह पर उपस्थित ABO प्रतिजन (Antigens) ग्लाइकोस्फिंगोलिपिड या ग्लाइकोप्रोटीन प्रकृति के होते हैं, जिनका निर्माण विशिष्ट ग्लाइकोसिलट्रांसफेरेज एंजाइमों द्वारा होता है, जिन्हें 'ABO' जीन द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
- 2. 'बॉम्बे फिनोटाइप' ($O_h$) से ग्रस्त व्यक्तियों के प्लाज्मा में सामान्य प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले एंटी-A और एंटी-B एंटीबॉडी के अतिरिक्त एक विशिष्ट और आक्रामक 'एंटी-H' एंटीबॉडी भी उपस्थित होती है, जिसके कारण वे किसी भी सामान्य ABO रक्त समूह (A, B, AB, O) के व्यक्ति से रक्त नहीं ले सकते हैं।
- 3. एरिथ्रोब्लास्टोसिस फिटलिस (Erythroblastosis fetalis) मुख्य रूप से तब उत्पन्न होती है जब एक Rh-धनात्मक (Rh⁺) पिता और एक Rh-ऋणात्मक (Rh⁻) माता से दूसरी बार गर्भधारण होता है, क्योंकि प्रथम प्रसव के समय माँ के शरीर में बनी IgG प्रकार की एंटी-Rh एंटीबॉडी प्लेसेंटा को पार करके भ्रूण की RBCs को नष्ट कर देती हैं।
- 4. रक्त स्कंदन (Blood Coagulation) की बाह्य प्रणाली (Extrinsic pathway) की शुरुआत तब होती है जब रक्त वाहिका की आंतरिक एंडोथेलियल क्षति के कारण संपर्क कारक (Contact factor या Factor XII) सीधे उपकला के नीचे कोलेजन तंतुओं के संपर्क में आता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 सही हैं। लाल रक्त कोशिकाओं की सतह पर ABO एंटीजन ग्लाइकोप्रोटीन और ग्लाइकोलिपिड होते हैं। बॉम्बे फिनोटाइप ($O_h$) वाले व्यक्तियों में H-एंटीजन का अभाव होता है, जिससे उनके प्लाज्मा में एंटी-H एंटीबॉडी पाई जाती है और वे केवल बॉम्बे समूह से ही रक्त ले सकते हैं। एरिथ्रोब्लास्टोसिस फिटलिस एक इम्यूनोलॉजिकल स्थिति है जो Rh-असंगति के कारण होती है, जिसमें IgG एंटीबॉडी प्लेसेंटा को पार करती है। कथन 4 गलत है क्योंकि रक्त स्कंदन की *आंतरिक प्रणाली* (Intrinsic pathway) की शुरुआत रक्त वाहिका के अंदर कोलेजन के संपर्क में आने से होती है, जबकि *बाह्य प्रणाली* (Extrinsic pathway) की शुरुआत क्षतिग्रस्त ऊतकों से 'टिश्यू फैक्टर' (Factor III) के रक्त में मिलने से होती है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
Related Questions
→
पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण और पादप हॉर्मोन्स के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रकाश संश्लेषण की 'प्रकाश रासायनिक अभिक्रिया' (Light Reaction) हरित लवक के स्ट्रोमा में संपन्न होती है, जहाँ जल के प्रकाشی अपघटन (Photolysis) से ऑक्सीजन, प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन मुक्त होते हैं, जबकि केल्विन चक्र (C3 चक्र) थाइलाकोइड झिल्ली पर होता है।
2. 'जिब्रेलिन' (Gibberellin) एक पादप हॉर्मोन है जो आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वसंधि) की लंबाई को बढ़ाकर तने के दीर्घीकरण को प्रेरित करता है तथा बीजों की प्रसुप्ति (Dormancy) को तोड़कर अंकुरण में सहायता करता है।
3. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये पौधे मिट्टी में उगते हैं लेकिन लैंगिक जनन के लिए जल पर निर्भर होते हैं, और इनमें मुख्य पादप शरीर युग्मकोद्भिद (Gametophyte) होता है जो बीजाणुद्भिद पर आश्रित रहता है।
4. 'एब्सिसिक अम्ल' (ABA) को 'तनाव हॉर्मोन' (Stress Hormone) कहा जाता है, जो प्रतिकूल पर्यावरणीय परिस्थितियों जैसे जल की कमी के दौरान पर्णरंध्रों (Stomata) को बंद करने और बीज की प्रसुप्ति को बनाए रखने में मुख्य भूमिका निभाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
रासायनिक बंधन, अम्ल, क्षार और लवण (Acids, Bases and Salts) के वैचारिक और मात्रात्मक पहलुओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लुईस अम्ल (Lewis Acids) वे रासायनिक स्पीशीज हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म को ग्रहण कर सकती हैं, और केंद्रीय परमाणु के संयोजी कोष में अष्टक अपूर्ण रखने वाले यौगिक (जैसे $BF_3$) तथा सामान्यतः सभी धनावेशित आयन इस श्रेणी में आते हैं।
2. जब एक दुर्बल अम्ल ($CH_3COOH$) को उसके प्रबल क्षार ($NaOH$) के साथ उदासीनीकरण कराया जाता है, तो तुल्यांकी बिंदु पर बनने वाले लवण के जल-अपघटन के कारण विलयन का pH मान 7 से कम (अम्लीय) होता है।
3. ब्रॉन्स्टेड-लाउरी अवधारणा के अनुसार, किसी प्रबल अम्ल का संयुग्मी क्षार (Conjugate base) अत्यंत दुर्बल होता है, जबकि जल अपनी उभयधर्मी (Amphoteric) प्रकृति के कारण ब्रॉन्स्टेड अम्ल और ब्रॉन्स्टेड क्षार दोनों के रूप में कार्य कर सकता है।
4. बफर विलयन (Buffer solution) वे विलयन होते हैं जो थोड़ी मात्रा में अम्ल या क्षार मिलाने पर अपने pH मान में परिवर्तन का विरोध करते हैं, और अम्लीय बफर विलयन का एक उत्कृष्ट उदाहरण दुर्बल अम्ल और उसके प्रबल क्षार से बने लवण का जलीय मिश्रण है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों की आनुवंशिक एवं जैव रासायनिक विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ABO रक्त समूह प्रणाली लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) की सतह पर उपस्थित ग्लाइकोप्रोटीन या एंटीजन (A और B) की उपस्थिति पर आधारित होती है, जिनका संश्लेषण 'I' जीन द्वारा नियंत्रित होता है, जिसके तीन एलील ($I^A$, $I^B$, और $i$) होते हैं और यह सह-प्रभाविता (Codominance) का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है।
2. 'आरएच कारक' (Rh factor) एक अन्य एंटीजन है जिसकी खोज रhesus बंदर में की गई थी; यदि किसी व्यक्ति के रक्त में Rh एंटीजन अनुपस्थित है, तो वह Rh-धनात्मक कहलाता है और गर्भाक्ता रक्ताकोरकता (Erythroblastosis fetalis) की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब पिता Rh-धनात्मक और माता Rh-ऋणात्मक होती है।
3. सार्वभौमिक प्राप्तकर्ता (Universal Recipient) वह रक्त समूह AB होता है जिसकी प्लाज्मा में एंटी-A और एंटी-B दोनों प्राकृतिक एंटीबॉडी (Agglutinins) अनुपस्थित होते हैं, जिससे यह किसी भी समूह के रक्त को प्राप्त कर सकता है बिना किसी गंभीर प्रतिरक्षी प्रतिक्रिया के।
4. रुधिर स्कंदन (Blood coagulation) की कैस्केड प्रक्रिया में, थ्रॉम्बोप्लास्टिन और कैल्शियम आयनों की उपस्थिति में प्रोथ्रॉम्बिन, सक्रिय थ्रॉम्बिन में बदल जाता है, जो आगे फाइब्रिनोजेन को अघुलनशील फाइब्रिन तंतुओं में परिवर्तित कर देता है, जिसके बारे में विस्तृत जानकारी विकिपीडिया संदर्भ में दी गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
प्रकाशिकी के अंतर्गत लेंस और दर्पण के संयोजन तथा अपवर्तन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जब किसी उत्तल लेंस को ऐसे द्रव में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से अधिक होता है, तो लेंस की फोकस दूरी ऋणात्मक हो जाती है और वह अभिसारी (Converging) प्रकृति से बदलकर अपसारी (Diverging) प्रकृति का व्यवहार करने लगता है।
2. एक संयुक्त सूक्ष्मदर्शी की आवर्धन क्षमता को बढ़ाने के लिए अभिदृश्यक लेंस (Objective lens) और नेत्रिका (Eyepiece) दोनों की फोकस दूरी बहुत अधिक होनी चाहिए।
3. गोलीय दर्पण के लिए, यदि वस्तु को अवतल दर्पण के फोकस और वक्रता केंद्र के बीच रखा जाता है, तो उसका वास्तविक, उल्टा और वस्तु से बड़ा प्रतिबिंब वक्रता केंद्र के परे बनता है।
4. पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) की घटना के लिए प्रकाश किरण का सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाना आवश्यक है, तथा आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण (Critical angle) से अधिक होना चाहिए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
अनुदैर्ध्य तरंगों (Longitudinal waves) और अनुप्रस्थ तरंगों (Transverse waves) की प्रकृति तथा ध्वनि संचरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ध्वनि तरंगें वायु में अनुदैर्ध्य तरंगों के रूप में संचरित होती हैं, जिसमें माध्यम के कण तरंग संचरण की दिशा के समांतर संपीड़न (Compression) और विरलन (Rarefaction) क्षेत्रों का निर्माण करते हैं, और इनमें ध्रुवण (Polarization) की परिघटना नहीं देखी जा सकती है।
2. किसी ठोस माध्यम में ध्वनि की चाल उस माध्यम के यंग प्रत्यास्थता गुणांक (Young's modulus) और उसके घनत्व के वर्गमूल के सीधे समानुपाती होती है, जिसके कारण ठोस पदार्थों में ध्वनि की चाल गैसों की तुलना में काफी अधिक होती है।
3. जब कोई ध्वनि तरंग एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करती है, तो उसकी आवृत्ति (Frequency) और तरंगदैर्ध्य दोनों बदल जाती हैं, जबकि उसका वेग अपरिवर्तित रहता है क्योंकि वेग माध्यम की भौतिक अवस्था पर निर्भर करता है।
4. लाप्लास (Laplace) द्वारा न्यूटन के ध्वनि की चाल के सूत्र में किए गए संशोधन के अनुसार, वायु में ध्वनि का संचरण एक समतापीय (Isothermal) प्रक्रिया के बजाय एक रुद्धोष्म (Adiabatic) प्रक्रिया है, क्योंकि संपीड़न और विरलन की प्रक्रिया अत्यंत तीव्र गति से होती है और ऊष्मा का आदान-प्रदान संभव नहीं होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.