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General Science
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आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर प्रभावी नाभिकीय आवेश (Effective Nuclear Charge) में क्रमिक वृद्धि होती है, जिसके फलस्वरूप परमाणु त्रिज्या में निरंतर कमी आती है, किंतु समूह-18 के उत्कृष्ट गैसों की परमाणु त्रिज्या (वांडरवाल्स त्रिज्या) उनके ठीक पहले आने वाले हैलोजन तत्वों की सहसंयोजक त्रिज्या की तुलना में बड़ी होती है।
- 2. ऑक्सीजन की तुलना में नाइट्रोजन की प्रथम आयनन एन्थैल्पी (First Ionization Enthalpy) का मान कम होता है, जिसका मुख्य कारण नाइट्रोजन के 2p कक्षकों का अर्ध-पूर्ण (Half-filled) होना है जो अधिक स्थिरता प्रदान करता है।
- 3. आवर्त सारणी में फ्लोरीन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का ऋणात्मक मान क्लोरीन की तुलना में कम होता है, क्योंकि फ्लोरीन का आकार अत्यंत छोटा होने के कारण आने वाला नया इलेक्ट्रॉन पहले से उपस्थित 2p इलेक्ट्रונים से अधिक प्रतिकर्षण अनुभव करता है।
- 4. लैंथेनाइड संकुचन (Lanthanide Contraction) के कारण 4d और 5d संक्रमण श्रेणी के तत्वों (जैसे जिरकोनियम और हाफ़िज़ियम) की परमाणु और आयनिक त्रिज्याएँ लगभग समान हो जाती हैं, जिसका मुख्य कारण 4f कक्षकों का दुर्बल आवरण प्रभाव (Shielding effect) है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि आवर्त सारणी में बाएं से दाएं जाने पर प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ने से परमाणु त्रिज्या घटती है, लेकिन उत्कृष्ट गैसों के मामले में वांडरवाल्स त्रिज्या मापी जाती है जो सहसंयोजक त्रिज्या से बड़ी होती है। कथन 2 गलत है क्योंकि नाइट्रोजन के 2p कक्षकों के अर्ध-पूर्ण होने के कारण इसकी प्रथम आयनन एन्थैल्पी का मान ऑक्सीजन की तुलना में अधिक होता है, कम नहीं। कथन 3 सही है क्योंकि फ्लोरीन का आकार बहुत छोटा होने के कारण इलेक्ट्रॉन-इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण बढ़ जाता है जिससे इसकी इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का ऋणात्मक मान क्लोरीन से कम हो जाता है। कथन 4 सही है, 4f कक्षकों के दुर्बल परिरक्षण प्रभाव के कारण लैंथेनाइड संकुचन होता है जिससे 4d और 5d तत्वों के आकार लगभग समान हो जाते हैं। इस विषय के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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मानव शरीर के तंत्रों की कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. दायां आलिंद (Right Atrium) शरीर के विभिन्न भागों से अशुद्ध रक्त महाशिराओं द्वारा प्राप्त करता है और त्रिवलनी कपाट (Tricuspid Valve) के माध्यम से इसे दाएं निलय में भेजता है, जहां से यह फुफ्फुसीय धमनी (Pulmonary Artery) द्वारा फेफड़ों में शुद्धिकरण के लिए जाता है।
2. फेफड़ों की कूपिकाओं (Alveoli) में गैसों का विनिमय केवल सक्रिय परिवहन (Active Transport) के माध्यम से होता है, जिसमें एटीपी (ATP) ऊर्जा का प्रत्यक्ष उपयोग होता है क्योंकि ऑक्सीजन का आंशिक दाब कम होता है।
3. अग्न्याशय द्वारा स्रावित 'ट्रिप्सिनोजेन' एक सक्रिय एंजाइम है जो सीधे प्रोटीन को अमीनो अम्लों में तोड़ देता है, और इसके सक्रियण के लिए किसी अन्य कारक की आवश्यकता नहीं होती है।
4. स्वायत्त तंत्रिका तंत्र (Autonomic Nervous System) का अनुकंपी भाग (Sympathetic System) हृदय की धड़कन को कम करता है और आंतों की क्रमाकुंचन गति को बढ़ाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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