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General Science
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चुंबक का ध्रुव?

Detailed Explanation

दो।
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धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक गुणों तथा निष्कर्षण प्रक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. एल्युमिनियम के निष्कर्षण के लिए हॉल-हెరॉल्ट प्रक्रम (Hall-Héroult process) में शुद्ध एलुमिना ($Al_2O_3$) को पिघले हुए क्रायोलाइट ($Na_3AlF_6$) और फ्लूऑर्स्पर ($CaF_2$) के मिश्रण में घोला जाता है, जहाँ क्रायोलाइट मुख्य रूप से एलुमिना के गलनांक को कम करने और उसकी विद्युत चालकता को बढ़ाने का कार्य करता है। 2. 'सफेद फॉस्फोरस' (White Phosphorus) अत्यधिक प्रतिक्रियाशील और विषैला होता है, जो अंधेरे में दीप्ति (Phosphorescence) उत्पन्न करता है, और इसे हवा में स्वतः जलने से रोकने के लिए पानी के नीचे रखा जाता है, जबकि लाल फॉस्फोरस बहुलकित संरचना के कारण सामान्य ताप पर जल में अघुलनशील और कम सक्रिय होता है। 3. संक्रमण धातुओं के यौगिकों द्वारा रंग प्रदर्शित करने का मुख्य कारण उनके 'd-d संक्रमण' (d-d transition) या 'चार्ज ट्रांसफर स्पेक्ट्रा' का होना है, जिसमें अपूर्ण रूप से भरे d-कक्षकों के बीच इलेक्ट्रॉनों का उत्तेजन दृश्य प्रकाश क्षेत्र के अवशोषण से होता है। 4. सोडियम कार्बोनेट (वाशिंग सोडा) का उत्पादन 'सॉलवे प्रक्रम' (Solvay process) द्वारा किया जाता है, जिसमें मध्यवर्ती उत्पाद के रूप में सोडियम बाइकार्बोनेट प्राप्त होता है, और इस प्रक्रम की एक प्रमुख विशेषता यह है कि अमोनिया को पुनर्प्राप्त (Recovered) करने के लिए इसमें अमोनियम क्लोराइड की अभिक्रिया बुझे हुए चूने ($Ca(OH)_2$) के साथ कराई जाती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं? मानव शरीर में कार्बोहाइड्रेट चयापचय, ग्लाइकोजेनोलिसिस और विभिन्न पोषक तत्वों की जैव-रासायनिक भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ग्लाइकोजेनेसिस (Glycogenesis) वह प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत यकृत और कंकाल पेशियों में रक्त शर्करा (ग्लूकोज) के आधिक्य को इंसुलिन हार्मोन के प्रभाव से ग्लाइकोजन के रूप में संचित किया जाता है, जबकि उपवास या ऊर्जा की कमी के समय 'ग्लूकोनियोजेनेसिस' (Gluconeogenesis) गैर-कार्बोहाइड्रेट स्रोतों जैसे अमीनो एसिड और ग्लिसरोल से ग्लूकोज का संश्लेषण करता है। 2. 'पेंटोज़ फॉस्फेट मार्ग' (Hexose Monophosphate Shunt), ग्लाइकोलिसिस के समांतर चलने वाली एक वैकल्पिक चयापचय प्रक्रिया है जो मुख्य रूप से साइटोप्लाज्म में संपन्न होती है और इसका प्रमुख उद्देश्य NADPH तथा राइबोज़-5-फास्फेट का उत्पादन करना है, जो न्यूक्लिक अम्ल संश्लेषण और वसा अम्लों के अपचयन के लिए अनिवार्य हैं। 3. आंतों द्वारा कार्बोहाइड्रेट का अवशोषण हमेशा केवल सरल विसरण (Simple diffusion) के माध्यम से होता है, क्योंकि ग्लूकोज और गैलक्टोज जैसे मोनोसैक्राइड्स के अणुओं का आकार बहुत छोटा होता है और इन्हें प्लाज्मा झिल्ली को पार करने के लिए किसी भी विशिष्ट सोडियम-निर्भर ट्रांसपोर्टर (SGLT1) की आवश्यकता नहीं होती है। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? इंद्रधनुष में सबसे ऊपर कौन सा रंग होता है? धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक व्यवहार तथा निष्कर्षण प्रक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'झाग उत्प्लवन प्रक्रम' (Froth Flotation Process) का उपयोग मुख्य रूप से सल्फाइड अयस्क के सांद्रण के लिए किया जाता है, जिसमें चीड़ के तेल (Pine oil) का उपयोग 'झाग बनाने वाले' (Frother) के रूप में और सोडियम एथिल जैंथेट का उपयोग 'संवर्धक' (Collector) के रूप में किया जाता है, जो अयस्क के कणों को जल-विरोधी (Hydrophobic) बनाते हैं। 2. जब एल्यूमिना के विद्युत अपघटनी निष्कर्षण (हॉल-हेरोल्ट प्रक्रम) में क्रायोलाइट ($Na_3AlF_6$) और फ्लूएस्पर ($CaF_2$) को मिलाया जाता है, तो यह एल्यूमिना के गलनांक को काफी हद तक कम कर देता है और उसकी विद्युत चालकता को बढ़ा देता है। 3. 'दहन विधि' (Roasting) और 'निस्थापन' (Calcination) दोनों ही अयस्कों के सांद्रण के बाद किए जाने वाले प्रक्रम हैं, जिसमें निस्थापन (Calcination) सीमित वायु या वायु की अनुपस्थिति में कार्बोनेट और हाइड्रेटेड ऑक्साइड अयस्कों को उनके गलनांक से कम तापमान पर गर्म करके वाष्पशील अशुद्धियों को दूर करने के लिए किया जाता है। 4. जब तांबे के निष्कर्षण के दौरान 'मैट' (Matte), जिसमें मुख्य रूप से $Cu_2S$ और थोड़ी मात्रा में $FeS$ होता है, को बेसेमर कनवर्टर में सिलिका अस्तर के साथ धमन भट्टी में गर्म किया जाता है, तो बचा हुआ फेरस सल्फाइड स्लैग के रूप में अलग हो जाता है और अंत में प्राप्त पिघला हुआ तांबा 'फोफोरेदार कॉपर' (Blister Copper) कहलाता है, जिसमें सल्फर डाइऑक्साइड गैस के निकलने के कारण छाले पड़ जाते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं? विद्युत धारा, प्रतिरोध और परिपथों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी चालक का विद्युत प्रतिरोध उसकी लंबाई के अनुक्रमानुपाती और उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है, तथा प्रतिरोधकता (Resistivity) का मान चालक के पदार्थ की प्रकृति और उसके तापमान पर निर्भर करता है, न कि उसकी ज्यामितीय विमाओं पर। 2. जब प्रतिरोधकों को समांतर क्रम (Parallel Combination) में जोड़ा जाता है, तो परिपथ का कुल समतुल्य प्रतिरोध परिपथ के प्रत्येक व्यक्तिगत प्रतिरोध के मान से अधिक होता है, और सभी प्रतिरोधकों के सिरों पर विभवांतर का मान भिन्न-भिन्न होता है। 3. किरचॉफ का प्रथम नियम (Kirchhoff's Current Law) आवेश संरक्षण के नियम पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी संधि पर मिलने वाली सभी धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है। 4. किसी विद्युत बल्ब का फिलामेंट टंगस्टन का बना होता है क्योंकि इसका गलनांक बहुत उच्च होता है तथा उच्च तापमान पर यह बिना पिघले दीप्त हो सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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