त्वरित लिंक्स
General Science
10 views
मानव पोषण और जैविक अणुओं (विटामिन, कार्बोहाइड्रेट तथा प्रोटीन) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. विटामिन $B_1$ (थiamine) की कमी से 'बेरी-बेरी' रोग होता है, और यह एक जल-विलेय विटामिन है जो शरीर में अत्यधिक मात्रा में होने पर यकृत में कई वर्षों तक संग्रहीत रहता है।
- 2. स्टार्च दो घटकों एमाइlose (Amylose) और एमाइलोपेक्टिन (Amylopectin) से मिलकर बनता है, जिसमें एमाइlose जल में अघुलनशील रेखीय बहुलक है जबकि एमाइलोपेक्टिन जल में घुलनशील शाखित श्रृंखला बहुलक है।
- 3. पेप्टाइड बंध एक प्रकार का एमाइड बंध होता है जो एक अमीनो अम्ल के कार्बोक्सिल समूह ($-\text{COOH}$) और दूसरे अमीनो अम्ल के अमीनो समूह ($-\text{NH}_2$) के बीच जल के अणु के निष्कासन के परिणामस्वरूप बनता है।
- 4. विटामिन $D$ (कैल्सीफेरॉल) एक वसा-विलेय विटामिन है जो कैल्शियम और फास्फोरस के अंतःशोषण को नियंत्रित करता है, और इसकी कमी से बच्चों में 'रिकेट्स' तथा वयस्कों में 'ऑस्टियोमलेशिया' रोग हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि विटामिन $B_1$ (थiamine) एक जल-विलेय विटामिन है, और अधिकांश जल-विलेय विटामिन शरीर में संग्रहीत नहीं होते बल्कि मूत्र के साथ उत्सर्जित हो जाते हैं (अपवाद विटामिन $B_{12}$ है)। कथन 2 गलत है क्योंकि स्टार्च का घटक एमाइलोस (Amylose) जल में घुलनशील (अथवा कम घुलनशील रेखीय बहुलक जो गर्म जल में निलंबन बनाता है) नहीं होता बल्कि एमाइलोपेक्टिन जल में अघुलनशील शाखाओं वाला भाग होता है, तथा एमाइलोस जल में घुलनशील होता है। इसके विपरीत, कथन 3 बिल्कुल सही है कि पेप्टाइड बंध एक एमाइड बंध है जो अमीनो अम्लों के बीच संक्षेपण से बनता है। कथन 4 भी पूरी तरह सही है क्योंकि विटामिन डी एक वसा-विलेय विटामिन है जो हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए कैल्शियम चयापचय को नियंत्रित करता है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
Related Questions
→
ध्वनि तरंगों के संचरण, परावर्तन और डॉप्लर प्रभाव के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी गैस में ध्वनि की चाल गैस के तापमान के वर्गमूल के सीधे समानुपातिक होती है, जबकि दाब में परिवर्तन का ध्वनि की चाल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता क्योंकि दाब और घनत्व में समानुपातिक परिवर्तन से उनका अनुपात नियत रहता है।
2. जब ध्वनि तरंगें एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करती हैं, तो उनकी आवृत्ति और तरंगदैर्ध्य दोनों अपरिवर्तित रहती हैं, किंतु वेग में परिवर्तन हो जाता है।
3. लाप्लास (Laplace) द्वारा न्यूटन के इस सूत्र में संशोधन किया गया कि ध्वनि का संचरण समतापीय (Isothermal) न होकर रुद्धोष्म (Adiabatic) प्रक्रिया है, क्योंकि संपीड़न और विरलन की प्रक्रिया इतनी तीव्र होती है कि ऊष्मा का आदान-प्रदान संभव नहीं हो पाता।
4. यदि ध्वनि के स्रोत और श्रोता के बीच आपेक्षिक गति हो, तो श्रोता द्वारा सुनी गई ध्वनि की आवृत्ति में परिवर्तन को 'डॉप्लर प्रभाव' कहा जाता है, और यह प्रभाव केवल अनुदैर्ध्य ध्वनि तरंगों पर ही लागू होता है तथा विद्युत चुंबकीय तरंगों पर लागू नहीं होता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों की जटिल आनुवंशिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ABO रक्त समूह प्रणाली में, एरिथrocytes की सतह पर उपस्थित 'H एंटीजन' (L-फ्यूकोज अवशेष) के बिना A या B एंटीजन का निर्माण संभव नहीं होता है, क्योंकि 'H जीन' (FUT1) द्वारा उत्पादित फ्यूकोसिल ट्रांसफेरज एंजाइम इस आधारभूत एंटीजन को संश्लेषित करता है।
2. 'बॉम्बे रक्त समूह' ($O_h$ फेनोटाइप) से ग्रस्त व्यक्तियों में FUT1 जीन उत्परिवर्तित (Mutated) होता है, जिसके कारण उनकी लाल रक्त कोशिकाओं पर H एंटीजन अनुपस्थित होता है, और उनके प्लाज्मा में सामान्य A, B एंटीबॉडी के साथ-साथ H एंटीजन के विरुद्ध भी शक्तिशाली 'एंटी-H एंटीबॉडी' पाई जाती है।
3. एरिथ्रोब्लास्टोसिस फेटेलिस (Erythroblastosis fetalis) की गंभीर स्थिति पहली गर्भावस्था में ही Rh-ऋणात्मक माता और Rh-धनात्मक भ्रूण के बीच प्लेसेंटा के माध्यम से IgG एंटीबॉडी के तीव्र संचरण के कारण उत्पन्न हो जाती है, जिससे नवजात में गंभीर पीलिया होता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
→
प्रकाशिकी (Optics) और प्रकाश के अपवर्तन तथा पूर्ण आंतरिक परावर्तन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जब प्रकाश की किरण किसी सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है, तो आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण (Critical angle) से अधिक होने पर किरण का अपवर्तन नहीं होता, बल्कि वह उसी माध्यम में वापस लौट जाती है, जिसे पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) कहते हैं।
2. एक उत्तल लेंस (Convex lens) को जब ऐसे पारदर्शी द्रव में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से अधिक होता है, तो लेंस की अभिसारी (Converging) प्रकृति समाप्त हो जाती है और वह एक अपसारी (Diverging) लेंस की भाँति व्यवहार करने लगता है।
3. गोलीय दर्पणों के लिए, यदि वस्तु की दूरी $u$ और प्रतिबिंब की दूरी $v$ है, तो रेखीय आवर्धन ($m$) का मान $m = \frac{v}{u}$ होता है, जबकि उत्तल दर्पण की फोकस दूरी को परिपाटी के अनुसार ऋणात्मक माना जाता है।
4. पूर्ण परावर्तक प्रिज्म (Total Reflecting Prism) का उपयोग प्रकाश की किरण को बिना किसी ऊर्जा हानि के 90° या 180° से मोड़ने के लिए किया जाता है, जिसके लिए प्रिज्म के अंदर आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण से कम होना चाहिए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
नाभिकीय भौतिकी और रेडियोएक्टिव क्षय के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अल्फा ($\alpha$) क्षय के दौरान जनक नाभिक का परमाणु क्रमांक 2 से और द्रव्यमान संख्या 4 से घट जाती है, क्योंकि एक अल्फा कण वस्तुतः हीलियम नाभिक ($_2^4He^{2+}$) होता है, और इस प्रक्रिया में ऊर्जा का विमोचन संहति ह्रास (Mass defect) के कारण होता है।
2. बीटा-ऋणात्मक ($\beta^-$) क्षय में नाभिक के भीतर एक प्रोटॉन न्यूट्रॉन में परिवर्तित होता है, जिससे एक पॉजिट्रॉन और एक न्यूट्रिनो का उत्सर्जन होता है, जिसके फलस्वरूप परमाणु क्रमांक में 1 की वृद्धि हो जाती है किंतु द्रव्यमान संख्या अपरिवर्तित रहती है।
3. गामा ($\gamma$) विकिरणों का उत्सर्जन प्रायः अल्फा या बीटा क्षय के बाद उत्तेजित अवस्था में मौजूद नाभिक के निम्न ऊर्जा स्तर या मूल अवस्था में आने के कारण होता है, और गामा फोटॉन के निकलने से नाभिक की परमाणु संख्या या द्रव्यमान संख्या में कोई परिवर्तन नहीं होता है।
4. किसी रेडियोएक्टिव पदार्थ की अर्द्ध-आयु (Half-life) उसके क्षय नियतांक (Decay constant) के व्युत्क्रमानुपाती होती है तथा औसत आयु का मान अर्द्ध-आयु का लगभग 1.44 गुना होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
विद्युत धारा, प्रतिरोध और परिपथ से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अतिचालकता (Superconductivity) की स्थिति में किसी धातु या मिश्र धातु का विद्युत प्रतिरोध घटकर शून्य हो जाता है, और जब कोई पदार्थ अतिचालक अवस्था में प्रवेश करता है, तो वह अपने भीतर से बाह्य चुंबकीय क्षेत्र को पूर्ण रूप से बाहर धकेल देता है, जिसे 'माइस्नर प्रभाव' (Meissner effect) कहा जाता है।
2. व्हीटस्टोन सेतु (Wheatstone bridge) का उपयोग अज्ञात प्रतिरोध को अत्यंत यथार्थता के साथ मापने के लिए किया जाता है, और यह संतुलन की अवस्था में तब होता है जब गैल्वेनोमीटर में कोई विक्षेप नहीं होता है, जिससे भुजाओं के प्रतिरोधों का अनुपात $P/Q = S/R$ (मानक संकेतों के अनुसार) संतुष्ट होता है।
3. विभवमापी (Potentiometer) को वोल्टमीटर की तुलना में अधिक श्रेष्ठ माना जाता है क्योंकि विभवमापी संतुलन बिंदु प्राप्त करते समय परिपथ से शून्य धारा (Infinite resistance) आहरित करता है, जिससे यह सेल के आंतरिक प्रतिरोध और विद्युत वाहक बल (EMF) को बिना किसी त्रुटि के यथार्थ रूप से माप सकता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.