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General Science
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विलयन के अणुसंख्यक गुणधर्मों (Colligative Properties) और उत्प्रेरण (Catalysis) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर उसके वाष्प दाब में आपेक्षिक अवनमन (Relative Lowering of Vapour Pressure) विलेय के मोल अंश के बराबर होता है, और यह राऊल्ट के नियम द्वारा निर्धारित होता है तथा विलेय की प्रकृति पर निर्भर नहीं करता है।
- 2. परासरण दाब (Osmotic Pressure) एक अणुसंख्यक गुणधर्म है, जिसे वांट-हॉफ समीकरण $\Pi = iCRT$ द्वारा व्यक्त किया जाता है, जहाँ 'i' वांट-हॉफ गुणांक है जो वैद्युत अपघट्यों के वियोजन या संगुणन को दर्शाता है।
- 3. 'समांगी उत्प्रेरण' (Homogeneous Catalysis) में उत्प्रेरक और अभिकारक समान भौतिक अवस्था (Phase) में होते हैं, जिसका एक उत्कृष्ट उदाहरण सीसम् कक्ष विधि द्वारा सल्फ्यूरिक अम्ल के उत्पादन में नाइट्रिक ऑक्साइड का उपयोग है।
- 4. 'एंजाइम उत्प्रेरण' अत्यधिक विशिष्ट प्रकृति के होते हैं और उनकी उत्प्रेरकीय सक्रियता उच्चतम तापमान और अत्यधिक अम्लीय pH मान पर सबसे अधिक प्रभावी होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 सही हैं। राऊल्ट के नियम के अनुसार किसी विलयन के वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन विलेय के मोल अंश के बराबर होता है और यह एक अणुसंख्यक गुणधर्म है। परासरण दाब वांट-हॉफ समीकरण $\Pi = iCRT$ का पालन करता है। समांगी उत्प्रेरण में अभिकारक और उत्प्रेरक समान प्रावस्था में होते हैं। हालांकि, कथन 4 गलत है क्योंकि एंजाइम उत्प्रेरण एक निश्चित इष्टतम (Optimum) तापमान और pH मान पर ही सबसे अधिक सक्रिय होते हैं; अत्यधिक उच्च तापमान या अम्लता से एंजाइम विकृत (Denature) हो जाते हैं और उनकी सक्रियता समाप्त हो जाती है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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ध्वनि तरंगों और तरंग गति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी गैस माध्यम में ध्वनि की चाल उस गैस के निरपेक्ष तापमान के वर्गमूल के सीधे आनुपातिक होती है, जबकि दाब में परिवर्तन का ध्वनि की चाल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता बशर्ते तापमान स्थिर रहे।
2. अनुदैर्ध्य तरंगें (Longitudinal waves) केवल ठोस पदार्थों में ही संचरित हो सकती हैं क्योंकि उनके संचरण के लिए माध्यम में अपरूपण प्रत्यास्थता (Shear elasticity) का होना अनिवार्य होता है।
3. जब कोई ध्वनि तरंग एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करती है, तो उसकी आवृत्ति (Frequency) और तरंगदैर्ध्य (Wavelength) दोनों अपरिवर्तित रहते हैं, जबकि माध्यम के घनत्व व प्रत्यास्थता बदलने से उसकी चाल में परिवर्तन हो जाता है।
4. डॉप्लर प्रभाव (Doppler Effect) के अनुसार, जब श्रोता और ध्वनि स्रोत एक-вторых के समीप आते हैं, तो श्रोता द्वारा सुनी गई ध्वनि की आवृत्ति वास्तविक आवृत्ति से अधिक प्रतीत होती है, जो केवल ध्वनि तरंगों के लिए ही लागू होता है, प्रकाश तरंगों के लिए नहीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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गोबर गैस का मुख्य घटक क्या है?
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रासायनिक बंधन, अम्ल, क्षार और लवण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लुईस अम्ल (Lewis acid) वे रासायनिक स्पीशीज होती हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म को ग्रहण करने की क्षमता रखती हैं, और सभी धनावेशित आयन तथा अष्टक-अपूर्ण यौगिक (जैसे $BF_3$) उत्कृष्ट लुईस अम्ल के रूप में कार्य करते हैं।
2. ब्रॉन्स्टेड-लोरी संकल्पना के अनुसार, एक संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म (Conjugate acid-base pair) में केवल एक प्रोटॉन ($H^+$) का अंतर होता है, और किसी प्रबल अम्ल का संयुग्मी क्षार अत्यधिक दुर्बल होता है।
3. जब किसी दुर्बल अम्ल के लवण को उसके प्रबल क्षार के साथ जल में घोला जाता है, तो जल-अपघटन (Hydrolysis) के फलस्वरूप प्राप्त जलीय विलयन की प्रकृति अम्लीय होती है और विलयन का pH मान 7 से कम होता है।
4. जल के स्व-आयनन (Self-ionization) के कारण, शुद्ध जल का आयनिक गुणनफल ($K_w$) तापमान पर निर्भर करता है, और तापमान बढ़ाने पर $K_w$ का मान बढ़ने से शुद्ध जल का pH मान 7 से कम हो जाता है, यद्यपि वह रासायनिक रूप से उदासीन ही रहता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव रोगों, उनके रोगजनकों और संचरण तंत्र के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'टिटनेस' (Tetanus) क्लोस्ट्रिडियम टेटानी (Clostridium tetani) नामक जीवाणु के कारण होता है, जो एक बीजाणु-उत्पादक (Spore-forming) और आबध्य अवायवीय (Obligate anaerobic) जीवाणु है, तथा इसका विषैला एक्सोटॉक्सिन 'टेटनोस्पैस्मिन' केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है।
2. 'काली खांसी' (Pertussis) या हूइंग कफ बोरडेटेला परट्यूसिस (Bordetella pertussis) नामक ग्राम-ऋणात्मक जीवाणु के कारण होता है, जो श्वसन नली के उपकला ऊतक को संक्रमित करता है और पक्षाभ (Cilia) की गति को नष्ट कर देता है।
3. 'लैप्रॉसी' (कुष्ठ रोग) माइकोबैक्टीरियम लेप्रे (Mycobacterium leprae) के कारण होता है, जो एक अंतःकोशिकी परजीवी है और यह मुख्य रूप से केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है, जबकि परिधीय तंत्रिकाएँ इससे अप्रभावित रहती हैं।
4. 'अमीबायसिस' (अमीबी पेचिश) एंटाअमीबा हिस्टोलिटिका (Entamoeba histolytica) नामक एक परजीवी प्रोटोजोआ के कारण होता है, जिसका संक्रमण संदूषित जल और भोजन के सेवन से होता है और यह मुख्य रूप से बड़ी आंत को संक्रमित करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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प्रकाशिकी (Optics) के अंतर्गत लेंसों, दर्पणों और प्रकाश के अपवर्तन-परावर्तन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जब प्रकाश की किरण किसी सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है और आपतन कोण क्रांतिक कोण (Critical angle) से अधिक हो जाता है, तो किरण का पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total internal reflection) होता है, जिसके लिए यह आवश्यक है कि प्रकाश सघन माध्यम में ही वापस लौटे और इस घटना के दौरान परावर्तन का नियम ($i = r$) पूरी तरह से लागू होता है।
2. एक पतले उत्तल लेंस की फोकस दूरी ($f$) लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक और उसके दोनों पृष्ठों की वक्रता त्रिज्याओं पर निर्भर करती है, और जब ऐसे लेंस को उस द्रव में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से अधिक होता है, तो लेंस की प्रकृति अभिसारी (Converging) से बदलकर अपसारी (Diverging) हो जाती है।
3. गोलीय दर्पणों के लिए दर्पण सूत्र ($rac{1}{f} = rac{1}{v} + rac{1}{u}$) सभी प्रकार की स्थितियों में लागू होता है, चाहे आपतन कोण कितना भी बड़ा हो और किरणें मुख्य अक्ष के कितनी भी दूर (Non-paraxial rays) क्यों न हों, क्योंकि यह परावर्तन के नियमों का एक सार्वभौमिक और सन्निकट-मुक्त गणितीय परिणाम है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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