त्वरित लिंक्स
General Science
10 views
मानव रक्त परिसंचरण तंत्र, रुधिर समूहों की आनुवंशिकी और स्कंदन (Coagulation) क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. ABO रक्त समूह प्रणाली में, यदि माता-पिता दोनों का रक्त समूह 'AB' है, तो उनके बच्चों में 'O' रक्त समूह वंशागत होने की संभावना सैद्धांतिक रूप से शून्य होती है, क्योंकि $I^A$ और $I^B$ एलील सह-प्रभाविता (Co-dominance) प्रदर्शित करते हैं किंतु अप्रभावी 'i' एलील अनुपस्थित होता है।
- 2. रक्त का प्राकृतिक प्रतिस्कंदक (Anticoagulant) 'हेपरिन' (Heparin) मुख्य रूप से यकृत और बेसोफिल्स द्वारा स्रावित एक सल्फेटयुक्त ग्लाइकोसामिनोग्लाइकन है, जो परिसंचरण तंत्र के भीतर रुधिर वाहिनियों में रक्त के स्वतः जमने को रोकता है।
- 3. रुधिर स्कंदन प्रक्रिया (Blood clotting cascade) के दौरान, 'प्रोथ्रोम्बिन' को सक्रिय थ्रोम्बिन में बदलने के लिए कैल्शियम आयनों ($Ca^{2+}$) और थ्रोम्बोप्लास्टिन के साथ-साथ विटामिन $K$ की अनिवार्य आवश्यकता होती है, जो यकृत में प्रोथ्रोम्बिन के संश्लेषण को प्रेरित करता है।
- 4. जब किसी 'O' रक्त समूह के व्यक्ति को गलती से 'AB' रक्त समूह का रक्त चढ़ा दिया जाता है, तो प्राप्तकर्ता की आरबीसी (RBC) दाता के प्लाज्मा में उपस्थित एंटी-A और एंटी-B एंटीबॉडी के साथ मिलकर गंभीर एग्लूटीनेशन (विघटन) प्रतिक्रिया उत्पन्न करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 सही हैं। ABO रक्त समूह की वंशागति में $I^A$ और $I^B$ सह-प्रभावी होते हैं और यदि माता-पिता दोनों AB हैं (जीनोटाइप $I^A I^B$), तो उनके बच्चों में 'i' एलील नहीं आ सकता, अतः 'O' समूह (जीनोटाइप ii) असंभव है। हेपरिन यकृत और मास्ट कोशिकाओं/बेसोफिल्स द्वारा निर्मित प्राकृतिक प्रतिस्कंदक है। रुधिर स्कंदन में विटामिन K और $Ca^{2+}$ आवश्यक हैं। कथन 4 गलत है क्योंकि 'O' रक्त समूह के व्यक्ति (जिसके प्लाज्मा में एंटी-A और एंटी-B दोनों एंटीबॉडी होते हैं) को जब 'AB' रक्त समूह का रक्त दिया जाता है, तो दाता की लाल रक्त कोशिकाओं पर उपस्थित A और B एंटीजन, प्राप्तकर्ता के प्लाज्मा की एंटीबॉडी के साथ मिलकर गंभीर एग्लूटीनेशन करते हैं। इस विषय के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
→
आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों (Periodic properties) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी परमाणु की इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी (Electron Gain Enthalpy) हमेशा एक ऊष्माक्षेपी प्रक्रिया होती है जिसमें ऊर्जा निकलती है, और आवर्त सारणी में बाएं से दाएं जाने पर इसका मान अधिक ऋणात्मक होता जाता है।
2. लैंथानाइड संकुचन (Lanthanoid Contraction) के कारण, 5d संक्रमण श्रेणी के तत्वों (जैसे हाफ्नियम, Hf) की परमाण्विक और आयनिक त्रिज्याएँ अपने से ठीक ऊपर स्थित 4d श्रेणी के तत्वों (जैसे जिरकोनियम, Zr) के लगभग समान हो जाती हैं।
3. पॉलिंग पैमाने के अनुसार विद्युतऋणाता (Electronegativity) परमाणु के आकार और उसकी प्रभावी नाभिकीय आवेश पर निर्भर करती है, और आवर्त सारणी में नीचे से ऊपर जाने पर यह घटती है।
4. द्वितीय आवर्त के तत्व (जैसे लीथियम) अपने समूह के अगले तत्वों (जैसे मैग्नीशियम) के साथ रासायनिक गुणों में विकर्ण संबंध (Diagonal relationship) प्रदर्शित करते हैं, जिसका कारण उनके आयनिक विभव (चार्ज-से-रेडियस अनुपात) का लगभग समान होना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
पदार्थ के सामान्य गुणों, विशेषकर पृष्ठ तनाव (Surface Tension), श्यानता (Viscosity) और आर्किमिडीज के सिद्धांत के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी द्रव का पृष्ठ तनाव मुख्य रूप से उसके अणुओं के बीच लगने वाले ससंजक बलों (Cohesive forces) के कारण होता है, और तापमान बढ़ने पर अधिकांश द्रवों का पृष्ठ तनाव घट जाता है, जबकि साबुन या डिटर्जेंट जैसे पृष्ठसक्रिय एजेंट मिलाने पर जल का पृष्ठ तनाव बढ़ जाता है।
2. श्यानता द्रवों और गैसों का वह आंतरिक गुण है जो उनकी विभिन्न परतों के बीच होने वाली आपेक्षिक गति का विरोध करता है; उच्च ताप पर द्रवों की श्यानता घट जाती है, जबकि गैसों की श्यानता तापमान में वृद्धि होने पर बढ़ती है।
3. आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुसार, जब कोई वस्तु किसी द्रव में पूर्णतः या आंशिक रूप से डुबोई जाती है, तो वह अपने द्वारा हटाए गए द्रव के भार के बराबर आभासी कमी का अनुभव करती है, और उत्प्लावन बल विस्थापित द्रव के गुरुत्व केंद्र पर कार्य करता है।
4. केशिकत्व (Capillarity) की परिघटना का कारण ससंजक और आसंजक बल दोनों हैं; जब कांच की एक केशिका नली को जल में डुबोया जाता है, तो जल ऊपर चढ़ता है क्योंकि कांच और जल के बीच का आसंजक बल, जल के अणुओं के अपने संसंजक बल से अधिक होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
मानव रोगों, उनके संचरण के माध्यम और उनके उपचार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. स्वाइन फ्लू (H1N1) एक संक्रामक वायरल श्वसन रोग है जो मुख्य रूप से ड्रॉपलेट इन्फेक्शन के माध्यम से फैलता है, और इसके उपचार के लिए 'ओसेल्टामिविर' (Oseltamivir) जैसी एंटीवायरल दवा का उपयोग किया जाता है।
2. जापानी एन्सेफलाइटिस (Japanese Encephalitis) एक विषाणुजनित मस्तिष्क ज्वर है जिसका संचरण मुख्य रूप से 'मानसनिया' या 'क्यूलैक्स' प्रजाति की संक्रमित मादा मच्छरों के काटने से होता है, और यह सूअर तथा पक्षी जैसे कशेरुकी जीवों में प्रचुर मात्रा में पनपता है।
3. ट्रिकोफाइटन (Trichophyton) प्रजाति के कवक मानव में 'दाद' (Ringworm) रोग का कारण बनते हैं, जो त्वचा पर खुजलीदार चकत्ते उत्पन्न करते हैं, और इनके संक्रमण के निवारण के लिए फ्लूकोनाजोल या क्लोट्रिमजोल जैसी एंटीफंगल औषधियां दी जाती हैं।
4. रेबीज (Hydrophobia) एक जीवाणु जनित घातक रोग है जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को गंभीर रूप से प्रभावित करता है, और इसका संक्रमण संक्रमित कुत्ते या बिल्ली के लारयुक्त काटने के घाտ के माध्यम से मानव शरीर में प्रवेश करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
रासायनिक बंधन, अम्ल, क्षार और लवण (Acids, Bases and Salts) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लुईस अम्ल (Lewis acid) वे रासायनिक स्पीशीज होती हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म को ग्रहण करने की क्षमता रखती हैं (इलेक्ट्रॉन-युग्म ग्राही), जबकि लुईस क्षार वे होते हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म दान करने की प्रवृत्ति रखते हैं।
2. 'ब्रॉन्स्टेड-लोरी' (Bronsted-Lowry) अवधारणा के अनुसार, एक अम्ल वह पदार्थ है जो प्रोटॉन ($H^+$) का त्याग कर सकता है, और इसके द्वारा प्रोटॉन त्यागने के बाद बनने वाली स्पीशीज को उसका 'संयुग्मी क्षार' (Conjugate base) कहा जाता है, न कि संयुग्मी अम्ल।
3. जल की उपस्थिति में दुर्बल अम्ल आंशिक रूप से वियोजित होते हैं और उनके वियोजन स्थिरांक ($K_a$) का मान जितना अधिक होता है, वह अम्ल उतना ही अधिक प्रबल होता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
→
कार्बनिक रसायन में हाइड्रोकार्बन, उनके समवयव (Isomers) और ईंधन की दहन विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शाखित श्रृंखला वाले ऐल्केन (Branched-chain alkanes) की तुलना में सीधी श्रृंखला वाले ऐल्केन (Straight-chain alkanes) में ऑक्टेन संख्या अधिक होती है, जिसके कारण वे आंतरिक दहन इंजन (Internal combustion engines) में 'नॉकर्स' (Knockers) के रूप में कार्य करते हैं।
2. 'मार्कोवनीकॉव नियम' (Markovnikov's Rule) के अनुसार, किसी असममित ऐल्कीन पर हाइड्रोजन हैलाइड का योग होने पर अभिकर्मक का ऋणात्मक भाग उस कार्बन परमाणु से जुड़ता है जिस पर हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या कम होती है।
3. द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण होती है, जिसमें अत्यधिक गंध के लिए जानबूझकर एथिल मर्कैप्टेन ($C_2H_5SH$) नामक सल्फर यौगिक मिलाया जाता है ताकि गैस रिसाव का आसानी से पता चल सके।
4. एसिटिलीन (एथाइन) एक असंतृप्त हाइड्रोकार्बन है जो ऑक्सीजन की उपस्थिति में जलने पर अत्यधिक उच्च तापमान की लौ उत्पन्न करता है, जिसका उपयोग धातुओं की वेल्डिंग और कटाई के लिए ऑक्सी-एसिटिलीन टॉर्च में किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.