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General Science
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ध्वनि तरंगों और तरंग गति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी गैस में ध्वनि की चाल उस गैस के निरपेक्ष तापमान के वर्गमूल के सीधे आनुपातिक होती है, तथा गैस के घनत्व के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
- 2. लाप्लास द्वारा न्यूटन के ध्वनि की चाल के सूत्र में किए गए संशोधन के अनुसार, वायु में ध्वनि का संचरण एक समता isothermal प्रक्रिया है, क्योंकि संपीडन और विरलन के दौरान उत्पन्न ऊष्मा तुरंत परिवेश में स्थानांतरित हो जाती है।
- 3. जब एक अनुदैर्ध्य ध्वनि तरंग सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है, तो उसकी आवृत्ति अपरिवर्तित रहती है, किंतु तरंगदैर्ध्य और वेग दोनों में परिवर्तन हो जाता है।
- 4. डॉप्लर प्रभाव के अनुसार, जब ध्वनि स्रोत और श्रोता एक-दूसरे की ओर गति करते हैं, तो श्रोता द्वारा सुनी जाने वाली आभासी आवृत्ति वास्तविक आवृत्ति से कम प्रतीत होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि किसी गैस में ध्वनि की चाल $v = \sqrt{\frac{\gamma RT}{M}}$ के अनुसार तापमान के वर्गमूल के समानुपाती और घनत्व के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती होती है। कथन 2 गलत है क्योंकि लाप्लास संशोधन के अनुसार वायु में ध्वनि का संचरण एक **रुद्धोष्म (Adiabatic)** प्रक्रिया है, न कि समतापीय, क्योंकि यह प्रक्रिया इतनी तीव्र होती है कि ऊष्मा का आदान-प्रदान नहीं हो पाता है। कथन 3 सही है क्योंकि माध्यम बदलने पर तरंग की आवृत्ति अपरिवर्तित रहती है जबकि वेग और तरंगदैर्ध्य बदल जाते हैं। कथन 4 गलत है क्योंकि स्रोत और श्रोता के एक-दूसरे के पास आने पर आभासी आवृत्ति **अधिक** प्रतीत होती है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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लोहे में जंग लगना किस प्रकार की अभिक्रिया है?
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मानव शरीर के पाचन, श्वसन, परिसंचरण और तंत्रिका तंत्र की सूक्ष्म क्रियात्मक प्रणालियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आमाशय की भित्ति में स्थित पैराइटल या ऑक्सिंटिक कोशिकाएँ हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ-साथ 'कैसल का आंतरिक कारक' (Castle's intrinsic factor) स्रावित करती हैं, जो क्षुद्रांत के शोषी अंगों द्वारा विटामिन $B_{12}$ के अवशोषण के लिए अनिवार्य होता है।
2. फेफड़ों में गैसीय विनिमय के समय, जब रक्त सक्रिय ऊतकों से गुजरता है जहाँ उच्च $CO_2$ सांद्रता और कम $pH$ होता है, तो हीमोग्लोबिन की ऑक्सीजन के प्रति बंधुता घट जाती है, जिससे ऑक्सीजन का विमोचन आसान हो जाता है, जिसे 'बोर प्रभाव' (Bohr effect) कहा जाता है।
3. मानव हृदय के संवहन तंत्र में 'सिनोएट्रियल नोड' (SA Node) प्राकृतिक पेसमेकर के रूप में कार्य करता है क्योंकि यह स्वतः क्रियाविभव उत्पन्न करने की उच्चतम क्षमता रखता है, जबकि 'एट्रियोवेंट्रिकुलर नोड' (AV Node) आवेगों में थोड़ा विलंब उत्पन्न करता है ताकि आलिंदों का संकुचन निलयों के संकुचन से पूर्णतः पहले हो सके।
4. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में तंत्रिका तंतुओं पर माइलिन आच्छद (Myelin sheath) का निर्माण 'शवान कोशिकाओं' (Schwann cells) द्वारा किया जाता है, जो नमक-मेड़ संचरण (Saltatory conduction) के माध्यम से आवेगों के संचरण की गति को धीमा कर देती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव शरीर के रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों की जटिल आनुवंशिकी तथा उनकी जैव-रासायनिक संरचना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ABO रक्त समूहों की वंशागति में, 'H-एंटीजन' एक आवश्यक पूर्वगामी (Precursor) अणु के रूप में कार्य करता है जिस पर 'A' या 'B' विशिष्ट शर्कराएं जुड़ती हैं, और 'बॉम्बे फिनोटाइप' (Bombay phenotype) वाले व्यक्तियों में FUT1 जीन के उत्परिवर्तन के कारण इस H-एंटीजन का पूर्ण अभाव होता है, जिससे उनका रक्त किसी भी मानक ABO परीक्षण में 'O' समूह जैसा प्रतीत होने के बावजूद सीरम में एंटी-H एंटीबॉडी की उपस्थिति के कारण गंभीर आधान प्रतिक्रिया (Transfusion reaction) का कारण बन सकता है।
2. Rh रक्त समूह प्रणाली में, यदि Rh-ऋणात्मक माता के गर्भ में Rh-धनात्मक भ्रूण पल रहा हो, तो प्रसव के दौरान भ्रूण की लाल रक्त कोशिकाओं का माता के परिसंचरण तंत्र में प्रवेश करना प्राथमिक प्रतिरक्षा अनुक्रिया को ट्रिगर करता है, जिसके परिणामस्वरूप पहली संतान में भी गंभीर 'एरिथ्रोब्लास्टोसिस फिटेलिस' (Erythroblastosis fetalis) का खतरा उतना ही उच्च होता है जितना कि बाद की संतानों में।
3. रक्त प्लाज्मा में प्राकृतिक रूप से पाई जाने वाली 'एंटी-A' और 'एंटी-B' आइसोएग्लूटेनिन (Isoagglutinins) मुख्य रूप से IgM प्रकार की इम्युनोग्लोबुलिन होती हैं, जो बड़ी पंचमर संरचना (Pentameric structure) के कारण प्लेसेंटा को पार करने में असमर्थ होती हैं, जबकि Rh कारकों के विरुद्ध उत्पन्न होने वाली एंटीबॉडी आमतौर पर IgG प्रकार की होती हैं जो प्लेसेंटा को आसानी से पार कर सकती हैं।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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जीवाणुभोजी (Bacteriophages) के आनुवंशिक संगठन और हर्षे-चेस (Hershey-Chase) प्रयोग के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हर्षे-चेस प्रयोग ने यह निर्णायक प्रमाण दिया कि आनुवंशिक पदार्थ डीएनए है, जिसके लिए उन्होंने रेडियोधर्मी समस्थानिकों सल्फर-35 ($^{35}S$) का उपयोग प्रोटीन कोट को चिह्नित करने के लिए और फॉस्फोरस-32 ($^{32}P$) का उपयोग डीएनए को चिह्नित करने के लिए किया था।
2. जब एक टी-समूह ($T_2$) जीवाणुभोजी किसी बैक्टीरिया को संक्रमित करता है, तो उसका संपूर्ण न्यूक्लियोप्रोटीन कैप्सिड (Protein coat) बैक्टीरिया की कोशिका भित्ति को भेदकर अंदर प्रवेश कर जाता है, जबकि डीएनए बाहर ही छूट जाता है।
3. अधिकांश जीवाणुभोजी में आनुवंशिक पदार्थ के रूप में द्वि-रज्जुक डीएनए (Double-stranded DNA) पाया जाता है, किंतु कुछ ऐसे भी भोजी होते हैं जिनमें एकल-रज्जुक डीएनए या आरएनए भी आनुवंशिक पदार्थ के रूप में उपस्थित हो सकता है।
4. जीवाणुभोजी द्वारा अनुवांशिक सूचनाओं के एक जीवाणु से दूसरे जीवाणु में स्थानांतरण की प्रक्रिया को पारक्रमण (Transduction) कहा जाता है, जिसकी खोज जेंडर और लेडरबर्ग द्वारा साल्मोनेला टाइफिमुरियम में की गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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ध्वनि वेग?
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