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General Science
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यांत्रिकी (Mechanics) में कार्य, ऊर्जा और संवेग के संरक्षण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. जब किसी वस्तु पर एक संरक्षी बल (Conservative force) द्वारा कार्य किया जाता है, तो उस बल द्वारा किया गया कार्य पथ पर निर्भर नहीं करता है, बल्कि यह केवल वस्तु की प्रारंभिक और अंतिम स्थितियों पर निर्भर करता है, और इस स्थिति में यांत्रिक ऊर्जा संरक्षित रहती है।
- 2. प्रत्यास्थ टक्कर (Elastic collision) में कुल गतिज ऊर्जा और कुल रैखिक संवेग दोनों संरक्षित रहते हैं, जबकि अप्रत्यास्थ टक्कर (Inelastic collision) में केवल रैखिक संवेग संरक्षित रहता है, गतिज ऊर्जा संरक्षित नहीं रहती है।
- 3. कोणीय संवेग संरक्षण का नियम इस बात पर आधारित है कि यदि किसी निकाय पर लगने वाला बाह्य बल आघूर्ण (External Torque) शून्य हो, तो निकाय का कुल कोणीय संवेग नियत रहता है, जैसे कि सूर्य के चारों ओर घूमते हुए ग्रह की कक्षीय गति।
- 4. अश्वशक्ति (Horsepower) शक्ति की एक व्यावसायिक इकाई है, जहाँ 1 अश्वशक्ति का मान ठीक 746 वाट के बराबर होता है और यह ऊर्जा के परिवर्तन की दर को प्रदर्शित करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। यांत्रिकी में, संरक्षी बल (जैसे गुरुत्वाकर्षण बल या स्थिरवैद्युत बल) के अंतर्गत किया गया कार्य पथ पर निर्भर नहीं करता और यांत्रिक ऊर्जा को संरक्षित रखता है। टक्करों के अध्ययन में, प्रत्यास्थ टक्करों में रैखिक संवेग और गतिज ऊर्जा दोनों संरक्षित रहते हैं, जबकि अप्रत्यास्थ टक्करों में गतिज ऊर्जा का ह्रास होता है। कोणीय संवेग संरक्षण का सिद्धांत केंद्रीय बलों के अंतर्गत घूमने वाली वस्तुओं (जैसे ग्रहों की गति) पर लागू होता है। इसके अतिरिक्त, विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार शक्ति की इकाई वाट है और 1 अश्वशक्ति (Horsepower) 746 वाट के समतुल्य होती है।
Related Questions
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मानव शरीर में होने वाले विभिन्न संक्रामक रोगों, उनके रोगजनकों (Pathogens) और उनके संचरण या निदान के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'टाइफाइड' (Typhoid) एक जीवाणु जनित प्रणालीगत संक्रमण है जो साल्मोनेला टाइफी (Salmonella typhi) के कारण होता है, और इसके संचरण का मुख्य माध्यम दूषित जल और भोजन है, जिसकी पुष्टि के लिए 'विडाल परीक्षण' (Widal test) किया जाता है।
2. 'काली खांसी' (Pertussis) या हूइंग कफ बोरदटेला परट्यूसिस (Bordetella pertussis) नामक जीवाणु के कारण होता है, जो श्वसन नली के उपकला ऊतक को संक्रमित करता है और इसके विरुद्ध बच्चों को 'डीपीटी' (DPT) का टीका दिया जाता है।
3. 'मलेरिया' एक प्रोटोजोआ जनित रोग है जो प्लाज्मोडियम की विभिन्न प्रजातियों के कारण होता है, और इसके परजीवी का जीवन चक्र पूरा होने के लिए मादा एनाफिलिस मच्छर के साथ-साथ मानव यकृत और लाल रक्त कणिकाओं (RBC) की आवश्यकता होती है, जहाँ हीमोज़ोइन (Hemozoin) नामक विषैला पदार्थ ठंड के साथ तेज बुखार के लिए उत्तरदायी होता है।
4. 'क्षय रोग' (Tuberculosis) माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक जीवाणु के कारण होने वाला एक विषाणु जनित रोग है, जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है और इसके निदान के लिए 'डिक परीक्षण' (Dick test) अनिवार्य रूप से किया जाता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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सुपरकंडक्टर की सबसे बड़ी विशेषता क्या है?
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पादप जगत के वर्गीकरण और पादप कार्यिकी (Plant Physiology) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. टेरिडोफाइट्स (Pteridophytes) प्रथम ऐसे स्थलीय पौधे हैं जिनमें संवहन ऊतक (ज़ाइलम और फ्लोएम) पाए जाते हैं, किंतु इनमें बीज और पुष्प अनुपस्थित होते हैं और इनका मुख्य पादप शरीर बीजाणुद्भिद (Sporophyte) होता है।
2. C4 चक्र प्रदर्शित करने वाले पौधों (जैसे मक्का और गन्ने) की पत्तियों में 'क्रेज एनाटॉमी' (Kranz Anatomy) पाई जाती है, जिसमें बंडल शीथ कोशिकाओं के चारों ओर क्लोरोप्लास्ट से युक्त मेसोफिल कोशिकाएँ एक वलय के रूप में व्यवस्थित होती हैं।
3. 'ऑक्सीन' (Auxin) पादप हॉर्मोन मुख्य रूप से तने और जड़ के शीर्ष पर संश्लेषित होता है, जो शीर्ष प्रमुखता (Apical Dominance) को प्रेरित करता है तथा पार्श्व कलिकाओं (Lateral buds) की वृद्धि को संदमित करता है।
4. प्रकाश श्वसन (Photorespiration) C3 पौधों में होने वाली एक अपव्ययी प्रक्रिया है, जो उच्च ऑक्सीजन सांद्रता और प्रकाश की अधिकता के दौरान 'रुबिस्को' (RuBisCO) एंजाइम की कार्बोक्सिलेज़ के बजाय ऑक्सीजिनेज़ गतिविधि के कारण होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कार्बनिक रसायन और हाइड्रोकार्बन के वैचारिक पहलुओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एल्केन्स (Alkanes) संतृप्त हाइड्रोकार्बन होते हैं जिनमें सभी कार्बन-कार्बन बंध एकल (Single) सहसंयोजक बंध होते हैं, और ये मुख्य रूप से मुक्त मूलक प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं (Free radical substitution reactions) में भाग लेते हैं।
2. 'मार्कोवनीकॉव नियम' (Markovnikov's Rule) के अनुसार, किसी असममित एल्कीन पर सममित या असममित अभिकर्मक (जैसे HBr) के योग के दौरान, अभिकर्मक का ऋणात्मक भाग उस द्विआबंधी कार्बन परमाणु से जुड़ता है जिस पर हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या अधिक होती है।
3. 'एसेटिलीन' (Acetylene) या एथाइन एक ऐल्काइन है, जिसे जब लाल तप्त लोहे की नली में 873 K तापमान पर प्रवाहित किया जाता है, तो यह चक्रीय बहुलकीकरण (Cyclic polymerization) के माध्यम से बेंजीन का निर्माण करता है।
4. पेट्रोलियम शोधन के दौरान 'ऑकोटेन संख्या' (Octane Number) पेट्रोल की 'अपस्फोटन-रोधी' (Anti-knocking) क्षमता का माप होती है, जिसमें उच्च ऑक्टेन संख्या वाला ईंधन (जैसे आइसो-ऑक्टेन) निम्न ऑक्टेन संख्या वाले ईंधन (जैसे एन-हेप्टेन) की तुलना में इंजन में बेहतर प्रदर्शन करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव शरीर के तंत्रों की कार्यप्रणाली (Physiology) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आमाशय की मुख्य या पैराइटल (Parietal) कोशिकाएँ हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ-साथ 'कैसल का आंतरिक कारक' (Castle's intrinsic factor) का स्रावण करती हैं, जो क्षुद्रांत में विटामिन B12 के अवशोषण के लिए अनिवार्य होता है।
2. कशेरुकियों में श्वसन गैसों के परिवहन के दौरान, जब रक्त सक्रिय ऊतकों से फेफड़ों की ओर बढ़ता है, तो उच्च $O_2$ सांद्रता और अधिक $pH$ के कारण हीमोग्लोबिन की ऑक्सीजन के प्रति बंधुता (Affinity) घट जाती है, जिसे 'बोर प्रभाव' (Bohr effect) कहा जाता है।
3. मानव हृदय में 'सिनोएट्रियल नोड' (SA Node) स्वतः उत्तेजना उत्पन्न करने की क्षमता रखता है जिसके कारण इसे प्राकृतिक 'पेसमेकर' कहा जाता है, जबकि 'एट्रियोवेंट्रिकुलर नोड' (AV Node) आवेगों के संचरण में थोड़ा विलंब उत्पन्न करता है जिससे आलिंदों का संकुचन निलय के संकुचन से पहले पूरी तरह समाप्त हो सके।
4. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में माइलिन आच्छद (Myelin sheath) का निर्माण परिधीय तंत्रिका तंत्र में 'शवान कोशिकाओं' (Schwann cells) द्वारा और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में 'ओलिगोडेंड्रोसाइट्स' (Oligodendrocytes) द्वारा किया जाता है, जो नमक-मेड़ संचरण (Saltatory conduction) के माध्यम से आवेगों की गति को तीव्र करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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