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General Science
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) और पादप हॉर्मोन्स के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. अनावृतबीजी (Gymnosperms) पौधों में बीज नग्न होते हैं क्योंकि इनमें अंडाशय भित्ति पूर्णतः अनुपस्थित होती है, और इनका भ्रूणपोष (Endosperm) निषेचन से पहले बनने के कारण अगुणित (n) प्रकृति का होता है।
- 2. केल्विन चक्र (C3 चक्र) में कार्बन डाइऑक्साइड का प्राथमिक ग्राही एक 5-कार्बन यौगिक 'रिबुलोस 1,5-बिफॉसफेस' (RuBP) होता है, और यह अभिक्रिया 'रुबिस्को' एंजाइम द्वारा उत्प्रेरित होती है, जो पृथ्वी पर सबसे प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला एंजाइम है।
- 3. साइटोकिनीन (Cytokinin) पादप हॉर्मोन मुख्य रूप से जड़ों के अग्रभाग पर संश्लेषित होता है और यह कोशिका विभाजन को प्रेरित करने के साथ-साथ 'जीर्णता' (Senescence) की प्रक्रिया को विलंब करने में सहायता करता है।
- 4. प्रकाश संश्लेषण के दौरान प्रकाश-स्वतंत्र अभिक्रिया (Dark reaction या केल्विन चक्र) सीधे तौर पर सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति पर निर्भर करती है और यह पौधे की हरित लवक की थाइलाकोइड झिल्ली में घटित होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: अनावृतबीजी (Gymnosperms) पौधों में बीजांड किसी अंडाशय भित्ति से ढके नहीं होते हैं, अतः बीज नग्न होते हैं। इसके अलावा, इनका भ्रूणपोष निषेचन से पहले बनता है और यह अगुणित (n) होता है (जबकि आवृतबीजी पौधों में यह त्रिगुणी 3n होता है)। कथन 2 सही है: C3 चक्र में $CO_2$ का प्राथमिक ग्राही 5-कार्बन यौगिक RuBP है और RuBisCO इसका मुख्य उत्प्रेरक है। कथन 3 सही है: साइटोकिनीन मुख्य रूप से उन क्षेत्रों में संश्लेषित होता है जहाँ तेजी से कोशिका विभाजन होता है जैसे जड़ के सिरे, और यह क्लोरोफिल के क्षس को रोककर जीर्णता (बुढ़ापा) को विलंब करता है। कथन 4 गलत है: प्रकाश-स्वतंत्र अभिक्रिया (केल्विन चक्र) प्रकाश पर सीधे निर्भर नहीं करती (यद्यपि यह प्रकाशीय अभिक्रिया के उत्पादों ATP और NADPH पर निर्भर होती है) और यह हरित लवक के 'स्ट्रोमा' (Stroma) में होती है, न कि थाइलाकोइड झिल्ली में। पादपों और उनके जैव प्रक्रमों की विस्तृत जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
Related Questions
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मानव शरीर में जैविक अणुओं और पोषण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विटामिन B$_1$ (थायमिन) का सक्रिय सह-एंजाइम रूप 'थायमिन पाइरोफॉस्फेट' (TPP) है, जो कार्बोहाइड्रेट उपापचय के दौरान पाइरुविक एसिड के ऑक्सीडेटिव डिकार्बोक्सिलेशन में मुख्य भूमिका निभाता है।
2. ग्लाइकोजन (Glycogen) एक शाखित पॉलिसैराइड है जिसे 'जंतु स्टार्च' भी कहा जाता है, जिसका भंडारण मुख्य रूप से यकृत और कंकाल पेशियों में होता है, और इसमें ग्लूकोज इकाइयाँ आपस में $\alpha-1,4$ ग्लाइकोसाइडिक बंधों तथा शाखा बिंदुओं पर $\alpha-1,6$ ग्लाइकोसाइडिक बंधों द्वारा जुड़ी होती हैं।
3. आवश्यक अमीनो अम्ल (Essential Amino Acids) वे होते हैं जिनका संश्लेषण मानव शरीर के भीतर पर्याप्त मात्रा में नहीं हो पाता है, इसलिए उन्हें आहार के माध्यम से लेना अनिवार्य होता है, जैसे कि वैलीन, ल्यूसिन और आइसोल्यूसिन।
4. विटामिन D एक जल-विलेय विटामिन है जो शरीर में कैल्शियम और फॉस्फोरस के होमियोस्टेसिस को विनियमित करने के लिए steroid हार्मोन की तरह कार्य करता है, और इसकी कमी से वयस्कों में 'ऑस्टियोमैलेशिया' रोग हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव रोगों, उनके रोगजनकों और संचरण तंत्र के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'टिटनेस' (Tetanus) क्लोस्ट्रिडियम टेटानी (Clostridium tetani) नामक जीवाणु के कारण होता है, जो एक बीजाणु-उत्पादक (Spore-forming) और आबध्य अवायवीय (Obligate anaerobic) जीवाणु है, तथा इसका विषैला एक्सोटॉक्सिन 'टेटनोस्पैस्मिन' केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है।
2. 'काली खांसी' (Pertussis) या हूइंग कफ बोरडेटेला परट्यूसिस (Bordetella pertussis) नामक ग्राम-ऋणात्मक जीवाणु के कारण होता है, जो श्वसन नली के उपकला ऊतक को संक्रमित करता है और पक्षाभ (Cilia) की गति को नष्ट कर देता है।
3. 'लैप्रॉसी' (कुष्ठ रोग) माइकोबैक्टीरियम लेप्रे (Mycobacterium leprae) के कारण होता है, जो एक अंतःकोशिकी परजीवी है और यह मुख्य रूप से केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है, जबकि परिधीय तंत्रिकाएँ इससे अप्रभावित रहती हैं।
4. 'अमीबायसिस' (अमीबी पेचिश) एंटाअमीबा हिस्टोलिटिका (Entamoeba histolytica) नामक एक परजीवी प्रोटोजोआ के कारण होता है, जिसका संक्रमण संदूषित जल और भोजन के सेवन से होता है और यह मुख्य रूप से बड़ी आंत को संक्रमित करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक गुणों तथा निष्कर्षण प्रक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'अलुमिनोथर्मिक विधि' (Goldschmidt Thermite Process) में एल्युमिनियम एक शक्तिशाली अपचायक के रूप में कार्य करता है, जिसका उपयोग फेरिक ऑक्साइड ($Fe_2O_3$) के साथ मिश्रित कर रेलवे की पटरियों या टूटी हुई मशीनों के भारी लोहे के भागों को जोड़ने के लिए किया जाता है, और यह अभिक्रिया अत्यधिक ऊष्माक्षेपी (Exothermic) होती है।
2. 'एक्वा रेजिया' (Aqua Regia) सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और सांद्र नाइट्रिक अम्ल का 1:3 के आयतन अनुपात में ताजा तैयार किया गया मिश्रण होता है, जो स्वर्ण और प्लैटिनम जैसी उत्कृष्ट धातुओं को भी घोलने में पूरी तरह सक्षम होता है।
3. 'सफेद फॉस्फोरस' (White Phosphorus) एक अत्यंत क्रियाशील, विषैला और दीप्तिमान ठोस है जो अंधेरे में चमकता है, और इसे हवा में सुरक्षित रखने के लिए जल के अंदर डुबोकर रखा जाता है क्योंकि यह वायु के संपर्क में आते ही स्वतः प्रज्वलित होकर जल उठता है।
4. 'जिंक ब्लेंड' ($ZnS$) अयस्क के सांद्रण के लिए 'फेन प्लवन विधि' (Froth Flotation Process) का उपयोग किया जाता है, जबकि सल्फाइड अयस्क को ऑक्साइड में बदलने के लिए 'भर्जन' (Roasting) प्रक्रिया अपनाई जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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आवर्त सारणी के तत्वों के आवर्ती गुणों (Periodic Properties) और उनके रासायनिक व्यवहार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु त्रिज्या घटती है और प्रभावी नाभिकीय आवेश ($Z_{eff}$) में वृद्धि होती है, जिसके कारण प्रथम आयनन एन्थैल्पी का मान सामान्यतः बढ़ता है, हालांकि ऑक्सीजन की तुलना में नाइट्रोजन की प्रथम आयनन एन्थैल्पी अधिक होती है क्योंकि नाइट्रोजन में अर्ध-पूरित (Half-filled) $2p$ कक्षकों का अतिरिक्त स्थायित्व पाया जाता है।
2. 'इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी' (Electron Gain Enthalpy) का मान सभी तत्वों के लिए हमेशा ऋणात्मक होता है, और किसी भी उदासीन गैसीय परमाणु द्वारा एक अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने पर हमेशा ऊर्जा का उत्सर्जन ही होता है, चाहे उस परमाणु का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास या आकार कुछ भी हो।
3. हैलोजन समूह में फ्लोरीन ($F$) की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का ऋणात्मक मान अपने ही समूह के अगले तत्व क्लोरीन ($Cl$) की तुलना में अधिक (अधिक ऋणात्मक) होता है, क्योंकि फ्लोरीन का आकार बहुत छोटा होता है जिसके कारण अंतःइलेक्ट्रॉनी प्रतिकर्षक बल का मान कम हो जाता है।
4. लैंथानाइड संकुचन (Lanthanoid contraction) के कारण $5d$ श्रेणी के संक्रमण तत्वों (जैसे हाफ्नियम, $Hf$) की परमाणु और आयनिक त्रिज्याएँ अपने ठीक ऊपर स्थित $4d$ श्रेणी के तत्वों (जैसे जिरकोनियम, $Zr$) के लगभग बराबर हो जाती हैं।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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एल्केन सामान्य सूत्र?
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