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General Science
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प्रकाशिकी (Optics) के सिद्धांतों और लेंस-दर्पण के व्यवहार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. जब प्रकाश की किरण किसी सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है और आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण (Critical Angle) से अधिक हो जाता है, तो किरण का पूर्ण आंतरिक परावर्तन होता है, जिसके लिए यह आवश्यक है कि प्रकाश सघन से विरल माध्यम की ओर ही जाए।
  2. 2. एक उत्तल लेंस (Convex lens) को जब ऐसे द्रव में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से अधिक होता है, तो वह लेंस अपनी अभिसारी (Converging) प्रकृति को छोड़कर अपसारी (Diverging) लेंस की तरह व्यवहार करने लगता है।
  3. 3. अवतल दर्पण (Concave mirror) द्वारा बनने वाला प्रतिबिंब हमेशा आभासी, सीधा और वस्तु के आकार से छोटा होता है, चाहे वस्तु को मुख्य अक्ष पर किसी भी स्थिति में क्यों न रखा जाए।
  4. 4. गोलीय दर्पण की फोकस दूरी ($f$) उसकी वक्रता त्रिज्या ($R$) की आधी होती है, और यह संबंध दर्पण के दर्पण सूत्र तथा सभी प्रकार के दर्पणों (गोलीय और परवलयिक) के लिए आपतन कोण के किसी भी बड़े मान हेतु पूर्णतः सटीक और सार्वभौमिक रूप से लागू होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) के लिए प्रकाश का सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाना और आपतन कोण का क्रांतिक कोण से अधिक होना अनिवार्य शर्त है। कथन 2 सही है क्योंकि लेंस का अपवर्तनांक यदि चारों ओर के माध्यम के अपवर्तनांक से कम हो जाता है, तो लेंस की प्रकृति उलटी हो जाती है (अभिसारी से अपसारी)। कथन 3 गलत है क्योंकि अवतल दर्पण वास्तविक और उल्टे प्रतिबिंब भी बनाता है (जब वस्तु फोकस के बाहर हो)। कथन 4 गलत है क्योंकि $f = R/2$ केवल परम्परागत रूप से छोटे द्वारक (Paraxial rays) वाले गोलीय दर्पणों के लिए ही सन्निकट रूप (approximation) में सत्य होता है, बड़े द्वारक या परवलयिक दर्पणों के लिए यह सर्वथा सटीक नहीं है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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