त्वरित लिंक्स
General Science
8 views
परमाणु संरचना और पदार्थ की अवस्थाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. थॉमसन के परमाणु मॉडल (प्लम पुडिंग मॉडल) के अनुसार, परमाणु एक धनात्मक आवेशित गोला है जिसमें इलेक्ट्रॉन उसी तरह अंतःस्थापित रहते हैं जैसे तरबूज में बीज, और यह मॉडल परमाणु के कुल विद्युत उदासीन होने की संतोषजनक व्याख्या करता है, यद्यपि यह रदरफोर्ड के प्रकीर्णन प्रयोग के परिणामों को समझाने में विफल रहा।
- 2. जब किसी गैस को बहुत कम दाब पर रखकर उसमें उच्च विद्युत विभव लगाया जाता है, तो गैस आयनित होकर प्लाज़्मा अवस्था में परिवर्तित हो जाती है, जो पदार्थ की चौथी अवस्था है और इसमें अत्यधिक ऊर्जावान मुक्त इलेक्ट्रॉन तथा धनात्मक आयन होते हैं।
- 3. 'बोस-आइन्स्टाइन कंडेनसेट' (BEC) पदार्थ की वह अवस्था है जिसे अत्यंत कम घनत्व वाली गैस को परम शून्य (Absolute Zero) के अतिसमीप तापमान तक ठंडा करने पर प्राप्त किया जाता है, जहाँ सभी कण न्यूनतम संभावित ऊर्जा अवस्था में एक ही क्वांटम अवस्था में संगमित हो जाते हैं।
- 4. क्वांटम यांत्रिकी के अनुसार, किसी बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणु में ऊर्जा स्तरों के भराव के लिए 'हूँड का नियम' यह निर्धारित करता है कि किसी उपकोश के कक्षकों में युग्मन तब तक नहीं हो सकता जब तक कि प्रत्येक कक्षक में एक-एक इलेक्ट्रॉन न आ जाए, लेकिन इसके लिए यह बिल्कुल आवश्यक नहीं है कि उन सभी अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों के चक्रण (Spin) समान हों।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सही हैं। थॉमसन का मॉडल परमाणु की उदासीनता को स्पष्ट करता है, प्लाज़्मा उच्च ऊर्जा वाली आयनित अवस्था है, और बोस-आइन्स्टाइन कंडेनसेट परम शून्य के करीब प्राप्त की जाने वाली अवस्था है। कथन 4 गलत है क्योंकि 'हूँड के अधिकतम बहुकता नियम' (Hund's rule of maximum multiplicity) के अनुसार उपकोश के कक्षकों में भरे जाने वाले अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों के चक्रण (Spin) समान दिशा में होने चाहिए ताकि बहुकता अधिकतम हो सके। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
Related Questions
→
मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों (Blood Groups) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एरिथ्रोब्लास्टोसिस फेटलिस (Erythroblastosis foetalis) एक ऐसी स्थिति है जो तब उत्पन्न होती है जब एक Rh-धनात्मक (Rh+) पिता और Rh-ऋणात्मक (Rh-) माता का Rh-धनात्मक गर्भस्थ शिशु होता है, जिससे पहले गर्भधारण के दौरान ही माता के शरीर में Rh प्रति-एंटीबॉडी का अत्यधिक निर्माण हो जाता है जो शिशु के लिए घातक होता है।
2. 'O' रक्त समूह वाले व्यक्तियों के प्लाज्मा में एंटी-A और एंटी-B दोनों प्राकृतिक एंटीबॉडी उपस्थित होते हैं, जिसके कारण उन्हें 'सार्वभौमिक दाता' (Universal Donor) माना जाता है, क्योंकि उनकी लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) की सतह पर कोई एंटीजन (A या B) नहीं होता है।
3. रुधिर स्कंदन (Blood Coagulation) की कैस्केड प्रक्रिया में, प्रोथ्रोम्बिन को थ्रोम्बिन में बदलने के लिए थ्रॉम्बोकाइनेज (Thrombokinase) एंजाइम की आवश्यकता होती है, जो कैल्सियम आयनों ($Ca^{2+}$) की उपस्थिति में कार्य करता है।
4. मानव शरीर में 'एन्जियोटेंसिन-II' एक शक्तिशाली वाहिकासंकीर्णक (Vasoconstrictor) है जो वृक्क के जुक्स्टाग्लोमेरुलर तंत्र द्वारा रेनिन के स्रावण से प्रेरित होकर रक्तचाप को बढ़ाता है और एल्डोस्टेरोन के स्रावण को उद्दीपित करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) और पादप हार्मोन्स के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स (Bryophytes) को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये पौधे मिट्टी में उगते हैं लेकिन लैंगिक जनन के लिए जल पर निर्भर करते हैं, और इनमें वास्तविक संवहनी ऊतक (जाइलम और फ्लोएम) पूरी तरह अनुपस्थित होते हैं।
2. C4 पौधों में प्रकाश संश्लेषण की दर C3 पौधों की तुलना में अधिक होती है क्योंकि इनमें 'हैच-स्लैग मार्ग' पाया जाता है और इनका प्राथमिक कार्बन डाइऑक्साइड ग्राही 'फॉस्फेनाइलपाइरुवेट' (PEP) होता है, जो रुबिस्को एंजाइम की फोटोरेस्पिरेशन (प्रकाश श्वसन) प्रवृत्ति को कम कर देता है।
3. 'साइटोकिनीन' (Cytokinin) एक प्राकृतिक पादप हॉर्मोन है जो मुख्य रूप से कोशिका विभाजन को प्रेरित करता है, शीर्ष प्रमुखता (Apical dominance) को बढ़ावा देता है और पत्तियों में जीर्णता (Senescence) को त्वरित करने का कार्य करता है।
4. 'एब्सिसिक एसिड' (ABA) को 'तनाव हॉर्मोन' (Stress hormone) कहा जाता है, जो प्रतिकूल जल तनाव की स्थिति में रंध्रों (Stomata) को बंद करने और बीजों के प्रसुप्तिकरण (Dormancy) को प्रेरित करने में मुख्य भूमिका निभाता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
→
समांग और विषमांग उत्प्रेरण (Homogeneous and Heterogeneous Catalysis) तथा विलयन के अणुसंख्यक गुणों (Colligative properties) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. समांग उत्प्रेरण में अभिकारक और उत्प्रेरक दोनों समान भौतिक अवस्था (सामान्यतः द्रव या गैस) में होते हैं, जबकि विषमांग उत्प्रेरण में ठोस उत्प्रेरकों की सतह पर अभिकारकों का अधिशोषी सक्रियण (Adsorptive activation) होता है, जो रासायनिक अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा (Activation energy) को कम कर देता है।
2. वाष्पशील विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर विलयन के वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन (Relative lowering of vapour pressure) विलेय के मोल अंश के बराबर होता है, और यह 'राउल्ट का नियम' केवल आदर्श विलयनों द्वारा ही सभी सांद्रता सीमाओं पर सटीकता से पालन किया जाता है।
3. कोलॉइडी विलयनों (Colloidal solutions) में प्रक्षिप्त प्रावस्था (Dispersed phase) के कणों द्वारा आपतित प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण उत्पन्न होने वाले 'टिंडल प्रभाव' (Tyndall effect) को देखने के लिए यह आवश्यक है कि प्रक्षिप्त कणों का व्यास आपतित प्रकाश की तरंगदैर्ध्य की तुलना में बहुत अधिक हो।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
→
विलयन और उत्प्रेरण (Solutions and Catalysis) की रासायनिक गतिकी तथा ऊष्मागतिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हेनरी का नियम (Henry's law) यह बताता है कि किसी तरल में गैस की विलेयता उस गैस के आंशिक दाब के व्युत्क्रमानुपाती होती है, बशर्ते तापमान स्थिर रहे और गैस तरल के साथ कोई रासायनिक अभिक्रिया न करे।
2. 'विषमांगी उत्प्रेरण' (Heterogeneous catalysis) के 'अधिष्ोषण सिद्धांत' (Adsorption theory) के अनुसार, उत्प्रेरक की सतह पर अभिकारकों का भौतिक या रासायनिक अधिशोषक होना अभिक्रिया वेग को बढ़ाता है क्योंकि इससे सक्रियण ऊर्जा (Activation energy) का मान कम हो जाता है।
3. विशिष्ट उत्प्रेरक विष (Catalytic poison) वे पदार्थ होते हैं जो किसी उत्प्रेरक की सतह पर दृढ़ता से अधिशोषित होकर उसकी सक्रियता को पूरी तरह से समाप्त या कम कर देते हैं, जिससे उत्प्रेरकीय अभिक्रिया अवरुद्ध हो जाती है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
→
वायुदाब का मापक?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.