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General Science
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कार्बनिक रसायन में हाइड्रोकार्बन के नामकरण, समवयवता (Isomerism) और रासायनिक अभिक्रियाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. ऐल्केन (Alkanes) श्रृंखला में जैसे-जैसे कार्बन परमाणुओं की संख्या बढ़ती है, श्रृंखला समवयवीयों (Chain isomers) की संख्या भी तेजी से बढ़ती है, उदाहरण के लिए हेप्टेन ($C_7H_{16}$) के कुल 9 संरचनात्मक समवयवी संभव हैं।
- 2. जब किसी असममित ऐल्कीन पर हाइड्रोजन हैलाइड (जैसे $HBr$) का योग होता है, तो 'मार्कोवनीकॉव नियम' (Markovnikov's rule) के अनुसार ऋणात्मक भाग उस कार्बन परमाणु पर जुड़تا है जिसके पास हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या न्यूनतम होती है।
- 3. बेन्जीन ($C_6H_{6}$) में सभी छह कार्बन-कार्बन बंधों की लंबाई समान होती है (लगभग $139\text{ pm}$), जो एकल और द्विबंध के बीच की होती है, और इसका मुख्य कारण डोकैलाइन संरचनाओं (Kekulé structures) के बीच का अनुनाद (Resonance) है।
- 4. ऐल्काइन्स (Alkynes) में कार्बन-कार्बन त्रिबंध ($C \equiv C$) उपस्थित होता है, जिसमें एक मजबूत सिग्मा बंध और दो कमजोर पाई बंध होते हैं, और ये असंतृप्त हाइड्रोकार्बन होने के कारण अमोनियायुक्त कॉपर क्लोराइड विलयन के साथ लाल अवक्षेप बनाते हैं यदि वे टर्मिनल ऐल्काइन हों।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
इस प्रश्न में दिए गए कथनों का विश्लेषण इस प्रकार है: कथन 1 सही है क्योंकि हेप्टेन ($C_7H_{16}$) के कुल 9 संरचनात्मक (chain/structural) समवयवी होते हैं। कथन 2 सही है, मार्कोवनीकॉव नियम के अनुसार असममित ऐल्कीन पर अभिकर्मक का ऋणात्मक भाग उस कार्बन पर जुड़ता है जिस पर कम हाइड्रोजन परमाणु होते हैं। कथन 3 सही है, बेन्जीन में अनुनाद (Resonance) के कारण सभी C-C बंधों की लंबाई समान ($139\text{ pm}$) होती है, जो एकल और द्विबंध का मध्यवर्ती मान है। इसके बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ पढ़ सकते हैं। कथन 4 सही है, टर्मिनल ऐल्काइन (अम्लीय हाइड्रोजन युक्त) अमोनियायुक्त क्यूप्रस क्लोराइड के साथ लाल/भूरा अवक्षेप बनाते हैं। अतः कथन 1, 3 और 4 सही हैं।
Related Questions
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आवर्त सारणी में तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुणों में आवर्तिता (Periodicity) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी परमाणु की 'प्रथम आयनन एन्थैल्पी' (First Ionization Enthalpy) का मान सामान्यतः आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर बढ़ता है, किंतु समूह 15 के तत्वों (जैसे नाइट्रोजन) की प्रथम आयनन एन्थैल्पी अपने ठीक बाद आने वाले समूह 16 के तत्वों (जैसे ऑक्सीजन) से अधिक होती है, जिसका प्रमुख कारण नाइट्रोजन के $2p$ कक्षकों का अर्ध-पूरित (Half-filled) होना और इसका अतिरिक्त स्थायित्व है।
2. 'इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी' (Electron Gain Enthalpy) का मान फ्लोरिन की तुलना में क्लोरीन के लिए अधिक ऋणात्मक (अधिक ऊष्माक्षेपी) होता है, जिसका मुख्य कारण फ्लोरिन के परमाण्विक आकार का अत्यंत छोटा होना है, जिससे आने वाले इलेक्ट्रॉन पर तीव्र अंतःइलेक्ट्रॉनी प्रतिकर्षण (Interelectronic repulsion) उत्पन्न होता है।
3. आधुनिक आवर्त सारणी में 'लैंथेनाइड आकुंचन' (Lanthanoid Contraction) के परिणामस्वरूप, छठे आवर्त के संक्रमण तत्वों (जैसे हाफ्नियम, Hf) की परमाणु त्रिज्या और रासायनिक गुण पांचवें आवर्त के उनके ठीक ऊपर स्थित तत्वों (जैसे जिरकोनियम, Zr) के लगभग समान हो जाते हैं।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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कृत्रिम उपग्रहों की गति और गुरुत्वाकर्षण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी दीर्घवृत्ताकार कक्षा में चक्कर लगा रहे उपग्रह की कुल ऊर्जा (यांत्रिक ऊर्जा) ऋणात्मक होती है, जो यह दर्शाती है कि उपग्रह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बंधा हुआ है, और दीर्घवृक्ष के अपोजी (Apogee) पर उपग्रह की गतिज ऊर्जा न्यूनतम तथा स्थितिज ऊर्जा अधिकतम होती है।
2. भू-स्थिर उपग्रह (Geostationary satellite) की कक्षीय चाल लगभग 3.07 किमी/सेकंड होती है और यह पृथ्वी की सतह से लगभग 36,000 किमी की ऊँचाई पर पूर्व से पश्चिम की दिशा में पृथ्वी की परिक्रमा करता है।
3. जब कोई उपग्रह पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश करता है, तो वायुमंडलीय घर्षण के कारण अत्यधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है, जिसका मुख्य कारण उपग्रह की उच्च गतिज ऊर्जा का तापीय ऊर्जा में रूपांतरण है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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अम्ल, क्षार और लवण (Acids, Bases and Salts) के विभिन्न रासायनिक पहलुओं और उनके जलीय व्यवहार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आरहेनियस (Arrhenius) सिद्धांत के अनुसार, जल में घुलने पर जो पदार्थ हाइड्रोजन आयन ($H^+$) या हाइड्रोनियम आयन ($H_3O^+$) मुक्त करते हैं, वे अम्ल कहलाते हैं, किंतु यह सिद्धांत अमोनिया जैसे निर्जलीय विलायकों में क्षारीय गुणों की व्याख्या करने में विफल रहता है।
2. ब्रॉन्स्टेड-लोरी (Bronsted-Lowry) संकल्पना के अनुसार, एक प्रबल अम्ल का संयुग्मी क्षार (Conjugate base) अत्यधिक दुर्बल होता है, जबकि किसी दुर्बल अम्ल का संयुग्मी क्षार अपेक्षाकृत प्रबल प्रकृति का होता है।
3. जब सोडियम एसीटेट ($CH_3COONa$) जैसे दुर्बल अम्ल और प्रबल क्षार से बने लवण का जलीय अपघटन (Hydrolysis) किया जाता है, तो प्राप्त विलयन में हाइड्रॉक्साइड आयनों ($OH^-$) की अधिकता के कारण विलयन का pH मान 7 से अधिक होता है।
4. लुईस (Lewis) अम्ल वे रासायनिक स्पीशीज होती हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म (Electron pair) दान करने की क्षमता रखती हैं, जबकि लुईस क्षार इलेक्ट्रॉन युग्म को ग्रहण करने वाले अभिकर्मक होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव शरीर के तंत्रों (पाचन, श्वसन, परिसंचरण और तंत्रिका तंत्र) के कार्य और नियंत्रण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आमाशय (Stomach) की म्यूकोसा में पाई जाने वाली पेप्टिक कोशिकाएं या मुख्य कोशिकाएं (Chief cells) निष्क्रिय 'पेप्सिनोजेन' का स्राव करती हैं, जिसे हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) द्वारा सक्रिय पेप्सिन में बदला जाता है, और यह एंजाइम प्रोटीन को प्रोटियोज़ और पेप्टोन में जल अपघटित करता है।
2. 'ब्रोन्कियल अस्थमा' (Bronchial asthma) मुख्य रूप से श्वासनलियों (Bronchi) और श्वसनिकाओं (Bronchioles) की चिकनी पेशियों के लगातार ऐंठन (Spasm) और सूजन के कारण होने वाली एक पुरानी श्वसन विकार स्थिति है।
3. मस्तिष्क के 'हाइपोथैलेमस' क्षेत्र में स्थित ताप नियमन केंद्र (Thermoregulatory center) शरीर के आंतरिक तापमान को नियंत्रित करता है, और स्वायत्त तंत्रिका तंत्र के माध्यम से त्वचा की रक्त वाहिकाओं के संकीर्णन या फैलाव तथा स्वेद ग्रंथियों की सक्रियता को विनियमित करता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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मानव शरीर के पाचन, श्वसन, परिसंचरण और तंत्रिका तंत्र की सूक्ष्म क्रियात्मक प्रणालियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आमाशय की भित्ति में स्थित पैराइटल या ऑक्सिंटिक कोशिकाएँ हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ-साथ 'कैसल का आंतरिक कारक' (Castle's intrinsic factor) स्रावित करती हैं, जो क्षुद्रांत के शोषी अंगों द्वारा विटामिन $B_{12}$ के अवशोषण के लिए अनिवार्य होता है।
2. फेफड़ों में गैसीय विनिमय के समय, जब रक्त सक्रिय ऊतकों से गुजरता है जहाँ उच्च $CO_2$ सांद्रता और कम $pH$ होता है, तो हीमोग्लोबिन की ऑक्सीजन के प्रति बंधुता घट जाती है, जिससे ऑक्सीजन का विमोचन आसान हो जाता है, जिसे 'बोर प्रभाव' (Bohr effect) कहा जाता है।
3. मानव हृदय के संवहन तंत्र में 'सिनोएट्रियल नोड' (SA Node) प्राकृतिक पेसमेकर के रूप में कार्य करता है क्योंकि यह स्वतः क्रियाविभव उत्पन्न करने की उच्चतम क्षमता रखता है, जबकि 'एट्रियोवेंट्रिकुलर नोड' (AV Node) आवेगों में थोड़ा विलंब उत्पन्न करता है ताकि आलिंदों का संकुचन निलयों के संकुचन से पूर्णतः पहले हो सके।
4. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में तंत्रिका तंतुओं पर माइलिन आच्छद (Myelin sheath) का निर्माण 'शवान कोशिकाओं' (Schwann cells) द्वारा किया जाता है, जो नमक-मेड़ संचरण (Saltatory conduction) के माध्यम से आवेगों के संचरण की गति को धीमा कर देती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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