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सुकेन्द्रकी (Eukaryotic) कोशिकाओं के भीतर विभिन्न कोशिकांगों की संरचना और उनके विशिष्ट कार्यों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. माइटोकॉन्ड्रिया की आंतरिक झिल्ली (Inner membrane) पर 'ऑक्सीडेटिव फॉस्फोरिलीकरण' की प्रक्रिया संपन्न होती है, जहाँ इलेक्ट्रॉन परिवहन श्रृंखला (ETC) के दौरान बनने वाले 'क्रिस्टा' (Cristae) झिल्ली के सतही क्षेत्रफल को बढ़ाते हैं, और इसके मैट्रिक्स में क्रेब्स चक्र के सभी आवश्यक एंजाइम पाए जाते हैं, सिवाय 'सक्सीनेट डिहाइड्रोजनेज' के जो आंतरिक झिल्ली से जुड़ा होता है।
- 2. गॉल्जी उपकरण (Golgi apparatus) का 'cis' (निर्माण) चेहरा आमतौर पर अंतर्द्रव्यी जालिका (Endoplasmic Reticulum) की ओर और 'trans' (परिपक्व) चेहरा प्लाज्मा झिल्ली की ओर होता है, और यह मुख्य रूप से प्रोटीन के ग्लाइकोसिलेशन तथा लिपिड के ग्लाइकोजिनेशन जैसी रूपांतरण प्रक्रियाओं का प्रमुख स्थल है।
- 3. लिसोसॉउस (Lysosomes) एक एकल झिल्लीबद्ध कोशिकांग हैं जिनमें हाइड्रोलाइटिक एंजाइम (जैसे लाइपेस, प्रोटीएज और कार्बोहाइड्रेज) प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो अम्लीय pH (लगभग 4.5 से 5.0) पर सबसे अधिक सक्रिय होते हैं, और इस अम्लीय वातावरण को बनाए रखने के लिए साइटोप्लाज्म से प्रोटॉन ($H^+$) को सक्रिय रूप से पंप किया जाता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि माइटोकॉन्ड्रिया की आंतरिक झिल्ली क्रिस्टा का निर्माण करती है जो सतही क्षेत्रफल बढ़ाती है, और सक्सीनेट डिहाइड्रोजनेज एकमात्र ऐसा एंजाइम है जो माइटोकॉन्ड्रियल मैट्रिक्स में घुलनशील न होकर आंतरिक झिल्ली से जुड़ा होता है। कथन 2 गलत है क्योंकि गॉल्जी उपकरण का 'cis' चेहरा अंतर्द्रव्यी जालिका की ओर होता है, लेकिन लिपिड और प्रोटीन के ग्लाइकोसिलेशन/ग्लाइकोजिनेशन जैसी क्रियाओं के लिए गॉल्जी काय मुख्य स्थल है, हालांकि ग्लाइकोसिलेशन की शुरुआत मुख्य रूप से रफ एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम (RER) के भीतर ही हो जाती है। कथन 3 पूरी तरह सही है; लिसोसॉम्स में अम्लीय pH पर सक्रिय रहने वाले हाइड्रोलिसेस होते हैं, और इनके भीतर प्रोटॉन पंप (V-type ATPase) साइटोप्लाज्म से हाइड्रोजन आयनों को अंदर धकेलते हैं जिससे आंतरिक वातावरण अम्लीय बना रहता है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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धातुओं, अधातुओं और उनके प्रमुख यौगिकों के रासायनिक गुणों, संक्षारण तथा मिश्रधातुओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'ऐनोडाइजिंग' (Anodizing) एक विद्युत-रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें एल्युमिनियम धातु पर उसकी प्राकृतिक ऑक्साइड परत को अधिक मोटा और संक्षारण-रोधी बनाया जाता है, जिसके दौरान एल्युमिनियम को एनोड (धनात्मक सिरा) बनाया जाता है और तनु सल्फ्यूरिक अम्ल का उपयोग विद्युत अपघट्य के रूप में किया जाता है।
2. 'पीतल' (Brass) तांबे और टिन की एक मिश्रधातु है, जबकि 'कांस्य' (Bronze) तांबे और जस्ते की मिश्रधातु है, और सोल्डर (Solder) टिन तथा सीसा की एक ऐसी मिश्रधातु है जिसका गलनांक बहुत कम होता है, जिसके कारण इसका उपयोग विद्युत तारों की वेल्डिंग या जोड़ने में किया जाता है।
3. जल की स्थायी कठोरता (Permanent hardness) को दूर करने के लिए 'आयन-विनिमय संमिश्र' (Ion-exchange resins) या 'वॉशिंग सोडा' (Sodium carbonate) का उपयोग किया जाता है, जो जल में घुले कैल्शम और मैग्नीशियम के क्लोराइड तथा सल्फेट लवणों को अघुलनशील कार्बोनेट के रूप में अवक्षेपित कर देते हैं।
4. 'अमलगम' (Amalgam) किसी धातु का पारा (Mercury) के साथ बना मिश्रण होता है, और लोहा एक ऐसी धातु है जो पारे के साथ आसानी से अमलगम बना लेती है, यही कारण है कि लोहे के बर्तनों या टैंकों में पारे का भंडारण किया जाता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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धातुओं, अधातुओं और उनके प्रमुख यौगिकों के रासायनिक गुणों तथा संक्षारण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'गैल्वेनीकरण' (Galvanizing) लोहे या इस्पात को जंग से बचाने की एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें उस पर पिघली हुई जस्ते (Zinc) की एक पतली परत चढ़ाई जाती है, और इस प्रक्रिया में जस्ता 'बलिदान एनोड' (Sacrificial anode) के रूप में कार्य करता है क्योंकि जस्ते का मानक ऑप्शन विभव (Reduction potential) लोहे की तुलना में अधिक ऋणात्मक होता है।
2. 'एक्वा रेजिया' (Royal Water) सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ($HCl$) और सांद्र नाइट्रिक अम्ल ($HNO_3$) का 3:1 के आयतन अनुपात में ताजा तैयार किया गया मिश्रण है, जो स्वर्ण और प्लैटिनम जैसी उत्कृष्ट (Noble) धातुओं को भी घोल सकता है, क्योंकि यह मिश्रण अपने भीतर शक्तिशाली ऑक्सीकारकों जैसे 'क्लोरीन गैस' और 'नाइट्रोसिल क्लोराइड' का निर्माण करता है।
3. सफेद फास्फोरस ($P_4$) एक अत्यंत प्रतिक्रियाशील और विषैला अधातु है जो अंधेरे में चमकता है (स्फुरदीप्ति या Chemiluminescence), और इसे हवा में स्वतः प्रज्वलित होने से रोकने के लिए जल के भीतर डुबोकर रखा जाता है, जबकि लाल फास्फोरस इससे कम प्रतिक्रियाशील, पॉलीमेरिक संरचना वाला और जल में अघुलनशील होता है।
4. सोडियम हाइड्रॉक्साइड के निर्माण के लिए प्रयुक्त 'कास्टनर-कैलनर सेल' (Castner-Kellner cell) या विद्युत अपघटनी प्रक्रिया में, नमकीन घोल (Brine) के विद्युत अपघटन के दौरान एनोड पर क्लोरीन गैस और कैथोड पर हाइड्रोजन गैस मुक्त होती है, जबकि सोडियम धातु पारे (Mercury) के साथ मिलकर अमलगम का निर्माण करती है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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विलयन के अणुसंख्यक गुणधर्मों (Colligative properties) और उत्प्रेरण के विशिष्ट सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन (Relative lowering of vapour pressure) विलेय के मोल अंश के बराबर होता है, और यह राउल्ट के नियम (Raoult's law) द्वारा निर्धारित होता है जो विलेय की प्रकृति पर निर्भर नहीं करता, बल्कि उसकी कण संख्या पर निर्भर करता है।
2. 'वांट हॉफ गुणांक' ($i$) का मान वैद्युत अपघट्यों (जैसे $NaCl$ या $K_2SO_4$) के लिए उनके वियोजन (Dissociation) की मात्रा के कारण हमेशा एक से अधिक होता है, जबकि संगुणन या डाइमेराइजेशन (Dimerization) प्रदर्शित करने वाले विलेय के लिए इसका मान एक से कम होता है।
3. 'समांगी उत्प्रेरण' (Homogeneous catalysis) में उत्प्रेरक और अभिकारक समान भौतिक अवस्था (Phase) में होते हैं, जबकि 'विषमांगी उत्प्रेरण' में उत्प्रेरक ठोस अवस्था में और अभिकारक गैसीय या द्रव अवस्था में होते हैं, जहाँ 'अधिशोषण सिद्धांत' (Adsorption theory) के अनुसार अभिकर्मक उत्प्रेरक की सतह पर आकर अधिशोषित होते हैं और सक्रिय ऊर्जा का मान कम हो जाता है।
4. 'एन्जाइम उत्प्रेरण' के संदर्भ में, 'माइकलिस-मेंटेन का समीकरण' (Michaelis-Menten equation) एंजाइम-उत्प्रेरित अभिक्रिया के वेग और सब्सट्रेट की सांद्रता के बीच के संबंध को व्यक्त करता है, जिसमें अधिकतम वेग ($V_{max}$) तब प्राप्त होता है जब सभी एंजाइम अणु सब्सट्रेट के अणुओं के साथ संतृप्त हो जाते हैं और एंजाइम की सक्रिय साइटें पूरी तरह से व्यस्त होती हैं।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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मानव शरीर के अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System) और हॉर्मोन नियंत्रण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पश्च पीयूष ग्रंथि (Neurohypophysis) स्वयं किसी भी हॉर्मोन का संश्लेषण नहीं करती है, बल्कि यह हाइपोथैलेमस द्वारा उत्पादित 'ऑक्सीटोसिन' और 'वैसोप्रेसिन' (ADH) हॉर्मोन का भंडारण और विमोचन करती है।
2. पैराथाइरॉइड ग्रंथि द्वारा स्रावित 'पैराथर्मोन' (PTH) एक हाइपरकैल्सेमिक हॉर्मोन है, जो रक्त में कैल्शियम आयनों के स्तर को बढ़ाने के लिए अस्थि-अवशोषण (Bone resorption) को प्रेरित करता है और वृक्कों द्वारा कैल्शियम के पुनअवशोषण को भी बढ़ाता है।
3. अधिवृक्क ग्रंथि (Adrenal Gland) का कॉर्टेक्स भाग 'ऐल्डोस्टेरॉन' मिनरलोकॉर्टिकॉइड स्रावित करता है, जो वृक्क नलिकाओं में सोडियम और जल के पुनअवशोषण को विनियमित करके रक्तचाप और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने में मुख्य भूमिका निभाता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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