BaalVikas
Menu
General Science
Asked 2 months ago · Viewed 20 times

सुकेन्द्रिक (Eukaryotic) कोशिकाओं में पाए जाने वाले विभिन्न कोशिकांगों (Cell organelles) और उनके विशिष्ट कार्यों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. सूत्रकणिका (Mitochondria) के आंतरिक झिल्ली पर 'ऑक्सीसोम' (F0-F1 कण) उपस्थित होते हैं, जो कोशिकीय श्वसन के दौरान एटीपी (ATP) संश्लेषण के मुख्य स्थल हैं, और चूँकि इस अंगक में स्वयं का वृत्ताकार डीएनए तथा 70S राइबोसोम होते हैं, इसे 'अर्ध-स्वायत्त कोशिकांग' (Semi-autonomous organelle) कहा जाता है।
  2. 2. लिसोसॉम (Lysosome) एक ऐसा एकल-झिल्लीबद्ध कोशिकांग है जिसमें अम्लीय pH (लगभग 4-5) पर सक्रिय रहने वाले हाइड्रोलाइटिक एंजाइम (जैसे लाइपेज, प्रोटीएज और कार्बोहाइड्रैसेज) प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो क्षतिग्रस्त कोशिकाओं या अवांछित macromolecules का पाचन करते हैं।
  3. 3. परॉक्सिसॉम (Peroxisome) एक झिल्ली-बद्ध कोशिकांग है जो मुख्य रूप से प्रकाश-श्वसन (Photorespiration) और हाइड्रोजन पेरोक्साइड के विषैले चयापचय में भाग लेता है, और यह जंतु कोशिकाओं में राइबोसोम के साथ मिलकर लिपिड का संश्लेषण भी करता है।

उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

इस प्रश्न के विश्लेषण के अनुसार, कथन 1 बिल्कुल सही है क्योंकि सूत्रकणिका (माइटोकॉन्ड्रिया) को अर्ध-स्वायत्त कोशिकांग माना जाता है क्योंकि इसमें स्वयं का डीएनए और 70S प्रकार के राइबोसोम पाए जाते हैं, तथा इसकी आंतरिक झिल्ली पर ऑक्सीसोम स्थित होते हैं जो ATP निर्माण में मदद करते हैं। कथन 2 भी सही है क्योंकि लिसोसॉम एकल झिल्ली से घिरा कोशिकांग है जिसमें अम्लीय वातावरण में सक्रिय रहने वाले जल-अपघट्य (Hydrolytic) एंजाइम होते हैं जो ऑटोफैगी और सेलुलर डिग्रेडेशन में भूमिका निभाते हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि परॉक्सिसॉम मुख्य रूप से हाइड्रोजन पेरोक्साइड के चयापचय और वसीय अम्ल के बीटा-ऑक्सीकरण से संबंधित है, जबकि लिपिड और स्टेरॉयड का मुख्य संश्लेषण मुख्य रूप से चिकनी अंतःप्रद्रव्यी जालिका (SER) द्वारा होता है। इसके बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Share:
अगला प्रश्न → आवर्त सारणी के तत्वों के रासायनिक गुणों, आयनन ऊर्जा, विद्युत ऋणात्मकता और उनके… ← पिछला प्रश्न कार्बनिक रसायन में हाइड्रोकार्बन के नामकरण, समवयस्कता…

Related Questions

→ आवर्त सारणी के तत्वों के रासायनिक गुणों, आवर्तिता और आयनिक विभव के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी परमाणु की 'प्रथम आयनन एन्थैल्पी' (First Ionization Enthalpy) का मान सामान्यतः आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर बढ़ता है, किंतु नाइट्रोजन (N) की प्रथम आयनन एन्थैल्पी अपने ठीक बाद आने वाले ऑक्सीजन (O) से अधिक होती है, जिसका मुख्य कारण नाइट्रोजन के अर्ध-पूरित (Half-filled) $2p$ कक्षकों का अतिरिक्त स्थायित्व है। 2. 'इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी' (Electron Gain Enthalpy) का ऋणात्मक मान हैलोजन समूह में नीचे की ओर जाने पर (फ्लोरीन से आयोडीन तक) लगातार बढ़ता जाता है, और फ्लोरीन की इलेक्ट्रॉन बंधुता अपने समूह में सबसे अधिक होती है। 3. आधुनिक आवर्त सारणी में 'विकर्ण संबंध' (Diagonal Relationship) मुख्य रूप से द्वितीय आवर्त के तत्वों (जैसे लिथियम, बेरिलियम, बोरॉन) और तृतीय आवर्त के विकर्ण पर स्थित तत्वों (जैसे मैग्नीशियम, एल्युमिनियम, सिलिकॉन) के बीच देखा जाता है, क्योंकि इनके ध्रुवणात्मक गुण (Polarizing power) और आयनिक आकार लगभग समान होते हैं। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? → धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक गुणों तथा निष्कर्षण प्रक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'भर्जन' (Roasting) वह प्रक्रिया है जिसमें अयस्क को वायु की अत्यधिक मात्रा में उसके गलनांक बिंदु से नीचे गर्म किया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप सल्फाइड अयस्क ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाते हैं और वाष्पशील अशुद्धियाँ दूर हो जाती हैं। 2. थर्माइट वेल्डिंग (Thermite welding) में एल्युमिनियम पाउडर का उपयोग एक शक्तिशाली अपचायक के रूप में किया जाता है, जो फेरिक ऑक्साइड ($Fe_2O_3$) के साथ तीव्र अभिक्रिया करके पिघला हुआ लोहा उत्पन्न करता है, क्योंकि एल्युमिनियम की ऑक्सीजन के प्रति बंधुता आयरन से बहुत अधिक होती है। 3. 'जिंकोसाइट' (Zincite) और 'कैलेमीन' (Calamine) दोनों ही जिंक के प्रमुख अयस्क हैं, जिनमें से कैलेमीन एक कार्बोनेट अयस्क है जिसके निष्कर्षण के लिए निस्तापन (Calcination) प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? → मानव अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System) और विभिन्न हॉर्मोन्स की जैव रासायनिक क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हाइपोथैलेमस द्वारा स्रावित 'गोनाडोट्रोपिन-रिलीजिंग हॉर्मोन' (GnRH) अग्र पीयूष ग्रंथि को उद्दीपित करता है ताकि वह ल्यूटिनाइजिंग हॉर्मोन (LH) और फॉलिकल-स्टिम्युलेटिंग हॉर्मोन (FSH) का संश्लेषण और स्रावण कर सके। 2. एड्रिनल ग्रंथि का मेडुला भाग 'कैटेकोलामीन' (Catecholamines) हॉर्मोन्स जैसे एड्रिनलीन और नॉरएड्रिनलीन का स्रावण करता है, जो आपातकालीन परिस्थितियों में 'फाइट या फ्लाइट' (Fight or flight) प्रतिक्रिया को नियंत्रित करते हैं और हृदय गति, रक्तचाप तथा ग्लाइकोजेनोलिसिस को बढ़ाते हैं। 3. थायराइड ग्रंथि की फोलिक्यूलर कोशिकाओं द्वारा स्रावित 'कैल्सीटोनिन' (Calcitonin) हॉर्मोन रक्त में कैल्शियम के स्तर को बढ़ाने का कार्य करता है, जिससे अस्थि ऊतकों से कैल्शियम का अवशोषण होकर वह रक्त प्रवाह में मुक्त होता है। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? → आवर्त सारणी के तत्वों के आवर्ती गुणों (Periodic Properties) और उनके प्रवृत्तियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु त्रिज्या (Atomic radius) सामान्यतः घटती है, क्योंकि प्रभावी नाभिकीय आवेश (Effective nuclear charge) में वृद्धि होती है, जो बाहरी इलेक्ट्रונים को नाभिक की ओर अधिक तीव्रता से आकर्षित करती है। 2. 'इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी' (Electron Gain Enthalpy) का मान हमेशा ऋणात्मक होता है, और आवर्त सारणी में फ्लोरीन (Fluorine) की इलेक्ट्रॉन बंधुता (Electron affinity) अपने समूह के अन्य सभी तत्वों जैसे क्लोरीन की तुलना में सबसे अधिक ऋणात्मक होती है। 3. आयनन विभव (Ionization Potential) का मान किसी परमाणु की गैसीय अवस्था से एक इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा को दर्शाता है, और यह सामान्यतः क्षारीय मृदा धातुओं (Group 2) में समान आवर्त की क्षार धातुओं (Group 1) की तुलना में अधिक होता है। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? → पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है। 2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है। 3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था। 4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.