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General Science
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भौतिक राशियों और उनके व्युत्पन्न मात्रकों तथा विमाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. प्लांक नियतांक (Planck's Constant) का विमीय सूत्र $[ML^2T^{-1}]$ होता है, और इसका एसआई मात्रक जूल-सेकंड ($ ext{J s}$) है, जो कि कोणीय संवेग के विमीय सूत्र के बिल्कुल समान है।
- 2. चुंबकीय फ्लक्स (Magnetic Flux) का मात्रक 'वेबर' ($ ext{Wb}$) है, और जब इसे मूल इकाइयों के पदों में व्यक्त किया जाता है, तो यह $ ext{kg m}^2 ext{s}^{-2} ext{A}^{-1}$ के तुल्य होता है।
- 3. गुप्त ऊष्मा (Latent Heat) एक ऐसी भौतिक राशि है जिसकी विमा $[L^2T^{-2}]$ होती है, और इसका एसआई मात्रक $ ext{J kg}^{-1}$ है, जबकि यह तापमान पर निर्भर करती है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: प्लांक नियतांक ($h$) का ऊर्जा से संबंध $E = h
u$ होता है, जिससे इसका विमीय सूत्र $[ML^2T^{-1}]$ प्राप्त होता है, जो कि कोणीय संवेग (Angular Momentum) के विमीय सूत्र के समान है। कथन 2 सही है: चुंबकीय फ्लक्स का एसआई मात्रक वेबर है और इसे विमा और मात्रक विश्लेषण के अनुसार $ ext{kg m}^2 ext{s}^{-2} ext{A}^{-1}$ के रूप में लिखा जा सकता है। कथन 3 गलत है क्योंकि गुप्त ऊष्मा (Latent Heat, $L = Q/m$) की विमा $[L^2T^{-2}]$ और मात्रक $ ext{J kg}^{-1}$ सही है, किंतु यह पदार्थ की अवस्था परिवर्तन के दौरान नियत रहती है और यह स्वयं तापमान पर निर्भर नहीं करती, बल्कि यह उस ताप पर दी जाने वाली ऊष्मा है जिस पर अवस्था बदलती है। इस विषय के विस्तृत अध्ययन के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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मानव रोगों और उनके रोगजनकों, संचरण तंत्र तथा नैदानिक लक्षणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'मलेरिया' (Malaria) प्लाज्मोडियम प्रजाति के प्रोटोजोआ के कारण होता है, जिसका संचरण मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से होता है, और इसके गंभीर रूप (प्लाज्मोडियम फैल्ciparum) में रोगी को 'ब्लैकवाटर फीवर' हो सकता है जिसमें हीमोग्लोबिनयूरिया (मूत्र के साथ हीमोग्लोबिन का आना) की स्थिति उत्पन्न होती है।
2. 'डिफ्थीरिया' (Diphtheria) कॉर्नेबैक्टीरियम डिफ्थिरियाई (Corynebacterium diphtheriae) नामक ग्राम-पॉजिटिव जीवाणु के कारण होता है, जो श्वसन नली में एक स्रावी धूसर रंग की 'झिल्ली' (Pseudomembrane) का निर्माण करता है और इसके एक्सोटॉक्सिन से हृदय तथा तंत्रिका तंत्र को गंभीर क्षति पहुँचती है।
3. 'ट्रैकोमा' (Trachoma) क्लैमाइडिया ट्रैकोमैटिस (Chlamydia trachomatis) नामक अंतःकोशिकी जीवाणु के कारण होने वाला नेत्र संक्रमण है, जो कार्निया और कंजंक्टिवा को प्रभावित करता है और लंबे समय तक संक्रमण रहने से पलकें अंदर की ओर मुड़ जाती हैं (ट्रिकियासिस)।
4. 'लेप्रॉसी' (कुष्ठ रोग) माइकोबैक्टीरियम लेप्रे के कारण होता है, जो मुख्य रूप से केंद्रीय तंत्रिका तंत्र और मस्तिष्क के न्यूरॉन्स को गंभीर रूप से क्षति पहुँचाता है, जबकि इसकी परिधीय तंत्रिकाओं और त्वचा पर कोई संवेदनशीलता प्रभावित नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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तंत्रिका तंत्र की इकाई?
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धातुओं, अधातुओं और उनके प्रमुख यौगिकों के रासायनिक गुणों तथा निष्कर्षण प्रक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'भर्जन' (Roasting) की प्रक्रिया में अयस्क को वायु की अत्यधिक मात्रा की उपस्थिति में उसके गलनांक से नीचे के तापमान पर गर्म किया जाता है, जिसका मुख्य उपयोग मुख्य रूप से सल्फाइड अयस्कों को उनके संगत ऑक्साइडों में परिवर्तित करने के लिए किया जाता है।
2. सोडियम धातु को अत्यधिक प्रतिक्रियाशील होने के कारण केरोसिन तेल के नीचे संग्रहित किया जाता है, जबकि सफेद फास्फोरस को खुली हवा में रखने पर वह स्वतः प्रज्वलित हो जाता है, इसलिए उसे सुरक्षित रखने के लिए जल के भीतर डुबोकर रखा जाता है।
3. 'थर्माइट प्रक्रम' (Thermite process) में एल्युमिनियम पाउडर का उपयोग अपचायक के रूप में किया जाता है, जो आयरन (III) ऑक्साइड जैसे धातु ऑक्साइडों को अत्यधिक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया के माध्यम से अपचयित करके पिघली हुई अवस्था में मुक्त करता है, जिसका उपयोग रेल की पटरियों को जोड़ने में होता है।
4. एल्युमिनियम के निष्कर्षण के लिए हॉल-हरोल्ट प्रक्रम (Hall-Heroult process) का उपयोग किया जाता है, जिसमें शुद्ध एलुमिना ($Al_2O_3$) को पिघले हुए क्रायोलाइट ($Na_3AlF_6$) और फ्लूरोस्पार ($CaF_2$) के मिश्रण में घोलकर विद्युत अपघटन किया जाता है, जहाँ क्रायोलाइट विलायक का हिमांक कम करने और मिश्रण की विद्युत चालकता बढ़ाने का कार्य करता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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मानव शरीर के अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System) और विभिन्न हॉर्मोनों के नियंत्रण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पीयूष ग्रंथि के पश्च भाग (Neurohypophysis) से स्रावित 'वैसोप्रेसिन' या 'एंटीडायूरेटिक हॉर्मोन' (ADH) वृक्क नलिकाओं में जल के पुनरअवशोषण को बढ़ाता है, और इस हॉर्मोन की भारी कमी के कारण 'डाइयूरेसिस' (मूत्र की मात्रा में वृद्धि) के साथ-साथ 'डाइबिटीज इंसिपिडस' (Diabetes insipidus) नामक विकार उत्पन्न होता है।
2. थायराइड ग्रंथि द्वारा स्रावित हॉर्मोन 'थायराक्सिन' ($T_4$) और 'ट्राइआयोडोथायरोनिन' ($T_3$) शरीर की आधारीय चयापचय दर (BMR) को नियंत्रित करते हैं, और इनके संश्लेषण के लिए भोजन में आयोडीन की पर्याप्त मात्रा होना अनिवार्य है, जिसकी कमी से 'गॉइटर' (घेंघा) रोग हो जाता है।
3. अधिवृक्क ग्रंथि के वल्कुट (Adrenal Cortex) से स्रावित 'एल्डोस्टेरोन' एक मिनरलोकॉर्टिकॉइड है, जो रक्त प्लाज्मा में सोडियम आयनों के स्तर को कम करता है और पोटेशियम आयनों के पुनरअवशोषण को अत्यधिक प्रेरित करता है, जिससे रक्तचाप में भारी गिरावट आती है।
4. पैराथाइरॉइड ग्रंथि द्वारा स्रावित 'पैराथर्मोन' (PTH) एक हाइपरकैल्सेमिक हॉर्मोन है जो रक्त में कैल्शियम आयनों के स्तर को बढ़ाने के लिए हड्डियों के resorption (अवशोषण) को प्रेरित करता है तथा आंतों और वृक्कों द्वारा कैल्शियम के अवशोषण को बढ़ाता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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फिटकरी (Alum) का रासायनिक नाम क्या है?
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