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General Science
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कृत्रिम उपग्रहों की कक्षीय गति और भारहीनता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. किसी दीर्घवृत्ताकार कक्षा में चक्कर लगा रहे उपग्रह की कुल यांत्रिक ऊर्जा (Mechanical energy) ऋणात्मक होती है, जो इस बात का प्रतीक है कि उपग्रह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बंधन से बंधा हुआ है, और जब उपग्रह पृथ्वी के निकटतम बिंदु (Perigee) पर होता है, तब उसकी गतिज ऊर्जा अधिकतम तथा स्थितिज ऊर्जा न्यूनतम होती है।
  2. 2. उपग्रह के भीतर स्थित किसी अंतरिक्ष यात्री द्वारा अनुभव की जाने वाली 'भारहीनता' (Weightlessness) का मुख्य कारण यह है कि अंतरिक्ष में पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल पूरी तरह से शून्य हो जाता है, जिससे अंतरिक्ष यात्री पर कोई भी परिणामी बल कार्य नहीं करता है।
  3. 3. भू-तुल्यकालिक उपग्रह (Geosynchronous satellite) की घूर्णन अवधि पृथ्वी के अपनी धुरी के चारों ओर घूमने के आवर्त काल के ठीक बराबर होती है, किंतु यह आवश्यक नहीं है कि प्रत्येक भू-तुल्यकालिक उपग्रह विषुवत वृत्त (Equator) के ठीक ऊपर स्थित हो और उसकी कक्षा पूर्णतः वृत्ताकार हो।

उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि किसी दीर्घवृत्ताकार कक्षा में परिक्रमा कर रहे उपग्रह की कुल यांत्रिक ऊर्जा ऋणात्मक होती है, जो उसके गुरुत्वाकर्षण बंधन को दर्शाती है। उपग्रह जब पेरिगी (Perigee - पृथ्वी के सबसे निकटतम बिंदु) पर होता है, तब उसकी चाल अधिकतम होने के कारण गतिज ऊर्जा अधिकतम तथा स्थितिज ऊर्जा न्यूनतम होती है। कथन 2 गलत है क्योंकि उपग्रह के भीतर अंतरिक्ष यात्री की भारहीनता का कारण गुरुत्वाकर्षण का शून्य होना नहीं है, बल्कि उपग्रह और अंतरिक्ष यात्री दोनों का पृथ्वी के केंद्र की ओर समान त्वरण (Free fall) से गिरना है, जिससे अभिलंब प्रतिक्रिया (Normal reaction) शून्य हो जाती है। कथन 3 सही है क्योंकि भू-तुल्यकालिक उपग्रह (Geosynchronous satellite) का आवर्त काल 24 घंटे होता है, और यदि इसकी कक्षा झुकी हुई (Inclined) या दीर्घवृत्ताकार है तब भी यह भू-तुल्यकालिक हो सकता है (जबकि भू-स्थिर उपग्रह विशेष रूप से विषुवत वृत्त के ऊपर वृत्ताकार कक्षा में होता है)। विकिपीडिया संदर्भ
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