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General Science
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विद्युत परिपथों और चालकों के प्रतिरोध (Resistance) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी चालक तार की लंबाई को यदि दोगुना कर दिया जाए और उसकी त्रिज्या को भी दोगुना कर दिया जाए, तो उसका विद्युत प्रतिरोध प्रारंभिक प्रतिरोध का आधा हो जाता है।
- 2. अर्द्धचालकों (Semiconductors) की विद्युत चालकता तापमान में वृद्धि के साथ बढ़ती है, क्योंकि ताप बढ़ने पर अधिक सहसंयोजक बंध टूटते हैं और मुक्त इलेक्ट्रॉनों तथा होलों की संख्या में वृद्धि होती है, जिसके कारण उनका प्रतिरोध ताप गुणांक (Temperature coefficient of resistance) ऋणात्मक होता है।
- 3. जब प्रतिरोधकों को समांतर क्रम (Parallel combination) में जोड़ा जाता है, तो तुल्य प्रतिरोध परिपथ के प्रत्येक व्यक्तिगत प्रतिरोध से कम होता है, और कुल धारा का मान बढ़ जाता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है: चालक का प्रतिरोध सूत्र $R = \rho \frac{l}{A}$ (जहाँ $A = \pi r^2$) के अनुसार होता है। यदि लंबाई $l$ को दोगुना ($2l$) और त्रिज्या $r$ को दोगुना ($2r$) किया जाए, तो नया क्षेत्रफल $4A$ हो जाएगा। नया प्रतिरोध $R' = \rho \frac{2l}{4A} = \frac{1}{2} \left(\rho \frac{l}{A}\right)$, यानी प्रतिरोध प्रारंभिक मान का एक चौथाई ($\frac{1}{4}$) रह जाएगा, आधा नहीं। कथन 2 सही है: अर्द्धचालकों में तापमान बढ़ने पर उष्मीय ऊर्जा के कारण सहसंयोजक बंध टूटते हैं जिससे आवेश वाहक (मुक्त इलेक्ट्रॉन और होल) बढ़ते हैं, फलस्वरूप प्रतिरोध घटता है और ताप गुणांक ऋणात्मक होता है। कथन 3 सही है: समांतर क्रम संयोजन में तुल्य प्रतिरोध का व्युत्क्रम व्यक्तिगत प्रतिरोधों के व्युत्क्रमों के योग के बराबर होता है, जिससे तुल्य प्रतिरोध सबसे छोटे व्यक्तिगत प्रतिरोध से भी कम हो जाता है। इस विषय की विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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मानव शरीर के अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System) और हाइपोथैलेमिक-पिट्यूटरी अक्ष (Hypothalamic-Pituitary Axis) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हाइपोथैलेमस द्वारा स्रावित 'गोनाडोट्रोपिन-रिलीजिंग हॉर्मोन' (GnRH) अग्र पिट्यूटरी (Adenohypophysis) को ल्यूटिनाइजिंग हॉर्मोन (LH) और फॉलिकल-स्टिम्युलेटिंग हॉर्मोन (FSH) का स्रावण करने के लिए प्रेरित करता है, जो प्युर्टरी पोर्टल तंत्र के माध्यम से अग्र पिट्यूटरी तक पहुँचते हैं।
2. पश्च पिट्यूटरी (Neurohypophysis) स्वयं किसी भी हॉर्मोन का संश्लेषण नहीं करती है, बल्कि यह हाइपोथैलेमस के अधिवृक्क न्यूरोसेक्रेटरी कोशिकाओं द्वारा उत्पादित ऑक्सीटोसिन और वैसोप्रेसिन (ADH) हॉर्मोन का भंडारण और विमोचन करती है।
3. अधिवृक्क वल्कल (Adrenal Cortex) का 'जोना ग्लोमेरुलोसा' (Zona glomerulosa) क्षेत्र मिनरलोकोर्टिकोइड्स (मुख्य रूप से एल्डोस्टेरोन) का स्रावण करता है, जो वृक्क नलिकाओं द्वारा सोडियम आयनों और जल के पुनravशोषित होने को बढ़ावा देता है तथा पोटेशियम और हाइड्रोजन आयनों के उत्सर्जन को नियंत्रित करता है।
4. पैराथायराइड ग्रंथियों द्वारा स्रावित 'पैराथर्मोन' (PTH) एक हाइपोकैल्सेमिक हॉर्मोन है जो रक्त में कैल्शियम के स्तर को कम करता है, क्योंकि यह अस्थियों से कैल्शियम के पुनravशोषण को रोकता है और वृक्क द्वारा कैल्शियम के उत्सर्जन को बढ़ाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का शक्ति केंद्र किसे कहते हैं?
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क्षार?
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ओह्म का नियम?
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पदार्थ के सामान्य गुणों (पृष्ठ तनाव, श्यानता और आर्किमिडीज का सिद्धांत) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी द्रव का पृष्ठ तनाव (Surface tension) उस बल के रूप में परिभाषित होता है जो द्रव के पृष्ठ पर खींची गई काल्पनिक रेखा की एकांक लंबाई पर लंबवत कार्य करता है, और तापमान बढ़ने के साथ अधिकांश द्रवों का पृष्ठ तनाव घट जाता है क्योंकि तापमान बढ़ने से अणुओं की उष्मीय ऊर्जा बढ़ती है और उनके बीच का संसंजक बल (Cohesive force) कमजोर हो जाता है।
2. 'श्यानता' (Viscosity) द्रवों का वह आंतरिक गुण है जिसके कारण द्रव की विभिन्न परतें अपनी आपेक्षिक गति का विरोध करती हैं, और गैसों की श्यानता तापमान में वृद्धि के साथ घटती है जबकि द्रवों की श्यानता तापमान बढ़ने पर बढ़ जाती है।
3. आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुसार, जब कोई वस्तु किसी तरल में आंशिक या पूर्ण रूप से डुबोई जाती है, तो वह अपने द्वारा हटाए गए तरल के भार के बराबर ऊपर की ओर एक उत्प्लावन बल (Buoyant force) का अनुभव करती है, और इस बल का केंद्र हटाए गए तरल के आयतन के गुरुत्व केंद्र पर कार्य करता है जिसे 'उत्प्लावन केंद्र' (Centre of buoyancy) कहा जाता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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