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General Science
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आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु त्रिज्या (Atomic radius) सामान्यतः घटती है, क्योंकि प्रभावी नाभिकीय आवेश में वृद्धि होती है जो बाहरी इलेक्ट्रॉनों को नाभिक की ओर अधिक तीव्रता से खींचती है।
- 2. इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron gain enthalpy) का मान सभी उत्कृष्ट गैसों (Noble gases) के लिए अत्यधिक ऋणात्मक होता है, क्योंकि उनके बाह्यतम कोश पूरी तरह से भरे होते हैं और वे इलेक्ट्रॉन आसानी से ग्रहण कर लेते हैं।
- 3. फ्लोरिन की विद्युत् ऋणात्मकता (Electronegativity) पॉलिंग पैमाने पर संपूर्ण आवर्त सारणी में सबसे अधिक होती है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर नाभिकीय आवेश बढ़ता है जिससे परमाणु त्रिज्या घटती है। कथन 2 गलत है क्योंकि उत्कृष्ट गैसों का बाह्यतम इलेक्ट्रॉनिक विन्यास पूर्ण (stable) होता है, जिसके कारण उनकी इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का मान धनात्मक या शून्य के निकट होता है (वे इलेक्ट्रॉन ग्रहण नहीं करना चाहतीं)। कथन 3 सही है; पॉलिंग पैमाने पर फ्लोरिन की विद्युत् ऋणात्मकता सर्वाधिक (4.0) होती है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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मानव रोगों, उनके रोगजनकों और संचरण तंत्र के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'टिटनेस' (Tetanus) क्लोस्ट्रिडियम टेटानी (Clostridium tetani) नामक जीवाणु के कारण होता है, जो एक बीजाणु-उत्पादक (Spore-forming) और आबध्य अवायवीय (Obligate anaerobic) जीवाणु है, तथा इसका विषैला एक्सोटॉक्सिन 'टेटनोस्पैस्मिन' केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है।
2. 'काली खांसी' (Pertussis) या हूइंग कफ बोरडेटेला परट्यूसिस (Bordetella pertussis) नामक ग्राम-ऋणात्मक जीवाणु के कारण होता है, जो श्वसन नली के उपकला ऊतक को संक्रमित करता है और पक्षाभ (Cilia) की गति को नष्ट कर देता है।
3. 'लैप्रॉसी' (कुष्ठ रोग) माइकोबैक्टीरियम लेप्रे (Mycobacterium leprae) के कारण होता है, जो एक अंतःकोशिकी परजीवी है और यह मुख्य रूप से केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है, जबकि परिधीय तंत्रिकाएँ इससे अप्रभावित रहती हैं।
4. 'अमीबायसिस' (अमीबी पेचिश) एंटाअमीबा हिस्टोलिटिका (Entamoeba histolytica) नामक एक परजीवी प्रोटोजोआ के कारण होता है, जिसका संक्रमण संदूषित जल और भोजन के सेवन से होता है और यह मुख्य रूप से बड़ी आंत को संक्रमित करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कार्य का मात्रक?
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मानव शरीर में जैविक अणुओं और पोषण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विटामिन B$_1$ (थायमिन) का सक्रिय सह-एंजाइम रूप 'थायमिन पाइरोफॉस्फेट' (TPP) है, जो कार्बोहाइड्रेट उपापचय के दौरान पाइरुविक एसिड के ऑक्सीडेटिव डिकार्बोक्सिलेशन में मुख्य भूमिका निभाता है।
2. ग्लाइकोजन (Glycogen) एक शाखित पॉलिसैराइड है जिसे 'जंतु स्टार्च' भी कहा जाता है, जिसका भंडारण मुख्य रूप से यकृत और कंकाल पेशियों में होता है, और इसमें ग्लूकोज इकाइयाँ आपस में $\alpha-1,4$ ग्लाइकोसाइडिक बंधों तथा शाखा बिंदुओं पर $\alpha-1,6$ ग्लाइकोसाइडिक बंधों द्वारा जुड़ी होती हैं।
3. आवश्यक अमीनो अम्ल (Essential Amino Acids) वे होते हैं जिनका संश्लेषण मानव शरीर के भीतर पर्याप्त मात्रा में नहीं हो पाता है, इसलिए उन्हें आहार के माध्यम से लेना अनिवार्य होता है, जैसे कि वैलीन, ल्यूसिन और आइसोल्यूसिन।
4. विटामिन D एक जल-विलेय विटामिन है जो शरीर में कैल्शियम और फॉस्फोरस के होमियोस्टेसिस को विनियमित करने के लिए steroid हार्मोन की तरह कार्य करता है, और इसकी कमी से वयस्कों में 'ऑस्टियोमैलेशिया' रोग हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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विलयन के अणुसंख्यक गुणधर्मों (Colligative properties) और उत्प्रेरण (Catalysis) की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर उसके वाष्प दाब में होने वाला आपेक्षिक अवनमन विलेय के मोल अंश के बराबर होता है, और यह गुणधर्म विलयन में विलेय कणों के संघनन (Association) या वियोजन (Dissociation) से प्रभावित होता है जिसे वेंट 'हॉफ गुणांक' ($i$) द्वारा संशोधित किया जाता है।
2. परासरण दाब ($\pi = iCRT$) एक अणुसंख्यक गुणधर्म है, और यदि दो विलयनों के परासरण दाब समान हों, तो उन्हें 'समपरासिटिक' (Isotonic) कहा जाता है; ऐसे विलयनों को अर्धपारगम्य झिल्ली द्वारा अलग करने पर भी विलायक के अणुओं का शुद्ध प्रवाह दोनों दिशाओं में होता है किंतु उनका कुल निval (Net flow) शून्य होता है।
3. समांगी उत्प्रेरण (Homogeneous catalysis) में उत्प्रेरक और अभिकारक समान भौतिक अवस्था (Phase) में होते हैं, जबकि विषमांगी उत्प्रेरण में 'अधिशोसक-मध्यवर्ती सिद्धांत' (Adsorption theory) के अनुसार अभिकारक गैसें उत्प्रेरक की ठोस सतह पर अधिशोषित होकर सक्रिय ऊर्जा (Activation energy) को बढ़ा देती हैं जिससे अभिक्रिया की दर मंद हो जाती है।
4. उत्प्रेरक वर्धक (Catalytic promoters) वे पदार्थ होते हैं जो स्वयं उत्प्रेरक नहीं होते हैं, किंतु किसी रासायनिक अभिक्रिया में उत्प्रेरक की सक्रियता (Catalytic activity) को बढ़ा देते हैं, जैसे Haber प्रक्रम में अमोनिया निर्माण के दौरान 'मोलिब्डेनम' (Mo) लोहे के उत्प्रेरक की कार्यक्षमता को बढ़ाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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प्रकाशिकी (Optics) के सिद्धांतों, लेंसों और दर्पणों के व्यवहार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जब कोई प्रकाश किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है और आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण (Critical angle) से अधिक हो जाता है, तो किरण का पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total internal reflection) होता है, जिसके लिए प्रकाश का सघन माध्यम से जाना और अपवर्तनांक का नियम अनिवार्य है।
2. एक उत्तल लेंस (Convex lens) को जब ऐसे द्रव में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से अधिक होता है, तो लेंस की फोकस दूरी ऋणात्मक हो जाती है और वह अभिसारी (Converging) लेंस की तरह व्यवहार करने के बजाय अपसारी (Diverging) लेंस की भाँति कार्य करने लगता है।
3. गोलीय दर्पणों के लिए, यदि दर्पण की फोकस दूरी $f$ है और वस्तु की दूरी $u$ तथा प्रतिबिंब की दूरी $v$ है, तो रैखिक आवर्धन ($m$) का मान सदैव $-v/u$ होता है, जो यह दर्शाता है कि वास्तविक प्रतिबिंबों के लिए आवर्धन ऋणात्मक और आभासी प्रतिबिंबों के लिए धनात्मक होता है।
4. खगोलीय दूरदर्शी (Astronomical telescope) की आवर्तन क्षमता को बढ़ाने के लिए अभिदृश्य लेंस (Objective lens) का द्वारक (Aperture) और फोकस दूरी दोनों बहुत कम होने चाहिए, जिससे दूर स्थित तारों से आने वाला प्रकाश अधिक केंद्रित हो सके।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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