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History of India
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गदर पार्टी और क्रांतिकारी आंदोलन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वर्ष 1913 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को शहर में लाला हरदयाल और सोहन सिंह भाख्ना द्वारा 'पैसिफिक कोस्ट हिंदुस्तान एसोसिएशन' की स्थापना की गई थी, जिसे बाद में इसके साप्ताहिक पत्र 'गदर' के नाम पर 'गदर पार्टी' के रूप में जाना गया।
- 2. प्रथम विश्व युद्ध के आरंभ होने पर गदर पार्टी के क्रांतिकारियों ने 'गदर की गूंज' नामक राष्ट्रवादी प्रकाशनों के माध्यम से विदेश में बसे प्रवासियों को भारत में ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध सशस्त्र विद्रोह करने के लिए प्रेरित किया तथा दिसंबर 1914 से फरवरी 1915 के बीच भारत लौटने लगे।
- 3. गदर पार्टी द्वारा तय की गई 21 फरवरी 1915 की सशस्त्र क्रांति की योजना (फरवरी विद्रोह) की गुप्त सूचना ब्रिटिश खुफिया तंत्र को मिल गई, जिसके कारण यह योजना असफल हो गई और इसके प्रमुख नेताओं—करतार सिंह सराबा और बख्शी सिंह—को गिरफ्तार कर लाहौर षड्यंत्र केस के तहत फांसी दे दी गई।
- 4. गदर आंदोलन यद्यपि अपनी तात्कालिक सैन्य योजना में सफल नहीं हो सका, किंतु इसने विदेशों में रह रहे भारतीयों में क्रांतिकारी चेतना जागृत करने और भविष्य के स्वतंत्रता संग्राम के लिए वैادिक एवं राजनीतिक जमीन तैयार करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
उपर्युक्त सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। वर्ष 1913 में सोहन सिंह भाख्ना और लाला हरदयाल ने सैन फ्रांसिस्को में 'पैसिफिक कोस्ट हिंदुस्तान एसोसिएशन' की स्थापना की थी जो आगे चलकर 'गदर पार्टी' के रूप में प्रसिद्ध हुई। इस पार्टी का मुख्य उद्देश्य भारत को ब्रिटिश दास्तां से मुक्त कराना था। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान गदर क्रांतिकारियों ने भारत लौटकर छावनियों के सैनिकों को बगावत के लिए प्रेरित किया, जिसकी व्यापक जानकारी आपको विकिपीडिया संदर्भ पर मिल जाएगी। फरवरी 1915 की विद्रोह योजना विफल होने के बावजूद इस आंदोलन ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अमिट छाप छोड़ी।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार में बाबू वीर कुंवर सिंह और उनके उत्तराधिकारी अमर सिंह द्वारा संचालित संघर्ष तथा उनकी सैन्य रणनीतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बाबू वीर कुंवर सिंह ने शाहबाद क्षेत्र से अंग्रेजों के विरुद्ध अभियान चलाते हुए आजमगढ़ और बलिया तक अपनी सैन्य गतिविधियाँ विस्तारित कीं, और गंगा नदी पार करने के दौरान अंग्रेजी सेना की गोली से घायल होने पर अपनी बांह स्वयं काटकर गंगा को समर्पित कर दी थी।
2. वीर कुंवर सिंह की मृत्यु के पश्चात् उनके भाई अमर सिंह ने कैमूर की पहाड़ियों को अपना मुख्य केंद्र बनाकर ब्रिटिश सेना के विरुद्ध एक प्रभावी गोरिल्ला युद्ध (छापामार युद्ध) और समानांतर प्रशासन का संचालन किया था।
3. अमर सिंह के नेतृत्व में विद्रोही सैनिकों ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध केवल रक्षात्मक लड़ाइयाँ लड़ीं और उन्होंने कभी भी अंग्रेजी छावनियों पर सीधे हमले या ब्रिटिश अधिकारियों को चुनौती देने की रणनीति नहीं अपनाई।
4. अमर सिंह के संघर्ष को कुचलने के लिए ब्रिटिश सरकार ने कैप्टन डनबार और मेजर डगलस जैसे सैन्य अधिकारियों को नियुक्त किया था, और अंततः गिरफ्तार किए जाने के पश्चात कलकत्ता की अलीपुर जेल में रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हो गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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1857 के महान विद्रोह के स्वरूप और प्रकृति के संबंध में विभिन्न ब्रिटिश और भारतीय विचारकों/इतिहासकारों के प्रसिद्ध कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. "यह तथाकथित प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम न तो प्रथम, न ही राष्ट्रीय और न ही स्वतंत्रता संग्राम था।" — आर.सी. मजूमदार (R.C. Majumdar)
2. "यह जन-विद्रोह था, जिसका राष्ट्रीय चरित्र और राष्ट्रीय चेतना का स्पष्ट अभाव था, तथा यह मुख्य रूप से सिपाही विद्रोह से बढ़कर कुछ नहीं था।" — सर जॉन सीले (Sir John Seeley)
3. "1857 का विद्रोह एक सुनियोजित राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम था, जो ब्रिटिश दासता के विरुद्ध विदेशी सत्ता को उखाड़ फेंकने के लिए लड़ा गया पहला संगठित युद्ध था।" — वी.डी. सावरकर (V.D. Savarkar)
4. "यह धर्म और स्वतंत्रता के नाम पर असंतुष्ट सामंतों, पारंपरिक कुलीन वर्ग और सिपाहियों का एक प्रतिक्रियावादी एवं बर्बरतापूर्ण गठबंधन था, जो आधुनिकता के विरुद्ध था।" — टी.आर. होम्स (T.R. Holmes)
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
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प्राचीन भारतीय इतिहास में बौद्ध धर्म एवं जैन धर्म के दार्शनिक सिद्धांतों और उनकी मान्यताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जहाँ जैन धर्म आत्मा के अस्तित्व में पूर्ण विश्वास करता है और मोक्ष प्राप्ति के लिए कायाकल्प तथा संथारा (या संलेखना) जैसी कठोर तपस्या व शरीर के अंत पर बल देता है, वहीं बौद्ध धर्म 'अनात्मवाद' के सिद्धांत का प्रतिपादन करता है अर्थात् वह स्थिर आत्मा या जीव के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करता है।
2. जैन धर्म के 'स्यादवाद' (अनेकांतवाद) के सिद्धांत के अनुसार सभी वस्तुमों के अनेक धर्म होते हैं और ज्ञान की सापेक्षता को स्वीकार करते हुए किसी भी सत्य को पूर्ण रूप से एक ही दृष्टिकोण से नहीं देखा जा सकता, जबकि बुद्ध ने चरम तपस्या और भोग-विलासिता दोनों का त्याग कर 'मध्यम मार्ग' (मज्झिम पतिपदा) का उपदेश दिया।
3. जैन संघ के विपरीत, बौद्ध संघ में महिलाओं को प्रवेश की अनुमति प्रारंभ से ही उनके प्रथम उपदेश के समय से ही सुलभ थी, और बुद्ध की माता महाप्रजापति गौतमी बौद्ध संघ में प्रविष्ट होने वाली प्रथम भिक्षुणी थीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे के संयुक्त सैन्य अभियानों तथा उनके सामरिक संघर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मार्च 1858 में ब्रिटिश सेनापति सर ह्यूरोज द्वारा झाँसी के किले की घेराबंदी किए जाने पर, रानी लक्ष्मीबाई ने अप्रतिम वीरता का प्रदर्शन किया तथा तात्या टोपे द्वारा बेतवा नदी के तट पर भेजी गई सैन्य सहायता के बावजूद वे झाँसी को बचाने में असफल रहीं और कालपी की ओर प्रस्थान किया।
2. कालपी में पराजय के उपरांत रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे ने चंबल नदी पार कर ग्वालियर के सिंधिया शासक (जयाजीराव सिंधिया) की सेना को पराजित किया, जिसके परिणामस्वरूप ग्वालियर के रणनीतिक किले पर क्रांतिकारियों का अधिकार हो गया और उन्होंने नाना साहब को पेशवा घोषित किया।
3. ग्वालियर के पतन के अंतिम निर्णायक युद्ध (कोटा-की-सराय का युद्ध) में रानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजों से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुईं, जबकि तात्या टोपे बच निकलने में सफल रहे और बाद में मानसिंह (नरवर के जागीरदार) के विश्वासघात के कारण पकड़े गए तथा उन्हें शिवपुरी में फांसी दे दी गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों (जैसे पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा) में हुए घटनाक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व एक स्थानीय पुस्तक विक्रेता पीर अली खान ने किया था, जिसके परिणामस्वरूप पटना के कमिश्नर विलियम टेलर ने अत्यधिक दमनकारी कार्रवाई करते हुए पीर अली खान सहित कई विद्रोहियों को फांसी पर लटका दिया था।
2. दानापुर छावनी की 7वीं, 8वीं और 40वीं रेजिमेंट के सिपाहियों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया और सोन नदी पार कर आरा के बाबू कुंवर सिंह की सेना में शामिल हो गए थे।
3. मुजफ्फरपुर और छपरा (सारण) में विद्रोह की आग भड़कने के बाद यूरोपीय अधिकारियों और नागरिकों ने सुरक्षित स्थानों पर शरण ली, और छपरा में स्थानीय जमींदारों तथा मोहम्मद हुसैन खान के नेतृत्व में ब्रिटिश सत्ता को चुनौती दी गई थी।
4. दानापुर के सिपाहियों के विद्रोह के तुरंत बाद अंग्रेजों ने बाबू कुंवर सिंह की बढ़ती लोकप्रियता और सैन्य क्षमता को देखते हुए उन्हें पटना के कमिश्नर कार्यालय में प्रशासनिक सलाहकार के रूप में नियुक्त करने का औपचारिक प्रस्ताव भेजा था जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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