त्वरित लिंक्स
History of India
11 views
1857 के महान विद्रोह के दौरान ब्रिटिश सेना के विभिन्न सैन्य अधिकारियों और उनके द्वारा विद्रोह के दमन किए गए क्षेत्रों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
- 1. दिल्ली — जॉन निकलसन और विलियम हडसन
- 2. लखनऊ — सर कॉलिन कैंपबेल और हेनरी लॉरेंस
- 3. झांसी और ग्वालियर — सर ह्यूरोज
- 4.
कानपुर — जेम्स आउट्राम और हेनरी हैवलॉक उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
1857 के महान विद्रोह को कुचलने के लिए ब्रिटिश साम्राज्य ने अपने कई अनुभवी और क्रूर सैन्य अधिकारियों को तैनात किया था। दिल्ली में विद्रोह का दमन जॉन निकलसन और विलियम हडसन ने किया, जहाँ निकलसन गंभीर रूप से घायल हो गए थे। लखनऊ में हेनरी लॉरेंस और बाद में सर कॉलिन कैंपबेल ने विद्रोहियों का मुकाबला किया। झांसी और ग्वालियर में सर ह्यूरोज ने रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे की सेना को पराजित किया। इसके अतिरिक्त, कानपुर में शुरुआती अभियानों में जेम्स आउट्राम और हेनरी हैवलॉक (तथा बाद में कॉलिन कैंपबेल) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस प्रकार दिए गए सभी युग्म सही सुमेलित हैं। इस ऐतिहासिक संघर्ष के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
→
मौर्य साम्राज्य की केंद्रीय प्रशासनिक व्यवस्था, विभिन्न विभागों और उनके प्रमुख अधिकारियों (तीर्थों) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मौर्य प्रशासन में सर्वोच्च स्तर के मंत्रियों और अधिकारियों को 'तीर्थ' कहा जाता था, जिनकी कुल संख्या अर्थशास्त्र के अनुसार अठारह थी; इनमें 'समहर्त्ता' संपूर्ण साम्राज्य की आय का संग्रहण और वार्षिक बजट तैयार करने का मुख्य अधिकारी होता था, जबकि 'संनिधातृ' राजकीय कोषागार और भण्डारगृह का मुख्य संरक्षक था।
2. अशोक के शासनकाल में प्रांतीय प्रशासन के अंतर्गत साम्राज्य चार प्रमुख प्रांतों में विभाजित था—तक्षशिला, उज्जैन, सुवर्णगिरि और तोसली, और इन प्रांतों का शासन सामान्यतः शाही परिवार के राजकुमारों (कुमार या आर्यपुत्र) द्वारा चलाया जाता था।
3. मेगास्थनीज के 'इंडिका' के अनुसार मौर्यकालीन नगर प्रशासन छह समितियों में विभाजित था, जिसमें प्रत्येक समिति में पाँच सदस्य होते थे और तीसरी समिति का प्रमुख कार्य जन्म-मृत्यु का पंजीकरण रखना था, जिसे विश्व के शुरुआती जनगणना अभिलेखों में से एक माना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद में विद्रोह के दमन और उसके नेतृत्वकर्ताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फैजाबाद में मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने विद्रोह का नेतृत्व किया था, जिन्हें पकड़ने के लिए अंग्रेजों ने पचास हजार रुपये का इनाम घोषित किया था, और अंततः ब्रिटिश सेनापति कैंपबेल ने फैजाबाद और अवध क्षेत्र में विद्रोह का पूर्ण दमन किया।
2. बरेली में रोहिलखंड के पूर्व शासक के उत्तराधिकारी खान बहादुर खान ने विद्रोह का सफलतापूर्वक संचालन किया था, किंतु अंग्रेजों की ओर से जनरल हवलॉक ने अत्यधिक क्रूरता के साथ बरेली पर पुनः अधिकार कर खान बहादुर खान को मृत्युदंड दिया।
3. इलाहाबाद (प्रयागराज) में लियाकत अली ने विद्रोह की कमान संभाली थी, जहाँ ब्रिटिश अधिकारी कर्नल नील ने अत्यंत निर्ममता से इस विद्रोह को कुचल दिया और सैकड़ों लोगों को बिना मुकदमे के फांसी पर लटका दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
→
दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक विकास और विभिन्न राजवंशों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अलाउद्दीन खिलजी ने अपनी सेना के आधुनिकीकरण और घोड़े दागने (दाग) तथा सैनिकों का हुलिया लिखने की प्रथा शुरू करने के साथ-साथ बाजार नियंत्रण प्रणाली (मूल्य नियंत्रण) लागू की थी, जिसके लिए 'दीवान-ए-रियासत' और 'शहना-ए-मंडी' नामक विशेष अधिकारियों की नियुक्ति की गई थी।
2. गयासुद्दीन तुगलक ने तुगलक वंश की स्थापना के पश्चात अपने पूर्ववर्ती सुल्तानों की कठोर राजस्व नीतियों को उदार बनाते हुए 'हक्कीय-ए-शर्ब' (सिंचाई कर) को पूरी तरह समाप्त कर दिया और कृषि के विकास के लिए कुओं व नहरों के निर्माण को प्रोत्साहित किया।
3. मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में तांबे और कांसे के सिक्कों के प्रचलन (सांकेतिक मुद्रा) के निर्णय को समकालीन इतिहासकार बदायुनी ने 'मूर्खतापूर्ण प्रयोग' कहा, क्योंकि साम्राज्य में व्यापक स्तर पर जाली सिक्कों की ढलाई होने लगी थी और लोग अपने पुराने चांदी व सोने के सिक्के जमा करने लगे थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
→
1857 के महान विद्रोह के उदय के पीछे निहित सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक कारणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रिटिश भू-राजस्व नीतियों (जैसे स्थायी बंदोबस्त, रैयतवाड़ी और महालवाड़ी) ने पारंपरिक कृषक वर्ग और पारंपरिक जमींदारों की आर्थिक कमर तोड़ दी थी, तथा ब्रिटिश औद्योगिक वस्तुओं के मुक्त आयात ने पारंपरिक भारतीय हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योगों को पूरी तरह तबाह कर दिया।
2. सामाजिक और धार्मिक सुधारों के तहत लाए गए 'धार्मिक अयोग्यता अधिनियम, 1850' (Religious Disabilities Act) ने हिंदू कानून के उस नियम को संशोधित कर दिया जिसके तहत धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को पैतृक संपत्ति से वंचित कर दिया जाता था, जिसे रूढ़िवादी भारतीयों ने ईसाई धर्म में धर्मांतरण को बढ़ावा देने वाला षड्यंत्र माना।
3. लार्ड डलहौजी द्वारा अपनाए गए 'व्यपगत के सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) के अंतर्गत सतारा, नागपुर और झांसी जैसी रियासतों का विलय कर लिया गया, तथा कुशासन के आरोप में अवध का विलय किए जाने से वहाँ के सैनिकों और नवाब के आश्रितों में गहरा रोष उत्पन्न हुआ।
4. सेना के भीतर नस्लीय भेदभाव, कम वेतन, विदेश यात्रा भत्ता समाप्त किए जाने से संबंधित 'सामान्य सेवा enlistment अधिनियम' (General Service Enlistment Act) और भारतीय सैनिकों की पगड़ी तथा दाढ़ी रखने पर प्रतिबंध लगाने जैसे सैन्य निर्णयों ने सिपाहियों के असंतोष को और अधिक प्रज्वलित कर दिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
मुगलकालीन प्रशासनिक व्यवस्था और मनसबदारी प्रथा के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अकबर द्वारा प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के लिए शुरू की गई 'मनसबदारी प्रणाली' मूल रूप से मंगolियाई सैन्य संगठन की 'दशमलव पद्धति' पर आधारित थी, जिसमें प्रत्येक मनसबदार को 'जात' और 'सवार' के पद प्रदान किए जाते थे जहाँ 'जात' उसके व्यक्तिगत वेतन और पद को तथा 'सवार' उसके द्वारा रखे जाने वाले गुड़सवारों की संख्या को दर्शाता था।
2. जहांगीर के शासनकाल में मनसबदारी व्यवस्था के अंतर्गत 'दुअस्पा-सिंहअस्पा' (Du-aspa Sih-aspa) प्रणाली की शुरुआत की गई, जिसके तहत मनसबदारों को अपने मूल सवार पदों को बढ़ाए बिना अतिरिक्त घोड़े रखने की अनुमति दी जाती थी और इसके लिए उन्हें अतिरिक्त वेतन भी दिया जाता था।
3. शाहजहां के शासनकाल में मनसबदारी व्यवस्था में 'माहवार' (Month-scale) प्रणाली लागू की गई, जिसके अंतर्गत यदि जागीर से प्राप्त होने वाली आय (खर्च) पूरे वर्ष के वेतन के बराबर होती थी, तो उसे छह महीने या उससे कम के अनुपात में समायोजित किया जाता था ताकि राजकोष पर वित्तीय बोझ को नियंत्रित किया जा सके।
4. औरंगजेब के शासनकाल के उत्तरार्ध में मनसबदारों की संख्या में अत्यधिक वृद्धि होने के कारण 'जागीर संकट' (Crisis of Jagirdars) उत्पन्न हो गया, क्योंकि उपलब्ध जागीरें (पाइबाफी भूमि) कम पड़ गईं और मनसबदारों को वास्तविक जागीर आवंटन (बे-जागीर) मिलने में भारी विलंब होने लगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.