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History of India
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मध्यकालीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में भक्ति और सूफी आंदोलनों की विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. दक्षिण भारत में भक्ति आंदोलन का प्रसार अलवार (वैष्णव संतों) और नयनार (शैव संतों) द्वारा किया गया था, जिन्होंने जाति व्यवस्था और रूढ़िवादिता का विरोध करते हुए तमिल भाषा में अपने उपदेश दिए और भक्ति को जन-जन तक पहुँचाया।
- 2. उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन को Ramananda (रामानंद) द्वारा प्रसारित किया गया था, जिन्होंने भक्ति के मार्ग को सभी जातियों और वर्गों के लिए खोल दिया तथा कबीर, रैदास और पीपा जैसे उनके शिष्य विभिन्न सामाजिक पृष्ठभूमियों से संबंधित थे।
- 3. सूफी संतों (औलिया) का 'चिश्ती सिलसिला' भारत में सबसे अधिक लोकप्रिय हुआ, जिसकी स्थापना भारत में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती ने अजमेर में की थी, और इस सिलसिले के संतों ने संगीत (समां) को ईश्वर की प्राप्ति का एक माध्यम माना तथा राजकीय संरक्षण से दूर रहना पसंद किया।
- 4. मध्यकालीन सूफी परंपरा में 'वहदत-उल-वजूद' (अस्तित्व की एकता) का सिद्धांत इब्न अल-अरबी द्वारा प्रतिपादित किया गया था, जिसे भारतीय संदर्भ में सूफी संतों और अद्वैत वेदांत के दार्शनिक विचारों के बीच एक महत्वपूर्ण वैचारिक सेतु माना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन भक्ति और सूफी आंदोलनों के ऐतिहासिक संदर्भ में पूर्णतः सत्य हैं। दक्षिण भारत में अलवार और नयनार संतों ने भक्ति आंदोलन की नींव रखी थी, जबकि रामानंद ने इसे उत्तर भारत में लोकप्रिय बनाया। चिश्ती सिलसिला भारत में सूफीवाद का सबसे प्रभावशाली और लोकप्रिय मार्ग बना, और 'वहदत-उल-वजूद' के सिद्धांत ने सूफियों और भारतीय दार्शनिकों के बीच समन्वय स्थापित किया। अधिक जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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महात्मा गांधी के भारत के शुरुआती सत्याग्रहों—विशेष रूप से चंपारण (1917) और खेड़ा (1918)—तथा असहयोग आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चंपारण सत्याग्रह के दौरान राजकुमार शुक्ल के अनुरोध पर गांधीजी ने बिहार के चंपारण का दौरा किया था, जहाँ यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर थोपी गई 'तीनकठिया' प्रथा (जिसके तहत किसानों को अपनी कुल भूमि के 3/20 भाग पर नील की खेती करना अनिवार्य था) के विरुद्ध सफल संघर्ष किया गया।
2. वर्ष 1918 के खेड़ा सत्याग्रह में गांधीजी ने फसल खराब होने के बावजूद ब्रिटिश प्रशासन द्वारा भू-राजस्व वसूले जाने के विरोध में किसानों का नेतृत्व किया, और इस आंदोलन के दौरान सरदार वल्लभभाई पटेल पहली बार गांधीजी के संपर्क में आए तथा उनके एक प्रमुख सहयोगी के रूप में उभरे।
3. फरवरी 1922 में घटित 'चौरी-चौरा' की हिंसक घटना से आहत होकर महात्मा गांधी ने नागपुर में आयोजित कांग्रेस की बैठक में एकतरफा रूप से असहयोग आंदोलन को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की घोषणा कर दी थी, जिससे उस समय के अधिकांश युवा राष्ट्रवादी नेता अत्यधिक संतुष्ट और प्रसन्न थे।
4. असहयोग आंदोलन के दौरान ही पहली बार भारतीय राजनीति में व्यापक स्तर पर ग्रामीण किसानों, महिलाओं और मध्यम वर्ग की सहभागिता सुनिश्चित हुई, जिसने ब्रिटिश शासन को पहली बार एक राष्ट्रव्यापी चुनौती दी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह की असफलता के मुख्य कारणों और इसके नेतृत्व की संरचनात्मक कमियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस ऐतिहासिक विद्रोह के पास अखिल भारतीय स्तर पर किसी एक सर्वमान्य, दूरदर्शी और केन्द्रीकृत राजनीतिक नेतृत्व का पूर्ण अभाव था, जिसके कारण विभिन्न क्षेत्रों के स्थानीय नेता अपने संकीर्ण व क्षेत्रीय हितों से ऊपर उठकर अंग्रेजों के विरुद्ध कोई एकीकृत दीर्घकालिक रणनीति नहीं बना सके।
2. दिल्ली के प्रतीकात्मक सम्राट घोषित किए गए बहादुर शाह ज़फ़र के पास न तो कोई वास्तविक सैन्य शक्ति थी और न ही विद्रोही सैनिकों के मध्य अनुशासन तथा समन्वय स्थापित करने की व्यावहारिक क्षमता।
3. आधुनिक शिक्षित मध्यम वर्ग, व्यापारियों और अंग्रेजी शिक्षा से लाभान्वित भारतीय बुद्धिजीवियों ने इस विद्रोह का सक्रिय रूप से नेतृत्व किया तथा इसे ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध एक सफल आधुनिक लोकतांत्रिक जन-क्रांति में बदल दिया।
4. अधिकांश बड़ी देशी रियासतों और भारतीय शासकों (जैसे हैदराबाद के निजाम, ग्वालियर के सिंधिया और भोपाल के नवाब) ने विद्रोहियों का साथ देने के बजाय ब्रिटिश सत्ता के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखी, जिसके संदर्भ में ब्रिटिश गवर्नर-जनरल लॉर्ड कैनing ने टिप्पणी की थी कि इन शासकों ने 'तूफान में ब्रेकवाटर' (तरंगरोधक) की तरह कार्य किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा 1815 में स्थापित 'आत्मीय सभा' ने एकेश्वरवाद के प्रचार और मूर्तिपूजा के विरोध का समर्थन किया, जबकि उनके द्वारा 1828 में स्थापित ब्रह्म समाज ने वेदों की अचूकता (Infallibility) और उनके दिव्य होने के सिद्धांत को पूरी तरह स्वीकार किया था।
2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और पाखंड खंडनी पताका फहराते हुए मूर्तिपूजा, बहुदेववाद, अवतारवाद तथा जन्मजात जाति व्यवस्था का कड़ा विरोध किया था।
3. प्रार्थना समाज के संस्थापकों ने अंतर्जातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह, स्त्री शिक्षा और दलित उत्थान जैसे सामाजिक सुधारों पर विशेष बल दिया, और इसकी प्रेरणा केशव चंद्र सेन की महाराष्ट्र यात्रा से मिली थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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जहाँदार शाह के शासनकाल में लाल कुँवर नामक वेश्या का अत्यधिक प्रभाव था, उसने किस व्यवस्था को बढ़ावा दिया?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के उदय के लिए उत्तरदायी कारणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजनीतिक कारणों के तहत लॉर्ड डलहौजी की 'व्यपगत का सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति के अंतर्गत सतारा, नागपुर और झाँसी जैसी रियासतों का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय कर लिया गया, तथा अवध का अधिग्रहण 'कुशासन' का आरोप लगाकर किया गया जिससे वहाँ की जनता और सैनिकों में भारी रोष उत्पन्न हुआ।
2. सामाजिक और धार्मिक सुधारों के अंतर्गत ब्रिटिश सरकार द्वारा सती प्रथा (1829) और नरबलि पर प्रतिबंध लगाने तथा 'धार्मिक निर्योग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act, 1850) पारित करने से पारंपरिक रूढ़िवादी भारतीय समाज को यह विश्वास हो गया कि सरकार उनके धर्म और संस्कृति को नष्ट करना चाहती है।
3. आर्थिक कारणों में कंपनी की भू-राजस्व नीतियों और पारंपरिक हस्तशिल्प उद्योगों के पतन ने किसानों और कारीगरों को तबाह कर दिया, किंतु 'इनाम कमीशन' (Inam Commission) की स्थापना का उद्देश्य केवल किसानों को कर राहत देना था, जिससे भूस्वामी वर्ग को भारी आर्थिक लाभ हुआ।
4. सैन्य कारणों के अंतर्गत 'सामान्य सेवा enlistment अधिनियम' (General Service Enlistment Act, 1856) के तहत भारतीय सैनिकों के लिए समुद्र पार जाकर सेवा देना अनिवार्य कर दिया गया, जिसे उच्च वर्ण के सैनिकों ने अपनी धार्मिक मान्यताओं के विरुद्ध माना।
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