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History of India
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भारत में क्रांतिकारी आंदोलन के प्रथम चरण के संदर्भ में, निम्नलिखित संगठनों और उनके स्थापना स्थलों/संस्थापकों से संबंधित युग्मों पर विचार कीजिए:
- 1. अनुशीलन समिति (ढाका) — प्रमथनाथ मित्र और पुलिन बिहारी दास
- 2. अभिनव भारत सोसाइटी — विनायक दामोदर सावरकर और गणेश सावरकर
- 3. हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) — सचिंद्रनाथ সान्याल, राम प्रसाद बिस्मिल और जोगेश चंद्र चटर्जी
- 4.
गदर पार्टी — सोहन सिंह भकना और लाला हरदयाल उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेंकने के लिए कई क्रांतिकारी संगठनों की स्थापना की गई थी। 1902 में कलकत्ता में प्रथम अनुशीलन समिति की नींव पड़ी थी, जिसे बाद में ढाका में पुलिन बिहारी दास ने और विस्तारित किया। 1904 में सावरकर बंधुओं द्वारा 'मित्र भारत' को 'अभिनव भारत सोसाइटी' के रूप में पुनर्गठित किया गया। 1924 में कानपुर में सचिंद्रनाथ सान्याल, राम प्रसाद बिस्मिल और जोगेश चंद्र चटर्जी ने 'हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HRA) की स्थापना की। इसके अतिरिक्त, 1913 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में सोहन सिंह भकना के नेतृत्व और लाला हरदयाल के सक्रिय सहयोग से 'गदर पार्टी' की स्थापना की गई थी। इन सभी संगठनों ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक और आर्थिक सुधारों के संदर्भ में, 'दीवान-ए-मुस्तखराज' और 'दीवान-ए-कोही' विभागों के सृजन और उनके संस्थापकों के संबंध में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. दीवान-ए-मुस्तखराज (लगभग बकाया करों की वसूली के लिए विभाग) — अलाउद्दीन खिलजी
2. दीवान-ए-कोही (कृषि विकास और बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए विभाग) — मुहम्मद बिन तुगलक
3. दीवान-ए-अर्ज (सैन्य विभाग की देखरेख के लिए) — बलबन
4. दीवान-ए-बदगान (दासों की देखभाल के लिए विभाग) — फिरोजशाह तुगलक
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
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बौद्ध धर्म और जैन धर्म के प्रारंभिक दार्शनिक विकास तथा उनकी मान्यताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बौद्ध धर्म के मध्य मार्ग (मझिम प्रतिपदा) के विपरीत, जैन धर्म ने शरीर को कष्ट देने और अत्यधिक कायाक्लेश (तपस्या) पर विशेष बल दिया, क्योंकि महावीर स्वामी का मानना था कि कर्मों के विनाश और संचित कर्मों से मुक्ति के लिए घोर तपस्या ही एकमात्र साधन है।
2. बौद्ध धर्म और जैन धर्म दोनों ही वेदों की प्रमाणिकता और वैदिक यज्ञों की कर्मकांडीय व्यवस्था को अस्वीकार करते हैं, किंतु आत्मा के अस्तित्व के प्रश्न पर दोनों में मौलिक मतभेद है क्योंकि बौद्ध धर्म 'अनित्यवादी' होने के कारण आत्मा (पुद्गल या जीव) के शाश्वत अस्तित्व को स्वीकार नहीं करता, जबकि जैन धर्म प्रत्येक जीव में 'जीव' (आत्मा) की अनंतता और उसकी पवित्रता को स्वीकार करता है।
3. जैन धर्म में मोक्ष प्राप्ति के लिए महाव्रतों (अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह) के कठोर पालन पर जोर दिया गया है, जबकि बौद्ध धर्म ने अष्टांगिक मार्ग के माध्यम से निर्माण प्राप्ति का उपदेश दिया है, जिसमें से प्रथम तीन मार्ग नैतिक आचरण (शीश) से संबंधित हैं।
4. बौद्ध धर्म की प्रथम बौद्ध संगीति राजगृह में महाकस्सप की अध्यक्षता में अजातशत्रु के शासनकाल में हुई थी, जबकि जैन धर्म की प्रथम संगीति पाटलिपुत्र में स्थूलभद्र की अध्यक्षता में हुई थी, जिसके परिणामस्वरूप जैन धर्म श्वेतांबर और दिगंबर दो शाखाओं में विभाजित हो गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश क्राउन द्वारा लाई गई भारत सरकार अधिनियम 1858 और क्वीन विक्टोरिया की घोषणा (ऐतिहासिक उद्घोषणा) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम के तहत भारत का शासन सीधे ब्रिटिश महारानी के नियंत्रण में आ गया, और 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' तथा 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' को समाप्त कर उनके समस्त अधिकार 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) और उसकी सहायता के लिए गठित पंद्रह सदस्यीय 'इंडियन कौंसिल' को सौंप दिए गए।
2. इलाहाबाद में आयोजित एक भव्य दरबार में लॉर्ड कैनिंग द्वारा पढ़ी गई क्वीन विक्टोरिया की घोषणा में यह स्पष्ट किया गया कि ब्रिटिश सरकार भारतीय रियासतों को हड़पने की अपनी पुरानी विस्तारवादी नीतियों (जैसे गोद निषेध सिद्धांत) को त्यागती है और देसी राजाओं के दत्तक पुत्र लेने के अधिकारों को मान्यता देती है।
3. घोषणा पत्र में यह भी आश्वासन दिया गया कि भारत के लोगों की धार्मिक और सामाजिक मान्यताओं में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा, तथा नस्ल, वंश या धर्म के भेदभाव के बिना सभी योग्य भारतीयों को उनकी पात्रता के आधार पर सरकारी सेवाओं में निष्पक्ष रूप से नियुक्त किया जाएगा।
4. विद्रोह के दौरान अवध के तालुकदारों और बड़े भूस्वामियों द्वारा अंग्रेजों के विरुद्ध अत्यधिक मुखर प्रतिरोध किए जाने के कारण, ब्रिटिश सरकार ने दंडात्मक कार्रवाई करते हुए अवध की समस्त भूमि को हमेशा के लिए जब्त कर लिया और वहाँ कभी भी जमींदारी व्यवस्था बहाल नहीं की।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मलिक काफूर ने अलाउद्दीन की मृत्यु के बाद लगभग कितने दिनों तक शासन का वास्तविक नियंत्रण अपने हाथ में रखा?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश क्राउन द्वारा लाए गए 'भारत सरकार अधिनियम 1858' (Government of India Act 1858) और क्वीन विक्टोरिया की ऐतिहासिक घोषणा के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम के द्वारा भारत का शासन सीधे ब्रिटिश महारानी के अधीन कर दिया गया, जिसके तहत 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' और 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर' की दोहरी शासन प्रणाली को समाप्त कर दिया गया तथा भारत के राज्य सचिव (Secretary of State for India) के पद का सृजन किया गया, जिसे सहायता देने के लिए 15 सदस्यीय भारतीय परिषद का गठन किया गया।
2. क्वीन विक्टोरिया की घोषणा (जिसे 'मैग्नाकार्टा' भी कहा जाता है) में स्पष्ट रूप से यह आश्वासन दिया गया कि ब्रिटिश सरकार भारतीय रियासतें हथियाने की नीति (व्यपगत का सिद्धांत) को त्याग देगी और भविष्य में किसी भी प्रकार का क्षेत्रीय विस्तार नहीं किया जाएगा।
3. इस घोषणा में धार्मिक और सामाजिक मामलों में अहस्तक्षेप की नीति अपनाने तथा नस्ल, वर्ण या जन्म के आधार पर किसी भी भारतीय को योग्यता के बिना भेदभाव किए बिना सार्वजनिक सेवाओं में नियुक्त करने का वादा किया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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