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History of India
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1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका तथा उनके संघर्षों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजिस कादिर को अवध का नवाब घोषित कर लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व किया और ब्रिटिश रेजिडेंसी की घेराबंदी के दौरान सैन्य रणनीतियों का प्रभावी संचालन किया।
- 2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता है, ने फैजाबाद और रोहिलखंड क्षेत्र में अंग्रेजों के विरुद्ध जिहाद का आह्वान किया और ब्रिटिश सेनापतियों को अपनी गुरिल्ला युद्ध शैली से कड़ी चुनौती दी।
- 3. लखनऊ की अंतिम रक्षा और ब्रिटिश नियंत्रण स्थापित करने के दौरान सर कॉलिन कैंपबेल और सर जेम्स आउट्राम ने मुख्य भूमिका निभाई, तथा बेगम हजरत महल ने अंग्रेजों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया और पेंशन स्वीकार कर ली।
- 4. मौलवी अहमदुल्लाह शाह पर अंग्रेजों ने अत्यधिक इनाम घोषित किया था, और अंततः पुवियाँ (पवैन) के राजा के विश्वासघात के कारण उन्हें अंग्रेजों द्वारा घेर लिया गया तथा युद्ध में उनकी मृत्यु हो गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने अत्यंत साहसिक नेतृत्व प्रदान किया। बेगम हजरत महल ने अपने पुत्र बिरजिस कादिर को नवाब घोषित कर संघर्ष की कमान संभाली। पतन के बाद उन्होंने अंग्रेजों के समक्ष आत्मसमर्पण करने से इनकार कर दिया और नेपाल चली गईं, जहाँ उनकी मृत्यु हुई (अतः कथन 3 गलत है)। मौलवी अहमदुल्लाह शाह (जिन्हें 'डंका शाह' कहा जाता था) ने अंग्रेजों के खिलाफ कड़ा संघर्ष किया, जिन्हें पवैन के राजा के विश्वासघात के कारण मार दिया गया। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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सविनय अवज्ञा आंदोलन के दूसरे चरण (1932-34) तथा इसके दौरान ब्रिटिश सरकार द्वारा अपनाई गई दमनकारी नीतियों और राजनीतिक घटनाक्रमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1931 में लंदन में आयोजित द्वितीय गोलमेज सम्मेलन की असफलता के बाद, महात्मा गांधी के भारत लौटने पर वायसराय लॉर्ड विलिंगटन ने कांग्रेस के साथ बातचीत करने से इनकार कर दिया और जनवरी 1932 में सविनय अवज्ञा आंदोलन के दूसरे चरण की शुरुआत होते ही गांधीजी सहित सभी प्रमुख नेताओं को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया।
2. ब्रिटिश प्रधानमंत्री रामसे मैकडोनाल्ड द्वारा अगस्त 1932 में घोषित 'सांप्रदायिक पंचाट' (Communal Award) के तहत दलितों (अछूतों) को भी मुसलमानों और सिखों की तरह पृथक निर्वाचन का अधिकार दे दिया गया, जिसके विरोध में महात्मा गांधी ने यरवदा जेल में आमरण अनशन शुरू किया और इसके परिणामस्वरूप पूना पैक्ट पर हस्ताक्षर हुए।
3. सविनय अवज्ञा आंदोलन के इस दूसरे चरण के दौरान बंगाल में महिलाओं ने अत्यंत साहसिक भूमिका निभाई, और कमिला की दो स्कूली छात्राओं—सुनीति चौधरी और शांति घोष—ने ब्रिटिश मजिस्ट्रेट स्टीवर्ट की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
4. कांग्रेस ने वर्ष 1934 में औपचारिक रूप से सविनय अवज्ञा आंदोलन को पूरी तरह समाप्त करने की घोषणा कर दी, क्योंकि जनता का उत्साह और मनोबल लगातार पुलिस दमन और गिरफ्तारियों के कारण क्षीण हो चुका था, तथा गांधीजी ने इस समय कांग्रेस की सक्रिय राजनीति से अलग होकर अपना ध्यान पूरी तरह रचनात्मक कार्यों पर केंद्रित कर दिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारण और बैरकपुर छावनी में हुई घटना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जनवरी 1857 में कलकत्ता के पास डमडम शस्त्रागार में नए 'एनफील्ड राइफल' और उसमें प्रयुक्त होने वाले कारतूसों के संबंध में यह अफवाह फैली कि इन कारतूसों के आवरण में गाय और सूअर की चर्बी का प्रयोग किया गया है, जिसे लोड करने से पहले दांतों से काटना पड़ता था।
2. बैरकपुर छावनी (34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री) के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के विरोध में अपने वरिष्ठ अधिकारियों (लेफ्टिनेंट बॉब और सार्जेंट ह्यूसन) पर आक्रमण कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें 8 अप्रैल 1857 को फाँसी दे दी गई।
3. मंगल पांडे की फाँसी के उपरांत बैरकपुर छावनी की 34वीं और 19वीं एनफैंट्री को तुरंत सम्मानित किया गया और ब्रिटिश सरकार ने सेना में नई राइफलों के प्रयोग को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया ताकि सैनिकों का असंतोष शांत किया जा सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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सिंधु घाटी सभ्यता की परिपक्व अवस्था के नगर-नियोजन, जल-निकास प्रणाली और विशेष संरचनाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हड़प्पा सभ्यता के अधिकांश नगरों में 'ग्रिड प्रणाली' (Grid System) पर आधारित सड़क विन्यास पाया जाता था, जहाँ मुख्य सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं और नगर को आयताकार या वर्गाकार खंडों में विभाजित करती थीं।
2. मोहनजोदड़ो से प्राप्त 'विशाल स्नानागार' (Great Bath) का उपयोग संभवतः किसी विशेष अनुष्ठानिक स्नान के लिए किया जाता था, जिसकी उत्तर और दक्षिण दिशाओं में सीढ़ियाँ बनी थीं तथा इसके जल के रिساव को रोकने के लिए ईंटों के बीच बिटुमिन (तारकोल) की परत का उपयोग किया गया था।
3. सिंधु सभ्यता के लगभग सभी घरों में व्यक्तिगत कुएँ, स्नानघर और उत्तम ढकी हुई नालियों की व्यवस्था थी, किंतु लोथल और चहुंदड़ो इसके अपवाद हैं जहाँ घरों में जल-निकास के लिए सोक-पिट (सोख्ता गड्ढे) या मृदभांड आधारित जल-मल निकास प्रणाली का उपयोग किया गया था।
4. कालीबंगा के लगभग सभी घरों और महत्वपूर्ण दीवारों के निर्माण में धूप में पकाई गई ईंटों (Sun-baked bricks) का व्यापक उपयोग किया गया था, जबकि समकालीन हड़प्पा और मोहनजोदड़ो में भट्टी में पक्की ईंटों (Kiln-burnt bricks) का मुख्य रूप से प्रयोग हुआ था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और पुर्तगाली सत्ता की स्थापना के प्रारंभिक दौर के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फ्रांसिस्को डी अल्मेडा भारत में पहला पुर्तगाली गवर्नर था, जिसने 'ब्लू वाटर पॉलिसी' (नीले पानी की नीति) का प्रतिपादन किया था, जिसका उद्देश्य हिंद महासागर पर पुर्तगाली प्रभुत्व स्थापित करना और व्यापारिक एकाधिकार सुनिश्चित करना था।
2. अल्बुकर्क को भारत में पुर्तगाली साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है, जिसने वर्ष 1510 में बीजापुर के आदिल शाह से गोवा को छीनकर पुर्तगाली नियंत्रण में ले लिया था और पुर्तगालियों को भारतीय महिलाओं के साथ विवाह करने के लिए प्रोत्साहित किया था।
3. नुनीकुओ (Nuno da Cunha) के गवर्नर बनने के बाद पुर्तगालियों ने वर्ष 1530 में अपना आधिकारिक मुख्यालय कोचीन से स्थानांतरित कर गोवा बना लिया तथा हुगली और बेसिन के क्षेत्रों पर भी अपना प्रभाव फैलाया।
4. वास्को डी गामा की भारत की दूसरी यात्रा (वर्ष 1502) के दौरान उसने कोचीन में पुर्तगालियों की पहली फैक्ट्री या कारखाने की स्थापना की थी, जबकि पुर्तगालियों द्वारा भारत में निर्मित पहला दुर्ग 'सैन एंजेलो किला' कोचीन में ही बनाया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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छठी शताब्दी ईसा पूर्व में 'सोलह महाजनपदों' के उदय और मगध साम्राज्य के अन्य महाजनपदों पर वर्चस्व स्थापित करने के ऐतिहासिक कारणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मगध की प्रारंभिक राजधानी राजगृह (गिरिव्रज) पाँच पहाड़ियों से घिरी होने के कारण प्राकृतिक रूप से अत्यंत सुरक्षित थी, जिसे आसानी से भेदा नहीं जा सकता था।
2. मगध साम्राज्य की भौगोलिक स्थिति ऐसे क्षेत्र में थी जहाँ प्रचुर मात्रा में लौह अयस्क की खानें उपलब्ध थीं, जिससे उन्नत किस्म के अस्त्र-शस्त्र और कृषि उपकरण बनाना संभव हुआ।
3. मगध के उत्कर्ष में गंगा, सोन और चंबल जैसी नदियों के जलमार्गों का होना प्रमुख कारण था, जिससे व्यापारिक सुगमता और सेना की त्वरित आवाजाही सुनिश्चित हुई।
4. बिम्बिसार और अजातशत्रु जैसे महत्त्वाकांक्षी शासकों ने वैवाहिक संधियों और आक्रामक विस्तार की नीतियों के साथ-साथ सर्वप्रथम अपनी सेना में हाथियों के सामरिक महत्व को समझा और उसका बड़े पैमाने पर प्रयोग किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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