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History of India
Asked 2 months ago · Viewed 16 times

1857 के महान विद्रोह की असफलता के प्रमुख कारणों और इसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. विद्रोहियों के पास किसी केंद्रीय संगठन, एकसमान राजनीतिक दृष्टिकोण और अखिल भारतीय स्तर के सर्वमान्य सर्वोच्च नेता का पूर्ण अभाव था, जिससे विभिन्न क्षेत्रों के नेता अपने स्थानीय हितों और सीमाओं से बंधे रहे।
  2. 2. अधिकांश भारतीय रियाسतों और बड़े राजाओं (जैसे सिंधिया, होलकर, और हैदराबाद के निजाम) ने विद्रोह का साथ देने के बजाय ब्रिटिश सत्ता का सक्रिय समर्थन किया, जिसे इतिहासकारों ने ब्रिटिश साम्राज्य के लिए 'तूफान में बांध का काम' (breakwater) करने वाली दीवार कहा है।
  3. 3. आधुनिक सैन्य तकनीक, कुशल संचार के साधन (टेलीग्राफ और रेलवे) और अनुशासित सैन्य संगठन का सुदृढ़ लाभ ब्रिटिश पक्ष के पास था, जबकि विद्रोही सिपाहियों के पास हथियारों की भारी कमी और आपसी समन्वय का अभाव था।
  4. 4. शिक्षित मध्यम वर्ग, व्यापारियों और आधुनिक बुद्धिजीवियों ने 1857 के विद्रोह में सबसे आगे बढ़कर सक्रिय रूप से भाग लिया और ब्रिटिश नीतियों के खिलाफ इसे एक अखिल भारतीय आधुनिक राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम का सफल वैचारिक नेतृत्व प्रदान किया।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

1857 के विद्रोह की असफलता के लिए कई आंतरिक और बाहरी कारक उत्तरदायी थे। कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं क्योंकि विद्रोहियों में केंद्रीय संगठन, अखिल भारतीय नेतृत्व, आधुनिक तकनीक और संसाधनों का अभाव था। इसके विपरीत, अधिकांश भारतीय शासकों और रियासतों ने अंग्रेजों का साथ दिया। वहीं, कथन 4 असत्य है क्योंकि उस समय का शिक्षित मध्यम वर्ग, व्यापारी और आधुनिक बुद्धिजीवी वर्ग इस विद्रोह से तटस्थ रहा या उसने अंग्रेजों का समर्थन किया, क्योंकि वे इस विद्रोह को रूढ़िवादी और प्रतिक्रियावादी मानते थे। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इस महत्वपूर्ण चरण के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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Related Questions

→ 1857 के महान विद्रोह के विभिन्न क्षेत्रों में ब्रिटिश सेना द्वारा विद्रोह के दमन के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. दिल्ली - जॉन निकलसन 2. लखनऊ - सर कॉलिन कैंपबेल 3. कानपुर - मेजर जनरल हैवलॉक 4. झाँसी - जेम्स आउट्राम उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं? → बंगाल विभाजन (1905) और इसके विरोध में संचालित स्वदेशी एवं बहिष्कार आंदोलन के वैचारिक तथा व्यावहारिक आयामों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बंगाल विभाजन के निर्णय के विरोध में 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में आयोजित ऐतिहासिक बैठक में प्रसिद्ध 'बहिष्कार प्रस्ताव' पारित किया गया, तथा इस आंदोलन के दौरान सर्वप्रथम 'वंदे मातरम्' को आंदोलन का मुख्य राष्ट्रीय गीत बनाया गया। 2. स्वदेशी आंदोलन के दौरान आर्थिक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन पर बल देते हुए आचार्य प्रफुल्ल चन्द्र राय ने 'बंगाल केमिकल एंड फार्मास्युटिकल वक्र्स' की तर्ज पर अनेक स्वदेशी उद्योगों, बैंकों और बीमा कंपनियों की स्थापना की रूपरेखा तैयार की थी। 3. स्वदेशी आंदोलन का प्रभाव केवल बंगाल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने इसे बंबई और पुणे में, लाला लाजपत राय ने पंजाब में, तथा सैयद حیدر رضا (सैयद हैदर रज़ा) ने दिल्ली में इस आंदोलन का सक्रिय नेतृत्व किया। 4. इस आंदोलन के दौरान मुस्लिम किसानों और बहुसंख्यक मुस्लिम आबादी ने राष्ट्रवादी नेताओं का पूर्ण समर्थन किया, तथा पूर्वी बंगाल के नवाब सलीमुल्लाह ने स्वदेशी आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए ब्रिटिश विभाजनकारी नीतियों का पुरजोर विरोध किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → 19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों और उनके संस्थापकों तथा वैचारिक प्रवृत्तियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राजा राममोहन राय द्वारा 1815 में स्थापित 'आत्मीय सभा' और 1828 में स्थापित 'ब्रह्म समाज' का मुख्य उद्देश्य मूर्तिपूजा का खंडन, बहुदेववाद का विरोध और एकेश्वरवाद का प्रचार करना था, तथा उन्होंने कभी भी पाश्चात्य शिक्षा या आधुनिक विज्ञान का समर्थन नहीं किया। 2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और वेदों को अपौरुषेय एवं अचूक मानते हुए मूर्तिपूजा, अवतारवाद, बाल विवाह और जाति व्यवस्था का तीव्र विरोध किया। 3. केशव चंद्र सेन के ब्रह्म समाज से अलग होने के पश्चात 1866 में देवेन्द्रनाथ टैगोर ने 'आदि ब्रह्म समाज' की स्थापना की, जबकि केशव चंद्र सेन ने 'भारतीय ब्रह्म समाज' की स्थापना की, जो आगे चलकर बाल विवाह विरोधी बिल (नेचुरल मैरिज एक्ट, 1872) के प्रावधानों के उल्लंघन के कारण और अधिक विभाजित हो गया। 4. ज्योतिराव फुले ने 1873 में 'सत्यशोधक समाज' की स्थापना की, जिसका प्रमुख उद्देश्य शूद्रों और अति-शूद्रों को ब्राह्मणवादी वर्चस्व, धार्मिक पाखंडों और सामाजिक असमानता से मुक्त कराना था, तथा उनकी प्रसिद्ध पुस्तक 'गुलामगिरी' इसी वैचारिक संघर्ष पर आधारित है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों (पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा) में हुए घटनाक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व पीर अली नामक एक पुस्तक विक्रेता ने किया था, जिसे कमिश्नर विलियम टेलर के आदेश पर गिरफ्तार कर फांसी दे दी गई थी। 2. दानापुर छाउनी के 7वीं, 8वीं और 40वीं रेजिमेंट के सिपाहियों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया और सोन नदी पार करके बाबू कुंवर सिंह से जा मिले। 3. मुजफ्फरपुर और छपरा में विद्रोह की शुरुआत यूरोपीय अधिकारियों के विरुद्ध स्थानीय जमींदारों और अफीम एजेंटों के संयुक्त नेतृत्व में हुई, जहाँ अंग्रेजों ने तुरंत मार्शल लॉ लागू कर दिया था। 4. आरा (शाहाबाद) में बाबू कुंवर सिंह के नेतृत्व में विद्रोहियों ने ब्रिटिश कैदियों को मुक्त कराने के साथ-साथ कलेक्टर लिटन (Litton) को पराजित कर शहर पर अधिकार कर लिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं? → महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
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