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History of India
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यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और पुर्तगाली सत्ता की स्थापना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. फ्रांसिस्को डी अल्मेडा भारत में प्रथम पुर्तगाली वायसराय था, जिसने 'ब्लू वाटर पॉलिसी' (शांत जल नीति) का प्रतिपादन किया था, जिसका उद्देश्य हिंद महासागर पर पुर्तगालियों का एकाधिकार स्थापित करना था।
- 2. अल्बुकर्क को भारत में पुर्तगाली साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है, जिसने 1510 ई. में बीजापुर के सुल्तान यूसुफ आदिल शाह से गोवा को छीनकर पुर्तगाली नियंत्रण में लिया और भारतीय महिलाओं से विवाह करने की नीति को प्रोत्साहित किया।
- 3. नीनो डी कुन्हा ने पुर्तगाली राजधानी को कोचीन से गोवा स्थानांतरित किया तथा 1534 ई. में गुजरात के शासक बहादुर शाह से बेसिन और दीव के क्षेत्रों पर अधिकार प्राप्त किया।
- 4. पुर्तगालियों द्वारा स्थापित 'कार्टाज' (Cartaz) व्यवस्था के अंतर्गत एशियाई जहाजों को हिंद महासागर में व्यापार करने के लिए पुर्तगाली प्राधिकारियों से परमिट लेना पड़ता था और कुछ विशेष वस्तुओं (जैसे काली मिर्च और अफीम) के व्यापार पर पुर्तगाली क्राउन का पूर्ण एकाधिकार था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। फ्रांसिस्को डी अल्मेडा ने हिंद महासागर में अपनी नौसैनिक प्रभुत्व को बढ़ाने के लिए 'ब्लू वाटर पॉलिसी' अपनाई थी। अल्बुकर्क ने 1510 में गोवा पर अधिकार किया और भारत में पुर्तगाली शक्ति को सुदृढ़ किया। नीनो डी कुन्हा ने 1530 में कोचीन के स्थान पर गोवा को पुर्तगाली बस्तियों की आधिकारिक राजधानी बनाया तथा बेसिन और दीव पर अधिकार किया। इसके अतिरिक्त, हिंद महासागर में व्यापारिक नियंत्रण के लिए 'कार्टाज-अमीदा' प्रणाली लागू की गई थी जिसके तहत बिना परमिट के व्यापार करना वर्जित था। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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भारत छोड़ो आंदोलन (1942) तथा सुभाष चंद्र बोस द्वारा संचालित स्वतंत्रता संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 8 अगस्त 1942 को बंबई के गोवालिया टैंक मैदान में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा 'भारत छोड़ो' प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद गांधीजी ने 'करो या मरो' का नारा दिया, और 'ऑपरेशन जीरो आवर' के तहत कांग्रेस के सभी शीर्ष नेताओं को रातों-रात गिरफ्तार कर अहमदनगर फोर्ट तथा अन्य जेलों में नजरबंद कर दिया गया।
2. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान देश के विभिन्न क्षेत्रों में हिंसक और अहीसक माध्यमों से समानांतर सरकारों का गठन किया गया, जिनमें सतारा (महाराष्ट्र) की 'प्रति सरकार' सबसे लंबे समय तक (1945 तक) प्रभावी रही, जिसका नेतृत्व वाई.बी. चव्हाण और नाना पाटिल जैसे नेताओं ने किया था।
3. सुभाष चंद्र बोस ने जनवरी 1941 में ब्रिटिश नजरबंदी को चकमा देकर कलकत्ता से गुप्त रूप से पलायन किया ('ग्रेट एस्केप') तथा पेशावर एवं काबुल के रास्ते बर्लिन पहुँचे, जहाँ उन्होंने जर्मन सहयोग से 'फ्री इंडिया सेंटर' की स्थापना की और भारतीय युद्धबंदियों को संगठित करके 'इंडियन लीजन' का गठन किया।
4. सिंगापुर में रास बिहारी बोस द्वारा आजाद हिंद फौज (INA) की कमान सौंपे जाने के बाद सुभाष चंद्र बोस ने अक्टूबर 1943 में 'अस्थाई स्वतंत्र भारत सरकार' (Arzi Hukumat-e-Azad Hind) के गठन की घोषणा की, जिसे जापान, जर्मनी और इटली सहित कुल नौ धुरी राष्ट्रों (Axis Powers) ने औपचारिक मान्यता प्रदान की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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दिल्ली में 1857 के विद्रोह और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मेरठ से आए विद्रोही सिपाहियों द्वारा 11 मई 1857 को दिल्ली पहुँचकर बहादुर शाह जफर को भारत का सम्राट घोषित किए जाने के बाद, जफर ने इस प्रस्ताव को तुरंत उत्साहपूर्वक स्वीकार कर लिया और विद्रोही सेनाओं के वित्तीय व सैन्य प्रबंधन की पूर्ण व्यक्तिगत कमान अपने हाथों में ले ली थी।
2. यद्यपि जफर इस विद्रोह के प्रतीकात्मक और नाममात्र के केंद्रबिंदु थे, तथापि दिल्ली में विद्रोहियों की वास्तविक सैन्य, प्रशासनिक और रणनीतिक कमान जनरल बख्त खान के पास थी, जिन्हें बरेली की सेना के साथ आने के बाद 'साहिब-ए-आलम बहादुर' की उपाधि दी गई थी।
3. दिल्ली पर ब्रिटिश सेना द्वारा सितंबर 1857 में किए गए अंतिम और निर्णायक आक्रमण के दौरान कश्मीरी गेट पर संघर्ष करते हुए ब्रिटिश अधिकारी जॉन निकलसन गंभीर रूप से घायल हो गए थे और बाद में उनकी मृत्यु हो गई थी।
4. हुमायूं के मकबरे से ब्रिटिश अधिकारी मेजर विलियम हडसन द्वारा गिरफ्तार किए जाने के पश्चात बहादुर शाह जफर पर दिल्ली के लाल किले में मुकदमा चलाया गया और उन्हें दोषी ठहराकर रंगून निर्वासित कर दिया गया, जहाँ वर्ष 1862 में उनका निधन हो गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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राजधानी परिवर्तन का मुख्य कारण इतिहासकारों ने क्या माना है?
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चंपारण सत्याग्रह (1917) और खेड़ा सत्याग्रह (1918) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चंपारण में यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर 'तीनकथा प्रणाली' (कुल भूमि के 3/20वें हिस्से पर नील की अनिवार्य खेती) थोपी गई थी, जिसके विरुद्ध महात्मा गांधी ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद, जे.बी. कृपलानी और महादेव देसाई के सहयोग से सफल सत्याग्रह का नेतृत्व किया था।
2. चंपारण कृषि समिति (Champaran Agrarian Enquiry Committee) के दबाव में ब्रिटिश सरकार को झुकना पड़ा, और इस समिति की संस्तुतियों के आधार पर 'चंपारण कृषि अधिनियम' पारित करके तीनकथा प्रथा को कानूनी रूप से समाप्त कर दिया गया तथा किसानों से वसूले गए अवैध धन का एक हिस्सा वापस दिलाया गया।
3. वर्ष 1918 के खेड़ा सत्याग्रह में फसल खराब होने के बावजूद ब्रिटिश प्रशासन द्वारा लगान वसूली माफ न किए जाने के कारण गांधीजी ने किसानों को राजस्व का भुगतान पूरी तरह रोक देने का आह्वान किया था, और इस आंदोलन के दौरान सरदार वल्लभभाई पटेल, इंदुलाल याज्ञिक और शकरलाल बैंकर्स जैसे स्थानीय नेताओं ने गांधीजी का सक्रिय रूप से साथ दिया था।
4. खेड़ा सत्याग्रह के दौरान ही महात्मा गांधी ने पहली बार अखिल भारतीय स्तर पर 'असहयोग आंदोलन' का स्पष्ट खाका तैयार किया था, क्योंकि सरकार ने खेड़ा के किसानों की सभी माँगो को तुरंत स्वीकार करते हुए हमेशा के लिए भू-राजस्व समाप्त कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के अन्य प्रमुख क्षेत्रों जैसे पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व एक स्थानीय पुस्तक विक्रेता पीर अली खान ने किया था, जिसे कमिश्नर विलियम टेलर के आदेश पर गिरफ्तार कर सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई थी।
2. दानापुर छावनी के भारतीय सैनिकों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया था और वे अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष करने के लिए तुरंत शाहबाद क्षेत्र की ओर बढ़ गए जहाँ उन्होंने बाबू वीर कुंवर सिंह की सेना के साथ मिलकर साझा मोर्चा बनाया।
3. मुजफ्फरपुर और छपरा क्षेत्रों में विद्रोहियों का नेतृत्व करने वाले प्रमुख स्थानीय जमींदार बाबुगढ़ सिंह थे, जिन्होंने ब्रिटिश खजाने को पूरी तरह से लूटकर ब्रिटिश प्रशासन को उत्तर बिहार में पूर्ण रूप से उखाड़ फेंका था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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