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History of India
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सिंधु घाटी सभ्यता की नगर योजना, वास्तुकला और जल निकास प्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. हड़प्पाकालीन अधिकांश नगरों में सामान्यतः दो भाग होते थे—पश्चिमी टीला (दुर्ग क्षेत्र) और पूर्वी टीला (आवासीय क्षेत्र), किंतु धौलाविरा एकमात्र ऐसा स्थल है जो तीन भागों (दुर्ग, मध्यम नगर और निचला नगर) में विभाजित था तथा यहाँ भव्य पाषाण वास्तुकला के साक्ष्य मिलते हैं।
- 2. कालीबंगा और लोथल दोनों ही स्थलों से अग्निकुंडों (Fire Altars) या वेदियों के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं, जो यह दर्शाते हैं कि सिंधु सभ्यता के लोग धार्मिक अनुष्ठानों और अग्नि पूजा से भली-भांति परिचित थे।
- 3. सिंधु घाटी सभ्यता के लगभग सभी घरों में व्यक्तिगत रूप से कुएं (Private Wells) बनाने की अनिवार्य व्यवस्था थी, तथा नालियों का निर्माण इस प्रकार किया गया था कि प्रत्येक घर का गंदा पानी सीधे मुख्य सड़क के बड़े नालों में न जाकर पहले सड़क किनारे बने सोख्ता गड्डों (Cesspits) या सोखने वाले बर्तनों में जमा होता था।
- 4. मोहनजोदड़ो का 'विशाल स्नागार' (Great Bath) सार्वजनिक स्नान या धार्मिक अनुष्ठानों के लिए प्रयोग किया जाता था, जिसके उत्तर और दक्षिण दोनों सिरों पर नीचे उतरने के लिए सीढ़ियाँ बनी थीं, तथा इसके जल के रिसाव को रोकने के लिए ईंटों के जोड़ों के बीच बिटुमिन (Bitumen/तारकोल) की परत का उपयोग किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि अधिकांश हड़प्पाकालीन नगर दो भागों में विभाजित थे, जबकि धौलाविरा तीन भागों (दुर्ग, मध्यम नगर और निचला नगर) में विभाजित था और यहाँ अद्वितीय पाषाण वास्तुकला पाई गई है। कथन 2 सही है क्योंकि कालीबंगा और लोथल दोनों से अग्नि वेदिकाएं या अग्निकुंड मिले हैं। कथन 3 गलत है, क्योंकि यद्यपि अधिकांश घरों में कुएं होते थे, किंतु सिंधु सभ्यता में नालियों की व्यवस्था इतनी उन्नत थी कि घरों का गंदा पानी सीधे सड़क की नालियों में जाता था, न कि सोख्ता गड्डों में (यद्यपि कुछ स्थानों पर इसके अपवाद मिलते हैं, किंतु सामान्य नियम यह नहीं था)। कथन 4 सही है, क्योंकि मोहनजोदड़ो के विशाल स्नागार के जल-रोधी (Water-tight) निर्माण के लिए ईंटों के बीच बिटुमिन का लेप लगाया गया था। सिंधु सभ्यता के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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छठी शताब्दी ईसा पूर्व के 'सोलह महाजनपदों' और मगध साम्राज्य के उत्कर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अंगुट्ठ निकाय और भगवती सूत्र जैसे बौद्ध एवं जैन ग्रंथ प्राचीन भारत के सोलह महाजनपदों की सूची प्रदान करते हैं, जिनमें वज्जी और मल्ल संघ प्राचीन गणतंत्रात्मक व्यवस्था के उदाहरण थे, जबकि अधिकांश अन्य महाजनपद राजतंत्रात्मक थे।
2. मगध की प्रारंभिक राजधानी राजगृह (गिरिव्रज) थी, जो पाँच पहाड़ियों से घिरी होने के कारण प्राकृतिक रूप से अत्यंत सुरक्षित थी, और बाद में रणनीतिक रूप से अधिक महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित पाटलिपुत्र को राजधानी बनाया गया।
3. हर्यक वंश के शासक बिम्बिसार ने अपने साम्राज्य के विस्तार के लिए वैवाहिक संबंधों, कूटनीति और विजय की नीति का पालन किया, जबकि उसके पुत्र अजातशत्रु ने वैशाली के लिच्छवियों को पराजित करने के लिए रथमुसल और महाकंटकसूल जैसे नवीन सैन्य हथियारों का पहली बार प्रयोग किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन और इसके विरोध में संचालित 'स्वदेशी एवं बहिष्कार आंदोलन' के विभिन्न आयामों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल विभाजन की औपचारिक घोषणा के पश्चात, 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में आयोजित ऐतिहासिक बैठक में सुरेंद्रनाथ बनर्जी द्वारा 'बहिष्कार प्रस्ताव' प्रस्तुत किया गया था, जिसका उद्देश्य ब्रिटिश निर्मित कपड़ों, नमक और चीनी जैसी वस्तुओं का पूर्ण त्याग करना था।
2. आंदोलन के दौरान रचनात्मक कार्यों और आत्म-शक्ति (आत्मनिर्भरता) पर विशेष बल दिया गया, जिसके तहत प्रफुल्ल चंद्र राय (P.C. Ray) ने 'बंगाल केमिकल एंड फार्मास्युटिकल वर्क्स' की स्थापना की, जो स्वदेशी उद्योग के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित हुई।
3. स्वदेशी आंदोलन का प्रभाव केवल बंगाल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने इसे बॉम्बे और पुणे में, लाला लाजपत राय ने पंजाब में, तथा सैयद حیدر رضا (Syed Haider Raza) ने दिल्ली में इस आंदोलन का सफलतापूर्वक नेतृत्व और प्रसार किया।
4. वर्ष 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में कांग्रेस के अध्यक्ष पद से दादाभाई नौरोजी ने पहली बार 'स्वराज' (Self-Government) शब्द का आधिकारिक प्रयोग किया तथा कांग्रेस ने स्वदेशी, बहिष्कार और राष्ट्रीय शिक्षा से संबंधित प्रस्तावों का औपचारिक रूप से अनुमोदन किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद में विद्रोह के दमन तथा उसके नेतृत्वकर्ताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फैजाबाद में विद्रोह का नेतृत्व मौलवी अहमदullah शाह ने किया था, जिन्हें 'फैजाबाद का डंका शाह' भी कहा जाता था, और इस क्षेत्र में ब्रिटिश सेना के जनरल कैंपबेल तथा बाद में कर्नल मैकडॉवेल ने अत्यधिक संघर्ष के बाद इस विद्रोह को कुचला था।
2. रोहिलखंड क्षेत्र के बरेली में विद्रोह का नेतृत्व खान बहादुर खान ने किया था, जिन्होंने अपने आपको रोहिलखंड का नवाब घोषित कर प्रशासनिक व्यवस्था संभाली थी, और बाद में ब्रिटिश जनरल कैंपबेल ने कड़े संघर्ष के बाद बरेली पर पुन: अधिकार कर खान बहादुर खान को फांसी दे दी थी।
3. इलाहाबाद (प्रयागराज) और बनारस में हुए विद्रोह का दमन ब्रिटिश सेनापति कर्नल नील (James Neil) द्वारा अत्यधिक क्रूरता के साथ किया गया था, जहाँ इलाहाबाद में मौलवी लियाकत अली ने विद्रोह का सफल नेतृत्व किया था।
4. मौलवी लियाकत अली को इलाहाबाद में पराजित होने के बाद ब्रिटिश सेना द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया था और उन्हें तुरंत फांसी की सजा दे दी गई थी, जिससे इस क्षेत्र में विद्रोह का पूरी तरह अंत हो गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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सिंधु घाटी सभ्यता की नगर योजना, वास्तुकला और सामाजिक-आर्थिक विशिष्टताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हड़प्पा सभ्यता की अधिकांश बस्तियों में नगर योजना सामान्यतः 'ग्रिड प्रणाली' (Grid System) पर आधारित थी, जिसमें सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं और बस्तियों को मुख्य रूप से दो भागों—पश्चिमी भाग (दुर्ग या गढ़) और पूर्वी भाग (निचला नगर)—में विभाजित किया गया था।
2. मोहनजोदड़ो से प्राप्त 'विशाल स्नानागार' (Great Bath) इस सभ्यता की उत्कृष्ट इंजीनियरिंग का परिचय देता है, जिसके फर्श पर ईंटों की दोहरी परत बिछाकर डामर (Bitumen) या तारकोल का लेप लगाकर जल-निरोधक (Water-tight) बनाया गया था, और इसका मुख्य उपयोग धार्मिक अनुष्ठानों या सार्वजनिक स्नान के लिए किया जाता था।
3. चहुँदरो एक ऐसा सैंधव स्थल था जहाँ कोई भी गढ़ या दुर्ग नहीं पाया गया है, और यहाँ से मनके बनाने का कारखाना (Bead-making factory), तांबे की वस्तुएं बनाने के साक्ष्य तथा वक्राकार ईंटों के प्रमाण मिले हैं।
4. सिंधु घाटी सभ्यता के लोग लोहे और पारे के धातु-विज्ञान (Metallurgy) से भली-भांति परिचित थे तथा उन्होंने तांबे और टिन को मिलाकर बड़े पैमाने पर उच्च कोटि के लोहे के अस्त्र-शस्त्रों का निर्माण किया था, जिसके कारण वे समकालीन मेसोपोटामिया की सभ्यता पर सैन्य रूप से हावी रहे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारण और बैरकपुर छावनी की घटना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जनवरी 1857 में बंगाल सेना में पुरानी ब्राउन बेस बंदूक के स्थान पर नई 'एनफील्ड राइफल' को शामिल किया गया, जिसके कारतूस में गाय और सूअर की चरबी के प्रयोग की अफवाह ने भारतीय सैनिकों की धार्मिक भावनाओं को आहत किया।
2. बैरकपुर छावनी (34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री) के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के विरुद्ध बगावत करते हुए ब्रिटिश अधिकारियों सार्जेंट ह्यूग बो और लेफ्टिनेंट बॉग पर हमला कर दिया था।
3. मंगल पांडे को घटना के तुरंत बाद गिरफ्तार कर लिया गया और सैन्य अदालत (कोर्ट मार्शल) के आदेश पर 8 अप्रैल 1857 को निर्धारित तिथि से पहले ही उन्हें फांसी दे दी गई।
4. बैरकपुर छावनी में मंगल पांडे की शहादत के पश्चात 34वीं और 19वीं रेजीमेंट के सभी सैनिकों ने तुरंत अंग्रेजों के विरुद्ध संपूर्ण भारत में एक साथ सशस्त्र विद्रोह का औपचारिक बिगुल बजा दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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