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History of India
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सिंधु घाटी सभ्यता की कृषि व्यवस्था, सिंचाई तकनीकों और पुरातात्विक साक्ष्यों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. चोलिस्तान और हरियाणा के कुछ स्थलों (जैसे बनावली और कुणाल) से हल्के टेराकोटा (पकी मिट्टी) से बने हल के मॉडल प्राप्त हुए हैं, जो यह दर्शाते हैं कि इस सभ्यता के लोग कृषि कार्यों के लिए लकड़ी और पकी हुई मिट्टी के हलों का उपयोग करते थे।
  2. 2. अफगानिस्तान में स्थित 'शूतुघ्घाई' नामक हड़प्पाकालीन स्थल से नहरों के अवशेष प्राप्त हुए हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सिंधु सभ्यता के लोग शुष्क क्षेत्रों में कृत्रिम सिंचाई प्रणाली से भली-भांति परिचित थे।
  3. 3. लोथल और रंगपुर से धान की भूसी (Rice husk) के साक्ष्य मिले हैं, जो यह प्रमाणित करते हैं कि हड़प्पा काल के दौरान गुजरात के इन तटीय क्षेत्रों में चावल की खेती की जाती थी।
  4. 4. मोहनजोदड़ो और हड़प्पा के विशाल अन्गारों (Granaries) के समीप से बड़े पैमाने पर सिंचाई के लिए कृत्रिम झीलों और बड़े जलाशयों (Reservoirs) के निर्माण के साक्ष्य मिले हैं, जिनका नियंत्रण सीधे केंद्रीय राजकीय सत्ता द्वारा किया जाता था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 3 सही हैं। सिंधु घाटी सभ्यता में कृषि अर्थव्यवस्था काफी उन्नत थी। बनावली और कुणाल (हरियाणा) से टेराकोटा के बने हल के खिलौने या मॉडल मिले हैं, और कालीबंगा से जुते हुए खेत के साक्ष्य मिलते हैं। अफगानिस्तान में स्थित 'शूतुघ्घाई' (Shortugai) से नहरों के अवशेष मिले हैं जो सिंचाई व्यवस्था की पुष्टि करते हैं। लोथल और रंगपुर से धान की भूसी मिलने से चावल की खेती के साक्ष्य भी प्रमाणित होते हैं। हालाँकि, कथन 4 गलत है क्योंकि जलाशयों और जल प्रबंधन के सबसे उन्नत साक्ष्य 'धौलावीरा' से मिले हैं, लेकिन अन्गारों के समीप विशाल कृत्रिम झीलों के केंद्रीय नियंत्रण का कोई अकाट्य प्रमाण नहीं है। इस विषय की विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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