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History of India
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सिंधु घाटी सभ्यता की वास्तुकला, नगर नियोजन और पुरातात्विक स्थलों से प्राप्त विशिष्ट साक्ष्यों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. हड़प्पा सभ्यता के अधिकांश स्थलों में नगर दो भागों में विभाजित थे — पश्चिमी भाग (दुर्ग क्षेत्र) और पूर्वी भाग (आवासीय क्षेत्र), किंतु धौलावीरा एकमात्र ऐसा स्थल है जो तीन भागों (दुर्ग, मध्यम नगर और निचला नगर) में विभाजित था और जहाँ से एक उन्नत जल प्रबंधन प्रणाली (Water Management System) के साक्ष्य मिले हैं।
  2. 2. लोथल से प्राप्त गोदीबाड़ा (Dockyard) के ईंटों से बने बेसिन के साक्ष्य से यह सिद्ध होता है कि यह स्थल फारसी खाड़ी के साथ अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार का एक प्रमुख बंदरगाह था, और यहीं से अग्निकुंड (Fire Altars) के भी साक्ष्य मिले हैं।
  3. 3. कालीबंगा से जुते हुए खेतों (Ploughed fields) के साक्ष्य मिले हैं जहाँ एक ही साथ दो अलग-अलग फसलें (जैसे चना और सरसों) उगाने की प्राचीनतम प्रणाली के संकेत मिलते हैं, तथा इसके फर्श पर अलंकृत ईंटों (Decorated bricks) का प्रयोग किया गया था।
  4. 4. सुरकोटदा से सिंधु सभ्यता के घोड़े के अवशेष (अस्थियाँ) होने के पुष्ट पुरातात्विक साक्ष्य प्राप्त हुए हैं, जिसके आधार पर अधिकांश इतिहासकारों का यह मानना है कि सिंधु घाटी सभ्यता के लोग घोड़े के प्रयोग और उससे जुड़ी युद्ध तकनीकों से पूरी तरह परिचित थे और उन्होंने घोड़े को पालतू बना लिया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सही हैं। धौलावीरा (गुजरात) तीन भागों में विभाजित था और यहाँ अद्वितीय जल प्रबंधन तकनीक जैसे विशाल जलाशयों के प्रमाण मिले हैं। लोथल से ईंटों का बना गोदीबाड़ा (Dockyard) और अग्निकुंड मिले हैं, जो व्यापार और धार्मिक अनुष्ठानों को दर्शाते हैं। कालीबंगा से जुते हुए खेत और अलंकृत ईंटों के साक्ष्य मिले हैं। किंतु कथन 4 भ्रामक है; यद्यपि सुरकोटदा से घोड़े की अस्थियों के कुछ अवशेष अवश्य मिले हैं, परंतु यह एक विवादास्पद विषय है और सर्वमान्य ऐतिहासिक तथ्य यह है कि सिंधु घाटी सभ्यता के लोग मूलतः घोड़े पर आधारित संस्कृति से नहीं थे और घोड़ा इस सभ्यता का प्रमुख पालतू जानवर नहीं था। विकिपीडिया संदर्भ
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भारतीय स्वतंत्रता और देश के विभाजन से जुड़ी 'माउंटबेटन योजना' (3 जून योजना, 1947) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस योजना में यह प्रावधान किया गया था कि बंगाल और पंजाब की प्रांतीय विधानसभाओं की बैठकें दो भागों में होंगी—एक मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों के प्रतिनिधियों के लिए और दूसरी शेष जिलों के प्रतिनिधियों के लिए—ताकि यह तय किया जा सके कि प्रांत का विभाजन किया जाना चाहिए या नहीं। 2. उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत (NWFP) और असम के सिलहट जिले में भारत या पाकिस्तान में शामिल होने का निर्णय जनमत संग्रह (Referendum) के माध्यम से लिया जाना तय किया गया था। 3. योजना के तहत ब्रिटिश भारत को सत्ता हस्तांतरण के लिए 15 अगस्त 1947 की तारीख निर्धारित की गई थी तथा दोनों नए स्वतंत्र डोमिनियन (भारत और पाकिस्तान) की सीमाओं के निर्धारण के लिए सर रेडक्लिफ की अध्यक्षता में एक 'सीमा आयोग' (Boundary Commission) का गठन किया गया था। 4. माउंटबेटन योजना को कांग्रेस और मुस्लिम लीग दोनों ने बिना किसी संशोधन या आपत्ति के पूर्ण रूप से स्वीकार कर लिया था, और इसी योजना के आधार पर भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 ब्रिटिश संसद द्वारा पारित किया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के विद्रोह के विभिन्न कारणों (राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और धार्मिक) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राजनीतिक कारणों के अंतर्गत लॉर्ड डलहौजी की 'व्यपगत सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति ने सातारा, नागपुर, झाँसी और अवध जैसी रियासतों का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय कर दिया, जिससे भारतीय शासकों और वहाँ की जनता में गहरा असंतोष फैल गया था। 2. आर्थिक कारणों में ब्रिटिश भू-राजस्व नीतियों और उद्योगों के विनाशात्मक प्रभावों ने पारंपरिक ग्रामीण अर्थव्यवस्था को तहस-नहस कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप किसानों और पारंपरिक शिल्पकारों का एक बड़ा वर्ग अंग्रेजों के विरुद्ध हो गया। 3. सामाजिक और धार्मिक कारणों में वर्ष 1850 के 'धार्मिक निर्योग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act) ने हिंदू धर्म त्यागने या ईसाई धर्म अपनाने वाले व्यक्तियों को उनके पैतृक संपत्ति के अधिकारों से वंचित करने के पुराने प्रावधान को समाप्त कर दिया, जिससे रूढ़िवादी भारतीयों में यह आशंका उत्पन्न हो गई कि ब्रिटिश सरकार जानबूझकर ईसाई धर्म को बढ़ावा दे रही है। 4. ब्रिटिश सेना के भीतर मौजूद नस्लीय भेदभाव, भारतीय सैनिकों को मिलने वाले कम वेतन और पदोन्नति के अवसरों के अभाव ने भी इस विद्रोह की पृष्ठभूमि तैयार करने में एक महत्वपूर्ण उत्प्रेरक की भूमिका निभाई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह की असफलता और इसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. विद्रोह का नेतृत्व करने वाले अधिकांश देशी शासक जैसे नाना साहब, कुंवर सिंह और बेगम हजरत महल अपने-अपने क्षेत्रों तक सीमित रहे और उनमें पूरे देश को एक सूत्र में पिरोने वाले किसी साझा राजनीतिक एजेंडे या अखिल भारतीय दृष्टिकोण का पूर्ण अभाव था। 2. विद्रोहियों के पास आधुनिक हथियारों, केंद्रीकृत सैन्य संगठन, अनुशासित कमान और सुदृढ़ संचार साधनों की भारी कमी थी, जिसके कारण वे ब्रिटिश सेना की तकनीकी और संगठनात्मक श्रेष्ठता का मुकाबला लंबे समय तक नहीं कर सके। 3. देश के अधिकांश बड़े रजवाड़ों (जैसे हैदराबाद, ग्वालियर के सिंधिया और इंदौर के होलकर) तथा शिक्षित मध्य वर्ग व व्यापारियों ने इस विद्रोह का सक्रिय समर्थन किया और अंग्रेजों को वित्तीय सहायता प्रदान की। 4. विद्रोहियों के पास विजय के पश्चात स्थापित होने वाली नई राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था का कोई स्पष्ट खाका या भविष्य का वैकल्पिक ब्लूप्रिंट नहीं था, जो इसकी सबसे बड़ी वैचारिक कमजोरी साबित हुई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भारत छोड़ो आंदोलन (1942) और सुभाष चंद्र बोस तथा इंडियन नेशनल आर्मी (INA) के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 8 अगस्त 1942 को बॉम्बे के गोवालिया टैंक मैदान में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा 'भारत छोड़ो' प्रस्ताव पारित किए जाने के तुरंत बाद, ब्रिटिश सरकार ने 'ऑपरेशन ज़ीरो ऑवर' के तहत कांग्रेस के सभी शीर्ष नेताओं को गिरफ्तार कर लिया, जिसके परिणामस्वरूप यह आंदोलन पूरी तरह से एक स्वतःस्फूर्त (Spontaneous) और नेतृत्वहीन जन-विद्रोह के रूप में उभर कर सामने आया। 2. भूमिगत गतिविधियों के माध्यम से आंदोलन का संचालन करने वाले प्रमुख समाजवादी नेताओं में अरुणा आसफ अली, अच्युत पटवर्धन, राम मनोहर लोहिया और जयप्रकाश नारायण (जिन्हें हजारीबाग सेंट्रल जेल से भागने का श्रेय है) शामिल थे, जबकि उषा मेहता ने गुप्त रूप से 'कांग्रेस रेडियो' का प्रसारण किया था। 3. सिंगापुर में वर्ष 1943 में आजाद हिंद फौज (INA) की कमान संभालने के बाद सुभाष चंद्र बोस ने 'दिल्लीचलो' और 'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा' का नारा दिया, तथा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का नाम क्रमशः 'शहीद द्वीप' और 'स्वराज द्वीप' रखा। 4. जापानी सेना के सहयोग से सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में INA की एक टुकड़ी ने मार्च 1944 में भारतीय मुख्य भूमि पर आक्रमण किया और मणिपुर के मोइरंग में भारतीय स्वतंत्रता का तिरंगा झंडा फहराया, जिसे युद्ध के अंतिम चरण में भारी सैन्य और लॉजिस्टिक असफलताओं का सामना करना पड़ा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? अकबर ने दक्षिण भारत के किस राज्य को जीतकर अपने साम्राज्य का हिस्सा बनाया और सुल्तान "चाँद बीबी" से संघर्ष किया?
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